25 जनवरी को हो सकता है बिहार में कोई बड़ा खेल!
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अचानक से मंगलवार को राजभवन पहुंच गए थे । इसको लेकर बिहार की राजनीति गरमा गई । हालांकि मुख्यमंत्री और राज्यपाल के बीच औपचारिक वार्ता और मुलाकातें होती रहती है, लेकिन लोग यह मान के चल रहे है कि 25 तारीख तक बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव हो सकता है। आने वाले दिनों में कोई बड़ी राजनीतिक डेवलपमेंट हो सकती है।
'हम' संयोजक जीतन राम मांझी ने कहा है कि हाल के दिनों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जिस तरह से ट्रांसफर पोस्टिंग कर रहे हैं। बिना अनुशंसा के ही मुख्यमंत्री अधिकारियों का ट्रांसफर पोस्टिंग कर रहे हैं। इससे ऐसा लगता है कि जरूर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कोई राजनीतिक चाल चल रहे हैं। वहीं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एनडीए में शामिल होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि अगर भविष्य में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एनडीए में शामिल हो जाते हैं तो जीतन राम मांझी को कोई एतराज नहीं होगा।
मांझी ने कहा कि हाल के दिनों में सीट बंटवारे को लेकर महागठबंधन में विवाद चल रहा है जितना जल्दी हो सके सीट का बंटवारा हो। जेडीयू यह चाहती है और लालू प्रसाद यादव कहते हैं कि अभी क्या जरूरत है। इस मामले में भी लालू और नीतीश में मतभेद है। सीट बंटवारे और तेजस्वी को मुख्यमंत्री बनाने मामले पर लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव हाल के दिनों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को मनाने गए थे। दोनों बाप बेटों के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात मामले को लेकर राजनीतिक गलियारों में यही कयास लगाए जा रहे हैं।
'हम' संयोजक ने कहा कि यह तो बात बहुत पहले से तय है लालू प्रसाद यादव की इच्छा है कि किसी भी परिस्थिति में तेजस्वी को मुख्यमंत्री बनाया जाए। इसके लिए लालू प्रसाद यादव को जो भी करना होगा वह कर सकते हैं। 25 जनवरी तक सभी बातें लोगों के सामने आ जाएगी कि आखिरकार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लालू प्रसाद यादव के दबाव में तेजस्वी को मुख्यमंत्री बनाते हैं या नहीं?देखा जाय तो राजद कोटा के तीन मंत्रियों का विभाग बदल के नीतीश कुमार ने स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की है कि महागठबंधन सरकार में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है।
गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी नीतीश कुमार को लेकर अपने तेवर में नरमी दिखाई है और कुछ दिनों पहले उन्होंने राजस्थान में एक अखबार को दिए इंटरव्यू में नीतीश कुमार के दोबारा एनडीए में आने की अटकलें को लेकर कहा कि अगर कोई प्रस्ताव उनके पास आएगा तो वह उसे पर विचार करेंगे। बता दें, इससे पहले अमित शाह लगातार यह कहते आए हैं कि नीतीश कुमार के लिए भाजपा के दरवाजे से हमेशा के लिए बंद हो चुके हैं मगर राजस्थान में जो उन्होंने बात कही उसे ऐसा संकेत मिल रहा है कि शायद अमित शाह और नीतीश कुमार के बीच में कोई डील हो चुकी है और बस औपचारिक ऐलान बाकी है। शाह के इस बयान के बाद जनता दल यूनाइटेड ने भी अपने तेवर में नरमी दिखाई और कहा कि अमित शाह ने कभी नहीं कहा था कि जनता दल यूनाइटेड के लिए दरवाजे बंद हो चुके हैं।खबरों की माने तो जनता दल यूनाइटेड ने अगले कुछ दिनों तक अपने सभी विधायकों को पटना में बने रहने के लिए कहा है और साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री जीतन मांझी ने भी अपने सभी विधायकों को 25 जनवरी तक पटना में ही रहने का निर्देश दिया है।
हमें याद रखना चाहिए कि बिहार कूटनीति, राजनीति और अर्थशास्त्र के पंडित माने जाने वाले चाणक्य की धरती है। जिसने चंद्रगुप्त मौर्य के पाटलिपुत्र पर राज करने के तरीकों और राजनीति के रहस्यों से रूबरू करवाया। लेकिन वर्तमान दौर में बिहार की सियासी फिजां में रोज नए कयास लगाए जा रहे हैं। कभी नीतीश कुमार के इंडिया गठबंधन के संयोजक बनाए जाने की बात सामने आती है। अगले ही क्षण नीतीश के कांग्रेस से नाराज होने की खबरे सुर्खियां बनाती हैं। नौकरियों की बहार के दौर में विज्ञापन से डिप्टी सीएम तेजस्वी बाहर नजर आते हैं तो नीतीश इस पूरी योजना को सात निश्चय पार्ट-2 का हिस्सा बताते हैं। कुल मिलाकर कहें तो लगातार ऐसी खबरें सामने आ रही है कि बिहार की महागठबंधन की सरकार वेंटिलेटर पर चली गई है और कभी भी नीतीश कुमार की तरफ से वेंटिलेटर हटा दी जाने की सूरत में इसके गिरने के दावे भी लोकल मीडिया चैनलों की तरफ से भी किये जा रहे है।
आपको याद होगा कि 23 जून 2023 को जब नीतीश कुमार नरेंद्र मोदी के अश्वमेघ यज्ञ वाले घोड़े को रोकने के लिए मीटिंग बुलाते हैं तो पहली नजर में इसे उनके फिर से प्रधानमंत्री मैटेरियल वाले ख्याब के जिंदा होने के दावे कई वर्ग की तरफ से किए जाते हैं। लेकिन बंगाल में एक दूसरे के खिलाफ रही ममता और वाम दलों को एक साथ लाने के अलावा कांग्रेस की दो सरकारों (दिल्ली, पंजाब) को हटा सत्ता में आने वाली आम आदमी पार्टी के बीच भी ऐसा गठजोड़ करा देते हैं जिसकी बानगी चंडीगढ़ मेयर चुनाव में दोंनों के गठबंधन कर चुनाव में जाने की बात से साफ हो जाता है। लेकिन इंडिया गठबंधन के विचार को जन्म देने वाले नीतीश कुमार ने ऐसा सोचा भी नहीं होगा कि उनके साथ ही बड़ा खेल हो जाएगा।
संयोजक के नाम बुलाई गई बैठक में राहुल गांधी की तरफ से कहा गया कि ममता बनर्जी और अखिलेश यादव इस बैठक में मौजूद नहीं हैं। नीतीश को संयोजक बनाने को लेकर सहमति नहीं बन पा रही थी । सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक राहुल के बयान पर भड़कते हुए ललन सिंह ने माइक अपनी तरफ करते हुए कहा कि हम मांगने नहीं गए थे। इसके बाद से ही सबकुछ बदलता नजर आया। नीतीश कुमार को समझ में आ रहा है कि इंडिया गठबंधन ने उनके साथ धोखा कर दिया। धोखे का बदला लेंगे। पहले लालू यादव की तरफ से बैटिंग करने वाले नीतीश के खास ललन सिंह को साइड किया गया। फिर पिछले दो दिन में संगठन में बदलाव करते हुए सिंह के गुट के लोगों को किनारे किया गया। उन लोगों को ज्यादा महत्व दिया गया जो लोग प्रो बीजेपी स्टैंड के लिए जाने जाते हैं। इसके बाद कांग्रेस का डेलीगेशन नीतीश कुमार से जाकर मिलता है। सूत्र बताते हैं कि संजय झा ने कांग्रेस के डेलीगेशन को साफ शब्दों में कहा कि अगर आपको संयोजक नहीं बनाना था तो ऐसा मजाक क्यों किया गया। एक तरफ नाम भी प्रपोज किया जाता है। फिर प्रस्ताव भी रोक दिया जाता है। ममता बनर्जी का नाम लिया जाता है। बता दें कि ममता बनर्जी पहले ही सीटों को लेकर अपनी मंशा साफ कर चुकी हैं। वहीं अखिलेश यादव से उत्तर प्रदेश के अंदर अभी तक कांग्रेस का सीटों को लेकर समझौता नहीं हो पाया। इससे इतर बीते दिनों जयंत चौधरी की रालोद को सपा ने सात सीटों पर चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया, जिसे उन्होंने स्वीकार भी कर लिया। तो क्या कांग्रेस ने ये कहकर बहाना बनाया कि नीतीश कुमार को संयोजक बनाया जाए इसके लिए ममता बनर्जी, अखिलेश यादव से पूछना होगा। इसके साथ ही कांग्रेस ने संयोजक को लेकर तो नेताओं से पूछने जैसी बातें कह कर अपनी थ्योरी दे दी लेकिन मल्लिकार्जुन खरगे को चेयरपर्सन बनाने का फैसला तो झट से हो गया। इंडिया गठबंधन की तरफ से किए गए छलावे के बाद से ही वैसे ही नीतीश परेशान चल रहे हैं।
जब राहुल गांधी ने पटना में नीतीश कुमार से मुलाकात की तो उसका ऑडियो भी सामने आया उसमें वो शिकायत करते नजर आ रहे थे कि कांग्रेस के कोटे से 2 और मंत्री बनाने हैं, कब इस पर मुहर लगेगी। नीतीश कुमार इस बात पर चेहरा बनाते नजर आए थे। अभी विभागों की अदला-बदली की गई इसमें कांग्रेस के लोगों को एडजेस्ट करने का मौका था। लेकिन ये बदलाव न करके कांग्रेस पार्टी को फिर से सिग्नल दे दिया गया कि आपकी चीजों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नीतीश कुमार बिहार की सियासत के वो नेता हैं जिनके पास सियासी बंदूक तो खुद की होती है लेकिन विरोधी पर निशाना साधने के लिए चुनावी समर में कारतूस सहयोगी से लेते हैं। मतलब मौके की नजाकत को भांप कारतूस बदलने का विकल्प सदैव वो अपने हाथों में रखते हैं।
नीतीश कुमार की संसदीय राज्य मंत्री के साथ मिलकर बजट की बात किए जाने की बात भी छलावा नजर आ रही है। बजट पर बात वित्त मंत्री, मुख्यमंत्री का है। ये भी कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार प्रक्रिया को जानना चाह रहे होंगे। अगर सरकार गिरा दिया जाता है तो फिर कितने दिन का वक्त मिलेगा। बीजेपी के साथ जाने पर कितने दिन का वक्त मिलेगा। हो सकता है वो राज्यपाल से मिलकर सभी दांव-पेंच को जांच-परख रहे होंगे। आपको याद होगा कि नीतीश कुमार ने साल 2020 में भी 24 घंटे पहले तक खबरों को अफवाह बताकर खारिज कर रहे थे। अमित शाह के फोन तक पर उन्होंने खबरों को गलत बताया था। अगले दिन सुबह महागठबंधन के साथ मिलकर सरकार बना ली।
इसी हलचल के दौरान बुधवार को नीतीश कुमार ने प्रसिद्ध समाजवादी नेता एवं प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत कर्पूरी ठाकुर को देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किए जाने के केंद्र सरकार के निर्णय पर प्रसन्नता व्यक्त की और इसे सही निर्णय बताया। कर्पूरी ठाकुर को मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित करने के केंद्र सरकार के फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्पेशल धन्यवाद दिया।नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में लिखा, "पूर्व मुख्यमंत्री और महान समाजवादी नेता स्व॰ कर्पूरी ठाकुर जी को देश का सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ दिया जाना हार्दिक प्रसन्नता का विषय है। केंद्र सरकार का यह अच्छा निर्णय है। स्व॰ कर्पूरी ठाकुर जी को उनकी 100वीं जयंती पर दिया जाने वाला यह सर्वोच्च सम्मान दलितों, वंचितों और उपेक्षित तबकों के बीच सकारात्मक भाव पैदा करेगा। हम हमेशा से ही स्व॰ कर्पूरी ठाकुर जी को ‘भारत रत्न’ देने की मांग करते रहे हैं। वर्षों की पुरानी मांग आज पूरी हुई है। इसके लिए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को धन्यवाद। इससे भी प्रतीत होता है कि एन डी ए और नीतीशकुमार के बीच धुंध छट रही है और 25 को कुछ बड़ा खेला होगा ।
- अशोक भाटिया,