ढाबलाभोज ओर सरखेडी के सरपंच ने एशिया का सबसे स्वच्छ गांव मॉलिंनॉन्ग मेघालय का किया भ्रमण
पिड़ावा। झालावाड़ जिले की सबसे बड़ी पंचायत समिति पिड़ावा की ग्राम पंचायत ढाबलाभोज और सरखेडी के सरपंच ने पंचायत समिति पिड़ावा के विकास अधिकारी संजय प्रतिहार के मार्गदर्शन से प्रेरित होकर पूर्वी भारत के मेघालय राज्य में स्थित गांव मॉलिंनॉन्ग में दो दिन रुक कर वंहा के स्थानीय सरपंच, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय वरिष्ठ नागरिकों से मुलाकात कर गांव की स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण तथा मनरेगा योजना के अंतर्गत होने वाले विकास कार्यों की जानकारी का आदान प्रदान किया। अपनी स्वच्छता के लिए एशिया में प्रसिद्ध है मौलिन्नोंग गांव मौलिन्नोंग गांव मेघालय के पूर्वी खासी हिल्स जिले में स्थित है। यह गांव अपनी स्वच्छता के लिए भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में मशहूर है। साल 2003 में डिस्कवर इंडिया द्वारा इसे एशिया का सबसे स्वच्छ गांव का दर्जा भी दिया गया था। यही वजह है कि इसे गॉड्स ऑन गॉर्डन भी कहा जाता है। एक आदर्श गांव की तमाम बातें यहां मौजूद हैं। इस गांव की खूबसूरती का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसे भगवान का बगीचा भी बोला जाता है। ये गांव कई सालों से स्वच्छता के लिए प्रसिद्ध है। इस गांव में पेड़ों की जड़ों से ब्रिज बनाए गए हैं। इन ब्रिज की खूबसूरती देखते ही बनती है और ये ट्रेकिंग के लिए भी खास हैं। इस खूबसूरत गांव में प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। यहां बांस की बनी हुई डस्टबीन का प्रयोग किया जाता है। इस गांव में लोग सामान ले जाने के लिए कपड़ों से बने थैलों का प्रयोग करते है। यहां के बच्चे भी साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखते हैं। इस गांव के सभी लोग शिक्षित हैं। ये एक आदर्श गांव है। यहां के लोग पेड़ों के लिए खाद बनाने के लिए कचरे को एक गड्ढे में डाल कर रखते हैं। ये गांव महिला सशक्तिकरण की मिसाल भी पेश करता है। यहां पर बच्चों को मां का सरनेम मिलता है और पैतृक संपत्ति मां द्वारा घर की सबसे छोटी बेटी को दी जाती है। इस गांव में झरना, ट्रेक, लिविंग रूट ब्रिज, डॉकी नदी के लिए मशहूर है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता देखते ही बनती है। इस गांव में कई रंग- बिरंगें फूलों के गार्डन भी हैं जो यहां की खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं।