भारत के महान क्रांतिकारी रासबिहारी बोस
भारत के स्वतंत्रता संग्राम में रासबिहारी बोस का नाम आदर पूर्वक लिया जाता है। रासबिहारी बोस का
जन्म 25 मई 1886 को बंगाल में बर्धमान जिले के सुबालदह गाँव में हुआ था। प्रथम महायुद्ध में सशस्त्र
क्रांति की जो योजना बनाई गई थी, वह रासबिहारी बोस के ही नेतृत्व में निर्मित हुई थी। सन् 1912 ई. में
वाइसराय लार्ड हार्डिंग पर रासबिहारी बोस ने ही बम फेंका था। प्रख्यात वकील और शिक्षाविद रास बिहारी
बोस क्रांतिकारी तो थे ही, सर्वप्रथम आजाद हिन्द फौज के निर्माता भी थे। रास बिहारी बोस आजाद हिंद
फौज के आधार स्तंभ थे। उन्होंने आजाद हिंद फौज की स्थापना कर उसकी कमान नेताजी सुभाष चंद्र बोस
को सौंपी थी। बीसवीं सदी के शुरूआती दशकों में जितने बड़े क्रांतिकारी षडयंत्र हुए थे, उन सबके सूत्रधारों में
शामिल थे रास बिहारी बोस। गदर रिवोल्यूशन से लेकर अलीपुर बम कांड केस तक, गर्वनर जनरल हॉर्डिंग
की हत्या की प्लानिंग से लेकर मशहूर क्रांतिकारी संगठन युगांतर पार्टी के उत्तर भारत में विस्तार तक।
महान क्रांतिकारी रासबिहारी बोस का नाम हमेशा आदर के साथ लिया जाता रहेगा।
रासबिहारी बोस भारत के एक महान क्रान्तिकारी नेता थे जिन्होने ब्रिटिश राज के विरुद्ध गदर षडयंत्र एवं
आजाद हिन्द फौज के संगठन का कार्य किया। उन्होंने न केवल देश में क्रांतिकारी गतिविधियों का संचालन
करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई बल्कि विदेश में रहकर भी वह देश को आजादी दिलाने के प्रयास में
आजीवन लगे रहे । दिल्ली में तत्कालीन वायसराय लार्ड चार्ल्स हार्डिंग पर बम फेंकने की योजना बनाने,
गदर की साजिश रचने और बाद में जापान जाकर इंडियन इंडिपेंडेस लीग और आजाद हिंद फौज की
स्थापना करने में रासबिहारी बोस की महत्वपूर्ण भूमिका रही। 25 मई रासबिहारी बोस की जयंती के रूप में
हम मनाते है।
सर्वप्रथम आजाद हिन्द फौज के निर्माता रासबिहारी बोस उन लोगों में से थे जो देश से बाहर जाकर विदेशी
राष्ट्रों की सहायता से अंग्रेजों के विरुद्ध वातावरण तैयार कर भारत की मुक्ति का रास्ता निकालने की
सोचते रहे, सभी भारतीयों को आह्वान कर भारत को स्वतंत्र राष्ट्र घोषित कर दिया। रास बिहारी बोस ने 12
मई 1915 को कोलकाता छोडा । वे राजा पी.एन.टी.टैगोर, रवींद्रनाथ टैगोर के दूरके रिश्तेदार बनकर जापान
गए। कुछ इतिहासकारो ंके अनुसार रवींद्रनाथ टैगोर इस छद्मरूप् को जानते थे । रास बिहारी 22 मई,
1915 को सिंगापुर तथा 1915 से 1918 के बीच जून में टोकियो पहुंचे । वे एक भगौडे के समान रहे, तथा
अपना निवास 17 बार बदला । इसी कालावधिमें वे गदर पार्टी के हरबंस लाल गुप्ता एवं भगवान सिंह से
मिले । पहले महायुद्ध में जापान ब्रिटेन का मित्र राष्ट्र था, तथा उसने रास बिहारी एवं हरबंसलाल को
अपराधी घोषित करनेका प्रयास किया। हरबंसलाल अमेरिका भाग गए तथा रास बिहारीने जापान का
नागरिक बनकर अपनी आंखमिचौली समाप्त की। उसने सोमा परिवार की बेटी, टोसिको से विवाह किया।
यह परिवार रास बिहारी के प्रयासों को सहानुभूति से देखता था । इस दंपतिके दो बच्चे थे, लडका, मासाहिद
एवं लडकी, तेताकू । मार्च 1928 में 28 वर्ष की आयु में टोसिका की मृत्यु हो गई । रास बिहारी बोस ने
जापानी भाषा सीख ली तथा वार्ताकार एवं लेखक बन गए । उन्होंने कई सांस्कृतिक गतिविधिया में हिस्सा
लिया तथा भारतका दृष्टिकोण स्पष्ट करने हेतु जापानी में कई पुस्तकें लिखीं । रास बिहारी के प्रयासा के
कारण टोकिया में 28 से 30 मार्च 1942 के बीच एक सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें राजनैतिक
विषय पर चर्चा हुई। टोकिया में 28 मार्च 1942 को आयोजित सम्मेलन के पश्चात भारतीय स्वतंत्रता
संगठन की स्थापना करन ेका निश्चय किया गया। कुछ दिन पश्चात सुभाषचंद्र बोस को उसका अध्यक्ष
बनाना निश्चित हुआ । जापानियों द्वारा मलाया एवं बर्मा में पकडे गए भारतीय कैदियों को भारतीय
स्वतंत्रता संगठन में तथा भारतीय राष्ट्रीय सेना में भरती होने हेतु प्रोत्साहित किया गया। रास बिहारी तथा
कप्तान मोहन सिंह एवं सरदार प्रीतम सिंहके प्रयासा के कारण 1 सितंबर 1942 को भारतीय राष्ट्रीय सेना
की स्थापना हुई । वह आजाद हिंद फौजके नामसे भी जानी जाती थी। दूसरा महायुद्ध समाप्त होन से पूर्व,
21 जनवरी 1945 को टोकिया में रास बिहारी बोसकी मृत्यु हुई। जापानी सरकार ने एक विदेशी को दी
जानेवाली सर्वोच्च उपाधि से उनका सम्मान किया।
-बाल मुकुन्द ओझा