ग्रामीण शिविरों से टीबी मुक्त भारत अभियान को मिली नई ताकत
Jaipur : टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में जयपुर प्रथम जिले में ग्रामीण सेवा शिविर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इन शिविरों के माध्यम से मल्टी-ड्रग रेजिस्टेंट ट्यूबरकुलोसिस (एमडीआर-टीबी) से पीड़ित मरीजों को पोषण किट वितरित कर उपचार के साथ आवश्यक पोषण सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार टीबी के प्रभावी उपचार के लिए केवल दवाएं ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि मरीजों को संतुलित और पौष्टिक आहार मिलना भी बेहद जरूरी है। इसी सोच के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित शिविरों के जरिए मरीजों तक पोषण सामग्री पहुंचाई जा रही है, ताकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो और वे तेजी से स्वस्थ हो सकें।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रवि शेखावत ने बताया कि विभाग टीबी रोगियों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनके पोषण स्तर में सुधार के लिए भी लगातार प्रयास कर रहा है। उनका कहना है कि बेहतर पोषण से मरीजों को उपचार का सकारात्मक लाभ मिलता है और स्वास्थ्य सुधार की प्रक्रिया तेज होती है।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. रविन्द्र कुमार खत्री ने बताया कि एमडीआर-टीबी मरीजों के लिए लंबे समय तक नियमित उपचार के साथ पर्याप्त पोषण बेहद आवश्यक है। पोषण किट के माध्यम से मरीजों को जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे उपचार के परिणाम बेहतर होने की संभावना बढ़ती है। साथ ही मरीजों की नियमित निगरानी और परामर्श भी किया जा रहा है।
ग्रामीण सेवा शिविरों के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों और चिकित्सा अधिकारियों ने लोगों को टीबी के लक्षणों, बचाव और समय पर जांच कराने के महत्व के बारे में जानकारी दी। ग्रामीणों से अपील की गई कि यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी, लगातार बुखार, वजन कम होना या अन्य संबंधित लक्षण दिखाई दें तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जांच करवाएं।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि जनजागरूकता, पोषण सहायता और समय पर उपचार के समन्वित प्रयासों से टीबी उन्मूलन अभियान को और गति मिलेगी। विभाग का लक्ष्य जनसहभागिता के माध्यम से टीबी मुक्त जयपुर और टीबी मुक्त भारत के संकल्प को साकार करना है।