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दागी और परिवारवादी एक मंच पर

दागी और परिवारवादी एक मंच पर

मोदी के विरोध में भ्रष्टाचार में लिप्त और परिवारवादी नेता एक साथ, एक मंच पर आ रहे हैं। मोदी सरकार
ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जो अभियान चलाया, उसने आज परिवारवादियों और भ्रष्टाचारियों दोनों की जड़ें
हिला दी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हर बात में विरोध करने वाले नेताओं और पार्टियों का अपना अपना
दुःख है। मोदी के सबसे बड़े विरोधी के रूप में राहुल गांधी, अरविन्द केजरीवाल, उद्धव ठाकरे, ममता
बनर्जी, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव का नाम लिया जा सकता है। इनमें एक नाम बिहार के
मुख्यमंत्री नीतीश का और प्रमुखता से लिया जा सकता है जो कल तक मोदी के सहयोगी थे और आज
विरोध का झंडा उठाये हुए है। इन सब का अपना अपना दुखड़ा सब के सामने है जो छिपाये नहीं छिपता।
राहुल गाँधी कांग्रेस के नेता है। कांग्रेस को सत्ताच्युत कर ही मोदी ने सत्ता हासिल की थी। राहुल पर नेशनल
हेराल्ड मामले में भ्रष्टाचार का मुकदमा भाजपा राज में दाखिल हुआ था। सोनिया गांधी और राहुल गांधी
नेशनल हेराल्ड मामले में जमानत पर चल रहे है। इन दोनों पर एक अखबार की करोड़ों रुपये की संपत्ति
अवैध रूप से अर्जित करने का आरोप है। इसके अलावा राहुल को मानहानि के एक मुक़दमे में दो साल की
सज़ा भी हो चुकी है । कट्टर ईमानदार होने का दावा करने वाले अरविन्द केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री
है। केजरीवाल सरकार के दो मंत्री भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में बंद है इसलिए केजरीवाल का आग बबूला
होना स्वाभाविक है। दिल्ली सरकार को अफसरों के ट्रांसफर पोस्टिंग मामले में केंद्र द्वारा अध्यादेश लाकर
रोकने पर केजरीवाल विपक्षी दलों के एक होकर विरोध करने की मुहीम चला रहे है। भाजपा से बगावत कर
कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने वाले उद्धव ठाकरे की सरकार शिव सेना के दो टुकड़े कर भाजपा
द्वारा छीन लेने पर वे स्वयं को अपमानित और आहत महसूस कर रहे है। ममता बनर्जी और भाजपा का
झगड़ा जग जाहिर है। ममता के भतीजे पर केंद्रीय एजेंसियों का शिकंजा कसा हुआ है। अखिलेश यादव के
हाथ से भी भाजपा ने सत्ता छीन ली थी। रही बात तेजस्वी यादव की तो उनके पिता लालू यादव भ्रष्टाचार के
आरोप में सजा याप्ता है और तेजस्वी के खिलाफ भी जांच चल रही है। मोदी से ये सभी नेता परेशान और
दुखी है।
भारत में परिवारवाद का भूत एक बार फिर हिलोरे लेने लगा है। हमारे लोकतान्त्रिक देश में एक दर्जन राज्यों
में परिवारवाद की चिंगारी अभी सुलग रही है। यूँ देखा जाये तो राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा में वंशवादी
राजनीति न के बराबर है जबकि कांग्रेस, सपा, डीएमके, आरजेडी, एनसीपी, लोकदल के नाम से विभिन्न
दल, नेशनल कॉन्फ्रेंस, लोक जनशक्ति पार्टी, देवेगौड़ा की पार्टी, अकाली दल जैसे दलों का संगठन और सत्ता

एक परिवार विशेष के लिए समर्पित है। परिवारवादी नेता भी मोदी से दुखी है। मोदी ने उनके परिवार से
सत्तासुख जो छीन लिया। हालाँकि कई परिवारवादी अभी सत्ता पर काबिज है। जम्मू कश्मीर के अब्दुल्ला
परिवार की हालत बिन पानी मछली की हो रही है। तमिलनाडु में स्टालिन हाल फिलहाल सत्ता सुख भोग रहे
है। जयललिता के बाद करूणानिधि परिवार को चुनौती लगभग ख़त्म हो गई है। हरियाणा में चौधरी
देवीलाल का परिवार भी छीन भिन्न हो रहा है। इस परिवार का एक वारिस भाजपा के साथ सुख भोग रहा है
और परिवार के दूसरे सदस्य सत्ता छीन जाने से तीन तरह हो रहे है। हरियाणा का हुड्डा परिवार भी सत्ता से
अलग थलग पड़ा है। देवेगौड़ा परिवार भी इन दिनों सत्ता से बाहर है। ठाकरे परिवार भी सत्ता से अलग होने के
बाद कांग्रेस से पींगे बड़ा रहा है।
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी मोदी ने कई बार कह चुके है आज भ्रष्टाचारियों और परिवारवादियों का
महिमामंडन हो रहा है। हमें इसे खत्म करना होगा। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से राजनीतिक क्षेत्र
की इस बुराई ने देश की हर संस्थाओं में पोषित कर दिया है। राजनीति में दागी और
परिवारवादी राजनीति ने बहुत नुकसान पहुंचाया है। परिवारवादी राजनीति परिवार के लिए होती
है, उसे देश से कोई लेना देना नहीं होता है। देशवासियों को भ्रष्ट और वंशवादियों को उखाड
फेंकना है तभी सच्चा लोकतंत्र देश में कायम होगा। यहाँ यह कहा जाना समीचीन होगा की दागी
और परिवारवादी अपने अपने कारणों से मोदी से खप्पा है और येन केन प्रकारेण मोदी को हटाने के लिए
सभी प्रकार के दांव पेंचों का उपयोग कर रहे है। यह तो 2024 के लोकसभा चुनाव ही बता पाएंगे की मोदी
विरोध का यह प्रयोग कहां तक सफल होगा।

-बाल मुकुन्द ओझा

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