मालपुरा में चारागाह भूमि की किस्म परिवर्तन का फैसला निर्धारित मापदण्डों के आधार पर – राजस्व मंत्री
जयपुर। राजस्व मंत्री श्री हेमंत मीणा ने सोमवार को विधानसभा में कहा कि ब्यावर जिले का ग्राम मालपुरा चारागाह भूमि में बसा है। इस चारागाह भूमि के आबादी भूमि में परिवर्तन का निर्णय उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुसार ही किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में मालपुरा ग्राम पंचायत नगर परिषद ब्यावर में सम्मिलित हो गयी है। श्री मीणा ने कहा कि मालपुरा ग्राम पंचायत में पक्के निर्माण तोड़ने के मामले में उन मकानों के बिलानाम भूमि, चारागाह भूमि अथवा वन भूमि पर बने होने के संबंध में जांच कराई जाएगी। राजस्व मंत्री प्रश्नकाल के दौरान विधायक श्री शंकर सिंह रावत द्वारा इस संबंध में पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब दे रही थे। चारागाह भूमि के संबंध में उच्चतम न्यायालय के निर्देशानुसार ‘सेट अपार्ट’ प्रावधान के तहत कुछ निर्धारित शर्तों के आधार पर भूमि आवंटन का प्रावधान है। इनमें प्रमुख रूप से वर्ष 1985-86 की बसावट होना, 1 जनवरी 1986 से पूर्व के निवासी होना, राशन कार्ड, मतदाता सूची में नाम, तथा बिजली, पानी, टेलीफोन आदि के प्रमाण आदि शामिल हैं।इससे पहले सदस्य के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में राजस्व मंत्री ने बताया कि अजमेर जिले की तहसील पीसांगन में स्थित ग्राम रामपुरा डाबला चारागाह भूमि पर बसा हुआ नहीं है। उन्होंने कहा कि विधानसभा क्षेत्र ब्यावर की ग्राम पंचायत मालपुरा के प्रस्ताव और 02 मार्च, 2023 को जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र के आधार पर उपखण्ड अधिकारी, ब्यावर द्वारा 24 दिसम्बर, 2024 के पत्रांक 3244 से जिला कलक्टर कार्यालय को ग्राम मालपुरा में आबादी प्रयोजनार्थ भूमि आरक्षण/आवंटन के प्रस्ताव प्रेषित किये गये थे। उन्होंने बताया कि वर्तमान में स्वायत्त शासन विभाग की 17 जनवरी, 2025 की अधिसूचना द्वारा ग्राम मालपुरा को नगरपरिषद की सीमा में सम्मिलित कर लिया गया है। उक्त भूमि का चिन्हिकरण करवाया जाकर स्वायत्त शासन विभाग को हस्तांतरित करने की कार्यवाही जैरकार है। उन्होंने कहा कि संबंधित भूमि को नगरपरिषद ब्यावर को शीघ्र हस्तांतरण किया जायेगा। तत्पश्चात् बसी आबादी के प्रकरण का निस्तारण स्वायत्त शासन विभाग द्वारा किया जा सकता है।