पाण्डित्य प्रशिक्षण शिविर का हुआ शुभारंभ
रतनगढ़। आलस्य मनुष्य के शरीर में स्थित सबसे बड़ा शत्रु है। मनुष्य इस धरा पर ईश्वर की सर्वोत्कृष्ट सृष्टि है यह विचार राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय के सेवानिवृत्त प्राचार्य डॉ रामगोपाल शर्मा ने स्थानीय वेद विद्यालय में पांडित्य प्रशिक्षण शिविर के उद्घाटन समारोह में कहे। शर्मा ने स्वनामधन्य पंडित विष्णु दत्त शास्त्री को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए शास्त्री द्वारा किए गए सुकर्म व शिष्य परंपरा को साधुवाद दिया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि रमेश चंद्र इंदौरिया ने कहा कि संघर्ष आदमी को बहुत कुछ सिखाता है और संघर्ष के बिना कोई भी व्यक्ति आगे नहीं बढ़ सकता। महेश चंद्र पुरोहित ने कहा कि परमात्मा की प्राप्ति में अणिमा आदि सिद्धियां तो प्राप्त होती ही हैं तथा अंत में विष्णु की प्राप्ति होती है। इससे पूर्व संत शिरोमणि शोभानंद महाराज व पंडित विष्णु दत्त शास्त्री के चित्र पर माल्यार्पण दीप प्रज्वलन व मंगलाचरण से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम को डॉक्टर वेद प्रकाश पुरोहित, आशुतोष लाटा, महेंद्र कुमार उपाध्याय, शंकर लाल सारस्वत, उदय प्रकाश दाधीच, गौतम महर्षि, बद्री प्रसाद बणसिया, ताड़केश्वर पुरोहित व नेमीचंद महर्षि ने भी संबोधित किया। अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए अधिष्ठाता दिवाकर शास्त्री ने कार्यक्रम समापन की घोषणा की। इस अवसर पर सत्यनारायण माटोलिया, विनोद कुमार शर्मा, दीनदयाल आत्रेय, वासुदेव महर्षि, भवानी शंकर शर्मा, महावीर प्रसाद शर्मा, अनिल बबेरवाल, अंजनी कुमार शर्मा, दीपक जोशी, गंगाधर तिवारी, शशिकांत धरेंद्र, पंडित पाल महर्षि, शांति प्रकाश हरितवाल, ओमप्रकाश बबेरवाल, चक्रधर सिण्डोलिया, शीशपाल बिंयाला, सतीश हरितवाल सहित अनेक गणमान्य जन उपस्थित थे।शिविर के पहले दिन 72 विद्यार्थियों के रजिस्ट्रेशन हुए।कार्यक्रम का संचालन सुधाकर शर्मा ने किया।