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राजहंस को रास आ रही है बोरखेड़ा की आबोहवा

राजहंस को रास आ रही है बोरखेड़ा की आबोहवा

जयपुर। सर्दियों के जाने के साथ—साथ राजस्थान की झीलों और तालाबों से प्रवासी पक्षियों की विदाई लगभग पूरी हो चुकी है, लेकिन जयपुर के समीप चाकसू क्षेत्र में बोरखेड़ा गांव का तालाब इन दिनों एक अलग ही कहानी बयां कर रहा है। लद्दाख, मंगोलिया और तिब्बती पठार में पाए जाने वाले और सर्दियों में उच्च हिमालय को पार कर दक्षिण एशिया की ओर प्रवास करने वाले प्रवासी पक्षी बार हेडेड गूज जयपुर के निकट डेरा डाले हुए हैं। एक दो की संख्या में नहीं अपितु 500 से अधिक की संख्या में 'बार-हेडेड गूज' के तीन बड़े—बड़े झुंड पक्षी प्रेमियों के आकर्षण का केन्द्र बना हुआ हैं।

एक दिन में 1600 किमी तक भरते हैं उड़ान:
स्थानीय बोलचाल में राजहंस के नाम से जाने—पहचाने वाले बार-हेडेड गूज दुनिया के सबसे ऊंचाई तक उड़ान भरने वाले पक्षियों में गिने जाते हैं। ये पक्षी 12,000 से 14,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकते हैं और प्रतिदिन बिना रुके लगभग 1600 किलोमीटर तक की दूरी तय करने में सक्षम होते हैं। इनके शरीर में पाया जाने वाला विशेष प्रकार का हीमोग्लोबिन कम ऑक्सीजन वाले वातावरण में भी अधिक ऑक्सीजन अवशोषित करने में मदद करता है, जिससे ये हिमालय के ऊंचे दर्रों को पार कर पाते हैं।

तालाब सूखा पर वनस्पति आई रास :
बोरखेड़ा तालाब का अधिकांश हिस्सा सूख चुका है, लेकिन पांच अलग-अलग हिस्सों में बचा पानी इन हिमालय पार करने वाले मेहमानों के लिए फिलहाल ठिकाना बना हुआ है। सूखते जलाशय के बीच बची छोटी-छोटी जलधाराओं में सैकड़ों बार-हेडेड गूज का झुंड दिनभर सक्रिय रहता है। यह पक्षी स्थानीय जल पक्षियों के साथ तैरते, उड़ते और जल क्रीड़ा करते दिखाई देते हैं। कभी ये शांत पानी में तैरते दिखाई देते हैं, तो कभी अचानक पूरे समूह के साथ आकाश में उड़ान भर लेते हैं। स्थानीय पक्षियों के साथ उनकी यह गतिविधियां तालाब के शांत वातावरण को जीवंत बना देती हैं और प्रकृति की एक दुर्लभ झलक प्रस्तुत करती हैं।

क्यों रुक गए अभी तक?
एक साथ इतनी बड़ी संख्या में इन पक्षियों की यहां उपस्थिति के बारे में पर्यावरण विज्ञानी व सेवानिवृत्त वन अधिकारी डॉ. सतीश कुमार शर्मा बताते हैं कि इन दिनों तापमान में उतार—चढ़ाव हो रहा है ऐसे में कम मानवीय गतिविधि व सुरक्षित वातावरण की अनुकूलता देख पक्षी यहां रुके हुए हो सकते हैं। इसी प्रकार यह भी हो सकता है कि इन पक्षियों का कोई एक झुंड यहां रुका हुआ हो और आसपास के तालाबों से कोई एक और झुंड यहां पहुंचा हो और इन पक्षियों को देख उस झुंड ने भी यहां पड़ाव डाल दिया हो। उन्होंने बताया कि बार हेडेड गूज पूर्णतया शाकाहारी पक्षी है और यहां मौजूद जलीय वनस्पतियों के साथ आसपास के क्षेत्र में नर्म घास इत्यादि, खुला व सुरक्षित क्षेत्र और अपेक्षाकृत शांत वातावरण प्रवासी पक्षियों को कुछ समय और ठहरने के लिए अनुकूल परिस्थितियां प्रदान कर रहे हैं।

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