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त्योहारी सीजन में मिलावटियों की पौ बारह

त्योहारी सीजन में मिलावटियों की पौ बारह

त्योहारी सीजन में मिलावटी खाद्य पदार्थों का खतरा बढ़ जाता है। मिलावट का खेल वैसे तो पूरे
साल चलता है, लेकिन त्योहारों में माँग बढ़ने से मिलावटखोरी और बढ़ जाती है। देश में हर
चीज की कीमतें बढ़ चुकी हैं। खाने पीने की चीजों सहित मिठाई बनाने के लिए प्रयोग होने वाली
सामग्री, जैसे दूध, घी, मावा, चीनी, मैदा सहित सभी चीजों के दाम बढ़े हैं। इससे मिठाई बनाने
का खर्च बढ़ गया है है। देश में त्योंहारी सीज़न शुरू हो चुका है। नवम्बर महीने की शुरूआत
करवा चौथ से होगी जो एक नवंबर को है। इसके बाद दीपावली, छठ पूजा, देवप्रबोधिनी एकादशी
और बैकुंठ चतुर्दशी आदि पर्व मनाए जाएंगे। दीपावली का त्योहार एक सप्ताह तक चलता है।
सप्ताह के दौरान धनतेरस, छोटी दीपावली, दीपावली, गोवर्धन पूजा अन्नकूट और भाईदूज एक
के बाद एक आते है। इस अवसर पर गरीब और अमीर सभी वर्ग के लोग अपने सामर्थ्य के
अनुरूप घर की साफ सफाई, नए कपड़े, सोने चांदी के सामान के साथ मिठाइयां बनाने और
खरीदने में व्यस्त हो जाते है। इस दौरान घर घर में मीठे पकवान बनते है। होटलों पर मिठाइयां
सज्ज जाती है। त्योहारी सीजन शुरू होते ही मिलावटिये भी सक्रीय होकर आमजन के स्वास्थ्य
से खिलवाड़ करते है। त्योहार आये और मिलावटिये सक्रीय न हो ऐसा हो नहीं सकता। अब तो
मिलावट और त्योहार का लगता है चोली दामन का साथ हो गया है।
देश भर में मिलावट को लेकर आमजन अभी भी भयभीत है और उसे विश्वास नहीं है की वह जो खा रहा है
वह शुद्ध है। खाद्य नियामक एफएसएसएआई की एक ताजा रिपोर्ट का गहनता से विश्लेशण करें तो पाएंगे
कि आज भी मिलावट को लेकर लोगों में भारी असमंजस की स्थिति है जिसके कारण देशभर में बड़े स्तर पर
मिलावटखोरी की धारणा बनने से लोगों का विश्वास घटा है। आबोहवा और पानी के बाद अब खाद्य पदार्थों
के सैंपल भी मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों की प्रयोगशाला में जांच के बाद
यह पुष्टि की गई है।
मिलावट का अर्थ है महँगी चीजों में सस्ती चीज का मिलावट। मुनाफाखोरी करने वाले लोग रातोंरात
धनवान बनने का सपना देखते हैं। अपना यह सपना साकार करने के लिए वे बिना सोचे-समझे मिलावट का
सहारा लेते हैं। सस्ती चीजों का मिश्रण कर सामान को मिलावटी कर महंगे दामों में बेचकर लोगों को न
केवल धोखा दिया जाता है, बल्कि हमारे स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ भी किया जाता है। मिलावटी खाद्य
पदार्थों के सेवन से प्रतिवर्ष हजारों लोग विभिन्न बीमारियों का शिकार होकर जीवन से हाथ धो बैठते हैं।

मिलावट का धंधा हर तरफ देखने को मिल रहा है। दूध बेचने और मिलावट करने वाले से लेकर बहुराष्ट्रीय
कंपनियों तक ने मिलावट के बाजार पर अपना कब्जा कर लिया है।
आज मिलावट का कहर सबसे ज्यादा हमारी रोजमर्रा की जरूरत की चीजों पर ही पड़ रहा है । संपूर्ण देश में
मिलावटी खाद्य-पदार्थों की भरमार हो गई है। आजकल नकली दूध, नकली घी, नकली तेल, नकली
चायपत्ती आदि सब कुछ धड़ल्ले से बिक रहा है। सच तो यह है अधिक मुनाफा कमाने के लालच में नामी
कंपनियों से लेकर खोमचेवालों तक ने उपभोक्ताओं के हितों को ताख पर रख दिया है। अगर कोई इन्हें
खाकर बीमार पड़ जाता है तो हालत और भी खराब है, क्योंकि जीवनरक्षक दवाइयाँ भी नकली ही बिक रही हैं

खाने के सामान में मिलावट एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। हमारे दैनिक प्रयोग में आने वाली वस्तुओं का
आजकल शुद्ध और मिलावट रहित मिलना मुश्किल हो गया है। मिलावट का कहर सबसे ज्यादा हमारी
रोजमर्रा की जरूरत की चीजों पर ही पड़ रहा है। आज समाज में हर तरफ मिलावट ही मिलावट देखने को
मिल रही है। पानी से सोने तक मिलावट के बाजार ने हमारी बुनियाद को हिला कर रख दिया है।
सामान्य तौर पर एक परिवार अपनी आमदनी का लगभग 60 फीसदी भाग खाद्य पदार्थों पर खर्च करता है।
खाद्य अपमिश्रण से अंधापन, लकवा तथा टयूमर जैसी खतरनाक बीमारियाँ हो सकती हैं। सामान्यत
रोजमर्रा जिन्दगी में उपभोग करने वाले खाद्य पदार्थों जैसे दूध, छाछ , शहद, हल्दी, मिर्च, पाउडर, धनिया,
घीं, खाद्य तेल, चाय-कॉफी, मसाले, मावा , आटा आदि में मिलावट की सम्भावना अधिक है। मिलावट एक
संगीन अपराध है। मिलावट पर काबू नहीं पाया गया तो यह ऐसा रोग बनता जा रहा कि समाज को ही
निगल जाएगा। मिलावट के आतंक को रोकने के लिए सरकार को जन भागीदारी से सख्त कदम उठाने
होंगे।

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