Dark Mode
पंचम वेद है श्रीमद् भागवत कथा - मनुश्री महाराज

पंचम वेद है श्रीमद् भागवत कथा - मनुश्री महाराज

सीकर।   विद्याश्रम पब्लिक स्कूल पोलोग्राउंड में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में सर्वप्रथम श्रीमती राधा महावीर प्रसाद लाटा, श्रीमती सावित्री ताराचंद जालान, श्रीमती विमला महावीर प्रसाद पांडे, श्रीमती मंजू राकेश लाटा कथा यजमानों द्वारा भागवत जी की पूजा एवं व्यासपीठ का पूजन किया गया।  तृतीय दिवस व्यासपीठ से राष्ट्रीय कथाकार  मनुश्री जी महाराज (रतनगढ़ वाले) ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा तारणहार है जो जीव श्रीमद्भागवत की शरण में आता है श्रीमद् भागवत कथा  उसको समस्त आनंद प्रदान करती है। महाराज ने बताया कि भगवान कपिल ने अपनी माता देवहुति को नवधा भक्ति का उपदेश दिया एवं हमें विशिष्ट भक्ति भावों से भगवान से जुडऩा चाहिए, किस प्रकार से भगवान की भक्ति  करनी चाहिए यह अपनी मां को भगवान कपिल ने बताया। उसके बाद महाराज ने ध्रूव चरित्र सुनाया और बताया कि भगवान की भक्ति करने से स्वयं परमात्मा प्रकट हो जाते हैं, ध्रूव से मिलने के लिए स्वयं भगवान पधारे और ध्रूव को अपने गले से लगा लिया। उसके बाद मनुश्री महाराज ने राजऋषि भरत का चरित्र सुनाया और साथ ही साथ अजामिल प्रसंग सुनाते हुए बताया कि अजामिल नामक उस ब्राह्मण की नारायण नाम से मुक्ति हो गई, इसलिए आप अपने बच्चों को अच्छे नाम दो अच्छे नामों से नवाजे... ''हो गए भव से पार लेकर नाम तेराÓÓ.. भगवान का नाम बहुत मीठा है, अगर हम भगवान की शरण में जाते हैं भगवान का नाम गाते हैं तो हमको परम गति की प्राप्ति होती है। कथा में पलसाना के मनोहरशरण दास महाराज पधारकर भक्तों को आशीर्वचन दिया। कल कथा में निर्जला एकादशी के अवसर पर श्री कृष्ण जन्मोत्सव नंद भवन महोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया जाएगा। आज श्रीमद् भागवत कथा के दौरान भारी संख्या में उपस्थित भक्तजन आनन्दातिरेक में नृत्य करने लगेे।  

 

Comment / Reply From

You May Also Like

Newsletter

Subscribe to our mailing list to get the new updates!