Dark Mode
नई हुकूमत का पहला कदम, बांग्लादेशी सेना में रीस्ट्रक्चरिंग

नई हुकूमत का पहला कदम, बांग्लादेशी सेना में रीस्ट्रक्चरिंग

ढाका। तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के कुछ दिन बाद बांग्लादेशी सेना में बड़े पैमाने पर फेरबदल किया गया है। रविवार को जारी आदेशों में ऑपरेशनल और इंटेलिजेंस पदों पर नई नियुक्तियां की गईं, जबकि भारत में रक्षा सलाहकार को भी नई जिम्मेदारी दी गई है। भारत में बांग्लादेश के रक्षा सलाहकार ब्रिगेडियर जनरल एमडी हाफिजुर रहमान को मेजर जनरल पद पर प्रमोट किया गया है। उन्हें वापस बुलाकर 55वीं इन्फैंट्री डिविजन का जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) नियुक्त किया गया है। लेफ्टिनेंट जनरल मुहम्मद मैनूर रहमान को सेना का चीफ ऑफ जनरल स्टाफ (CGS) बनाया गया है। वे इससे पहले आर्मी ट्रेनिंग एंड डॉक्ट्रिन कमांड के प्रमुख थे। उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल मिजानुर रहमान शमीम की जगह ली है, जिन्हें रिटायरमेंट लीव पर भेज दिया गया था।


आर्म्ड फोर्सेस डिवीजन और फील्ड कमांड में बदलाव
मेजर जनरल कैसर राशिद चौधरी को डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फोर्सेस इंटेलिजेंस (DGFI) का डायरेक्टर नियुक्त किया गया है। वे आर्मी मुख्यालय में ब्रिगेडियर जनरल के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने मेजर जनरल मोहम्मद जहांगीर आलम की जगह ली है, जिन्हें फिलहाल विदेश मंत्रालय में राजदूत के रूप में नियुक्त किया गया है। लेफ्टिनेंट जनरल मीर मुशफिकुर रहमान को सशस्त्र बल डिविजन का प्रिंसिपल स्टाफ ऑफिसर (PSO) बनाया गया है। वे इससे पहले चटगांव स्थित 24वीं इन्फैंट्री डिविजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग(GOC) थे। मौजूदा PSO लेफ्टिनेंट जनरल एसएम कामरुल हसन को विदेश मंत्रालय में राजदूत के पद पर ट्रांसफर कर दिया गया है। मेजर जनरल जेएम एमदादुल इस्लाम को ईस्ट बंगाल रेजिमेंटल सेंटर का कमांडेंट नियुक्त किया गया है। वहीं मेजर जनरल फिरदोस हसन सलीम को 24वीं इन्फैंट्री डिविजन का GOC बनाया गया है।


बांग्लादेश सेना में फेरबदल क्यों हुआ?
ये बड़ा फेरबदल तारिक रहमान की नई BNP सरकार के लिए सेना पर अपनी मजबूत पकड़ बनाने का पहला बड़ा कदम माना जा रहा है। फरवरी 2024 में छात्र आंदोलन से शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार बनी थी, जिसने सेना के कई शीर्ष पदों पर अपने करीबी या पुरानी व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों को तैनात किया था। अब 12 फरवरी 2026 के चुनाव में BNP की भारी जीत के बाद तारिक रहमान 17 फरवरी को प्रधानमंत्री बने, तो नई सरकार ने जल्दी से इन पदों पर बदलाव किए। इसके पीछे मुख्य वजह यह माना जा रहा है कि पुराने अधिकारियों (जो यूनुस सरकार या हसीना काल से जुड़े थे) को हटाकर BNP के करीबी या नई सरकार के प्रति वफादार अधिकारियों को महत्वपूर्ण कमांड और खुफिया पद दे रही है, ताकि सेना नई सरकार के खिलाफ कोई असंतुलन पैदा न करे और सेना मजबूत हो सके।


इस फेरबदल से क्या फायदा
नई सरकार की स्थिरता मजबूत होगी- सेना के चीफ ऑफ जनरल स्टाफ, खुफिया विभाग और अन्य प्रमुख पदों पर नए चेहरे आने से तारिक रहमान की सरकार को सेना का पूरा समर्थन मिलेगा। इससे कोई विद्रोह या अस्थिरता का खतरा कम हो जाएगा, खासकर जब देश में हाल ही में राजनीतिक उथल-पुथल हुई है।
पुरानी व्यवस्था के प्रभाव कम होंगे- यूनुस सरकार या हसीना काल के वफादार अधिकारियों को हटाया या राजदूत जैसे पदों पर भेजा जा रहा है, जिससे BNP विरोधी तत्वों की ताकत कम होगी। भारत से संबंधों पर असर- भारत में तैनात रक्षा सलाहकार ब्रिगेडियर जनरल हाफिजुर रहमान (जिन्हें कुछ रिपोर्ट्स में भारत-समर्थक माना जाता है) को वापस बुलाकर प्रमोशन देकर डिवीजन कमांड दिया गया है। इससे दिल्ली में बांग्लादेश की सैन्य प्रतिनिधि बदल जाएगी, जो भारत-बांग्लादेश संबंधों में नया संतुलन ला सकता है। सेना का फोकस बदलेगा- नए प्रमुखों के आने से सेना का ध्यान कोर डिफेंस रोल्स (राष्ट्रीय सुरक्षा) पर ज्यादा होगा, जबकि राजनीतिक हस्तक्षेप या आंतरिक निगरानी कम हो सकती है। इससे सरकार को आर्थिक सुधार, कानून-व्यवस्था और जनता की उम्मीदों पर फोकस करने में मदद मिलेगी।

Comment / Reply From

You May Also Like

Newsletter

Subscribe to our mailing list to get the new updates!