बलिदान दिवस 13 जून पर विशेष
जीतने की जिद से पलसाना के खिलाडी ने तबाह की थी 3 पाक चौकिया
पलसाना। मां-बाप का दुलार अंगड़ाई लेते जवानी का मौह भी उस राष्ट्रभक्ति के जुनून के सामने नहीं दिख पाता। बस एक ही जज्बा था वह भी देश के लिए जान देना तथा दुश्मनों की जान लेने वाले सीकर जिले के पलसाना कस्बे के वीर सपूत शहीद सीताराम कुमावत कुमावत की निंगाहे बाल्यकाल से ही बास्केटबॉल में थी। नजर खेल कोटे से सेना में भर्ती होने का वो सपना भी 8 मई 1990 में शादी के 3 साल बाद ही पूरा हो गया। 27 अप्रैल 1993 को खेल कोर्ट से सेना में भर्ती हो गया। इसी बीच 4 दिन में पाकिस्तानी घुसपैठियों में चल रहे ऑपरेशन विजय के दौरान 16 जून 1999 को खबर मिली जो शहीद होने की थी। इसके बाद शहीद को सलामी देने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। 18वीं ग्रेनेडियर्स की टीम के साथ सेक्टर 3 चौथी चौकी पार कर रहा था। दुश्मन की मिसाइल में शिकार होकर तिरंगे में लिपट कर आए शहीद सीताराम कुमावत का जैसे ही घर में पार्थिव देह पहुंचा तो परिवार वालों का रो-रो कर बुरा हाल हो गया। इसके बाद राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। हमारे रिपोर्टर पवन कुमार शर्मा ने जब शहीद की मां गीता देवी से वार्तालाप थी तो उन्होंने बताया कि मेरा बेटा देश के लिए शहीद हुआ है। बेटी प्रियंका एवं नीतू ने बताया मुझे गर्व है कि मैं एक शहीद की बेटी हूं। जब सीताराम कुमावत शहीद हुए तो दोनों बेटियां छोटी थी। जब पिता बिंडदीचंद कुमावत से शहीद के बारे में बात करते हैं तो आंखें नम हो जाती है। वे बताते हैं कि 27 अप्रैल 1993 को वह बास्केटबॉल का राष्ट्र स्तरीय खिलाड़ी बनने के बाद सेना में भर्ती हुआ।
सरकारी स्कूल का नामकरण शहीद के नाम से पलसाना राष्ट्रीय राजमार्ग 52 स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय का नामकरण नहीं होने से लंबे समय तक धरना प्रदर्शन किया। इसके बाद सरकारी स्कूल का नामकरण शहीद सीताराम कुमावत एवं भामाशाह कन्हैया लाल के नाम से कर दिया। साथ ही विद्यालय में शहीद के नाम पर स्मारक भी बनाया। जिनकी याद में प्रतिवर्ष कार्यक्रम होते रहते हैं।