Dark Mode
नहीं थमा बांग्लादेश में हिन्दुओं का कत्लेआम

नहीं थमा बांग्लादेश में हिन्दुओं का कत्लेआम

बांग्ला देश में अल्पसंख्यक हिन्दुओं का कत्लेआम थमा नहीं है। एक के बाद एक हो रही हत्या रोंगटे खड़ा कर देने वाली है। शेख हसीना की सरकार को ज़बरदस्ती गिराने के बाद वहां हिंदू समुदाय पर हो रही बर्बरता ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। एक मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि, पिछले 18 दिनों में 6 हिंदुओं की नृशंस हत्या कर दी गई। इनमें दीपू चंद्र दास, अमृत मंडल, बजेंद्र बिसवास, खोंखन दास, राणा प्रताप बैरागी और शरत चक्रवर्ती मणि शामिल हैं। एक हिंदू विधवा के गैंगरेप का मामला सामने आया है। कट्टरपंथियों की हिंसक भीड़ लगातार हिंदू समुदाय के लोगों को निशाना बना रही है जिस कारण लोगों में खौफ फैला हुआ है। भारत के हिन्दू नेताओं ने बांग्ला देश में शांति सेना भेज हिंदुओं की रक्षा की मांग शुरू कर दी है। इसीबीच सोशल मीडिया पर संगठित हिंसा और अत्याचार के भयावह वीडियो सामने आ रहे हैं, यूनुस सरकार की निष्क्रियता पर सवाल उठ रहे हैं। यूनुस प्रशासन पर निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव कराने पर सवालिया निशान लगे है। हिन्दू उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल नहीं करने दिया जा रहा है। वैश्विक मीडिया की चुप्पी हैरान कर देने वाली है।
बांग्ला देश में लोकतंत्र की बहाली पर सवालिया निशान लगा है। यहाँ अभी भी भीड़तंत्र का शासन चल रहा है। हिंसक भीड़ का शिकार एक के बाद एक हिन्दू हो रहा है। अब तो वहां स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के बारे में सोचना भी खतरे से खाली नहीं है। शेख़ हसीना की सरकार के हटने के बाद से बांग्लादेश में स्थिति बेहद ख़राब हुई है। चुनी हुई सरकार वहां है नहीं, सर्वत्र अराजकता का बोलबाला है। कानून के राज की सरेआम धज्जियां उड़ रही है। पुलिस मूक बनी है।
बांग्ला देश में हिन्दू परिवारों पर कातिलाना हमले की ख़बरें रोंगटे खड़े कर देने वाली है। बांग्लादेश में बदलते राजनीतिक परिदृश्य में भीड़ हिंसा एक बड़ी संकट के रूप में उभरी है। कट्टरपंथी तत्व लगातार हिंदू परिवारों के घरों को निशाना बना रहे है। इसके विरोध में भारत में हिंदू संगठन यूनुस सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस बात के सबूत मिले हैं कि बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ लोगों को भड़काने के पीछे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI का हाथ है। इसी बीच 17 साल के निर्वासन के बाद पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान बांग्ला देश लौट गए है। उनकी यह वापसी फरवरी में होने वाले अहम आम चुनावों से ठीक पहले हुई है, ऐसे चुनाव जो भारत की क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण हैं।
यह देखा गया है कि, पाकिस्तान और बांग्ला देश में जब भी कोई सियासी घटनाक्रम होता है उस दौरान उपद्रवी कट्टरपंथी तत्व अल्पसंख्यकों पर सबसे पहले हमले शुरू कर देते है। बांग्लादेश में जगह-जगह पर हिंदू मंदिरों और हिंदू समुदाय पर हमले की खबरें आ रही हैं। अल्पसंख्यक अधिकार संगठनों का दावा है कि 2024-25 के दौरान हजारों हिंसा-घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें मंदिरों पर हमले, संपत्ति को नुकसान और जानलेवा हिंसा के मामले शामिल हैं। मीडिया रिपोर्ट से पता चलता है कि हिंदुओं के घरों और मंदिरों को निशाना बनाया गया है। हिंदुओं को जान बचाने के लिए छिपना पड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, हिंदुओं को घरों से निकाल कर पीटा जा रहा है। उनकी दुकानों में लूटपाट की जा रही है। बांग्लादेश में हिंदुओं पर सालों से हमले होते आ रहे हैं। हिंदुओं के मंदिर, घर, दुकानों, पांडाल में तोड़फोड़ और लूटपाट की खबरें सामने आती रही हैं। हिन्दू इलाकों में भयावह चीख पुकार मची है कि उसे सुनने वालों के रोंगटे खड़े हो जाएं। खौफ में जी रहे हिन्दू सवाल पूछ रहे हैं कि वो जाए तो कहां जाएं। कट्टरपंथियों ने हिन्दुओं के घरों में ऐसी तबाही मचाई की पीड़ित परिवार रोते बिलखते दिखे। बांग्लादेश में कई जगहों पर हिन्दुओं के रिहायशी इलाके में भीड़ ने हमला कर दिया, इस दौरान हिन्दुओं की घरों को जला दिया गया और जमकर तोड़फोड़ की गई। जिसके बाद हिन्दू समुदाय वहां अपनी जान की हिफाज़त की गुहार लगाता नज़र आया। आज़ादी के बाद पाकिस्तान और बांग्ला देश में सैंकड़ों हिन्दू मंदिरों को नेस्तनाबूद कर दिया गया। दोनों ही इस्लामिक देशों में हिंदू संस्कृति संकट में है। हाल यह है कि हिंदुओं को मंदिरों में पूजा करने के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। इन देशों में अल्पसंख्यक की महिलाओं के साथ रेप, मर्डर जैसी घटनाएँ आए दिन सामने आती रहती हैं।


-बाल मुकुन्द ओझा

Comment / Reply From

Newsletter

Subscribe to our mailing list to get the new updates!