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टीएमसी में बढ़ी तकरार, कल्याण बनर्जी के बयान से मचा सियासी बवाल

टीएमसी में बढ़ी तकरार, कल्याण बनर्जी के बयान से मचा सियासी बवाल

नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस के भीतर बढ़ते मतभेद अब सार्वजनिक मंचों तक पहुंच गए हैं। वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी के हालिया बयान ने पार्टी की आंतरिक राजनीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने न केवल अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली पर सवाल उठाए, बल्कि पार्टी नेतृत्व के सामने स्पष्ट संदेश भी रख दिया।

कल्याण बनर्जी ने कहा कि पार्टी में कुछ फैसलों और व्यवहार के कारण उनके लिए काम करना मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अभिषेक बनर्जी का रवैया कई वरिष्ठ नेताओं को असहज करता है और इससे संगठन को नुकसान पहुंच रहा है। उनका कहना था कि लंबे समय से पार्टी के साथ खड़े रहने के बावजूद उन्हें सम्मानजनक माहौल नहीं मिल रहा।

इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। भाजपा नेताओं ने इसे टीएमसी के भीतर गहराते संकट का संकेत बताया। केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा कि पार्टी के नेताओं और सांसदों के बीच दूरी बढ़ती नजर आ रही है, जबकि बिहार के मंत्री राम कृपाल यादव ने दावा किया कि संगठन के भीतर असंतोष लगातार बढ़ रहा है।

बिहार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि अब कई नेता खुलकर अपनी राय रख रहे हैं, जबकि पहले ऐसा माहौल नहीं था। वहीं उत्तर प्रदेश के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने इसे राजनीतिक दिशा बदलने की सोच से जोड़ते हुए कहा कि कई नेताओं का नजरिया बदल रहा है।

दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने कहा कि पार्टी के भीतर जो नाराजगी दिखाई दे रही है, उसका केंद्र ममता बनर्जी नहीं बल्कि अभिषेक बनर्जी हैं। उन्होंने कहा कि कल्याण बनर्जी हमेशा पार्टी और ममता बनर्जी के प्रति निष्ठावान रहे हैं, इसलिए उनके बयान को गंभीरता से देखा जाना चाहिए।

विवाद तब और बढ़ गया जब कल्याण बनर्जी ने साफ शब्दों में कहा कि पार्टी की आगे की दिशा को लेकर अंतिम फैसला ममता बनर्जी को करना होगा। उन्होंने संकेत दिया कि यदि संगठन में मौजूदा व्यवस्था ही जारी रहती है तो उनके लिए आगे साथ चलना कठिन हो सकता है।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय से मजबूत स्थिति रखने वाली टीएमसी के लिए यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लगातार चुनावी सफलताओं के बीच शीर्ष नेतृत्व से जुड़े इस सार्वजनिक विवाद ने पार्टी के अंदरूनी समीकरणों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है और आने वाले दिनों में इसके राजनीतिक असर पर सभी की नजर रहेगी।

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