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2024 की जंग घोटालेबाजों के खिलाफ लड़ी जायेगी

2024 की जंग घोटालेबाजों के खिलाफ लड़ी जायेगी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भ्रष्टाचारी राजनीतिज्ञों पर बड़ा हमला बोलते हुए साफ़तौर पर एलान किया है की
2024 की लड़ाई घोटालों के खिलाफ खुली जंग है। एक तरफ घोटालेबाज़ खड़े है तो दूसरी तरफ घोटालेबाजों
को जेल भेजने वाले। उन्होंने आरोप लगाया यह भ्रष्टाचारियों का कॉमन मिनिमम प्रोग्राम है। प्रधानमंत्री ने
कहा है विपक्ष का महाजुटान घोटालों को छिपाने और जेल जाने से खुद को बचाना है जिसमे ये कभी सफल
नहीं होंगे। इनमें कई नेता जेलों में बंद है, कई सजा याप्ता है तो बहुत से जमानत पर है। मोदी ने कहा कि
अगर उनकी (विपक्ष) घोटालों की गारंटी हैं, तो मोदी की भी एक गारंटी है। मेरी गारंटी है कि हर घोटालेबाज
पर कार्रवाई। हर चोर लुटेरे पर कार्रवाई की गारंटी. जिसने गरीब को लूटा है, देश को लूटा है, उसका हिसाब
तो होकर होकर रहेगा। आज जब जेल की सलाखें दिख रही हैं। इस बैठक में शामिल दलों के इतिहास को
देखेंगे, उन सबको मिला लें, तो कम से कम 20 लाख करोड़ के घोटालों की गारंटी है। कांग्रेस ने तो अकेले
करोड़ों रुपये का घोटाला किया है। मोदी ने कहा, कांग्रेस के घोटाले अकेले ही लाखों-करोड़ों के हैं। एक लाख
86 हजार करोड़ का कोयला घोटला, 1.76 करोड़ का 2 जी घोटाला, 70 हजार करोड़ का कॉमनवेल्थ घोटाला.
मनरेगा, हेलिकॉप्टर से सबमरीन तक कांग्रेस के घोटाले ही घोटाले हैं। तमिलनाडु में डीएमके पर अवैध
तरीके से संपत्ति बनाने का आरोप है। टीएमसी पर 23 हजार करोड़ से ज्यादा घोटाले के आरोप हैं। रोज वैली
घोटाला, शारदा घोटाला, शिक्षक भर्ती घोटाला, गो तश्करी, कोयला घोटाला. बंगाल के लोग ये घोटाले कभी
भूल नहीं सकते। एनसीपी पर पर 70 हजार करोड़ के घोटालों के आरोप हैं। कोऑपरेटिव बैंक घोटाला,
सिंचाई घोटाला, अवैध खनन घोटाला आदि इनकी लिस्ट भी बहुत लंबी है।
आजादी के बाद अनेक बड़े घोटाले हुए मगर हमने उनसे कोई सबक नहीं सीखा। जनधन को लूटने दिया।
कोई असरदार कार्यवाही नहीं होने से घोटालों की देश में बाढ़ सी आगयी। आजादी से अब तक देश में काफी
बड़े घोटालों का इतिहास रहा है। इनमें जीप खरीदी (1948) ,साइकिल आयात (1951), मूंधड़ा मैस
(1958),तेजा ऋण (1960), पटनायक मामला (1965) ,मारुति घोटाला, कुओ ऑयल डील,अंतुले ट्रस्ट,
एचडीडब्लू दलाली (1987), बोफोर्स घोटाला (1987 ), इंडियन बैंक (1992), कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाला,
नागरवाला कांड (1971),देवराज अर्स (1975),चुरहट लॉटरी कांड (1982),सेंट किट्स घोटाला (1989),जैन
हवाला डायरी कांड (1991),बाम्बे स्टाक एक्सचेंज घोटाला (1992), चीनी आयत (1994),जेएमएम सांसद
घुसकंड (1995),यूरिया घोटाला (1996), सुखराम (1996),मैच फिक्सिंग (2000),बराक मिसाइल घोटाला

(2001)चारा घोटाला (1996), तहलका, स्टॉक मार्केट ,स्टांप पेपर स्कैम सत्यम घोटाला और मनी लांडरिंग
घोटाला प्रमुख है।
देश में घपलों-घोटालों की ये सूची तो मात्र एक नमूना है। गिनने बैठो तो इतनी बड़ी सूची बन जाएगी कि
उसका दूसरा सिरा ही नहीं मिलेगा। ये सभी घोटाले प्रभावशाली लोगों के है। कईयों को सजा भी हो चुकी है।
मगर घोटाले बदस्तूर जारी है। घोटालेबाजों को कोई खौफ नहीं है। जेल जाना इन लोगों के लिए तीर्थ जाने के
सामान है।
पंजाब नेशनल बैंक में हुए महाघोटाले के बीच एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। यह बात है बैंकों के
दिवालिया होने की है। देश में 49 बैंक ऐसे हैं जो दिवालिया हो सकते हैं। इनमें 27 सरकारी बैंक और 22
प्राइवेट बैंक शामिल हैं। लंबे समय से एनपीए से जूझ रहे भारतीय बैंक दिवालिया होने के कगार पर हैं। यह
बात आरटीआई में सामने आई है। भारतीय बैंक लगातार दिए गए कर्ज को डूबते खाते में डाल रहे हैं। पिछले
5 साल में बैंकों के 3 लाख 67 हजार 765 करोड़ रुपए राइट ऑफ के जरिए डूब गए हैं। वहीं, इससे कहीं ज्यादा
रकम को बैड लोन की कैटेगरी में शामिल किया जा सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार रिजर्व बैंक की
तरफ से जो जानकारी मिली है उससे साफ है कि बैंक दिवालिया होने की तरफ बढ़ रहे हैं। आरबीआई के
आंकड़ों के मुताबिक, 2012 से सितंबर 2017 तक पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर बैंकों ने आपसी समझौते में
कुल 367765 करोड़ की रकम राइट ऑफ की है। यह ज्यादातर रकम समाज के कथित प्रभावी और धनाढ्य
लोगों की है।
चोरी और सीना जोरी इनका हथियार है। कई घोटालेबाज देश छोड़कर विदेश भाग चुके है। जिन्हें वापस देश
लाना महाभारत के सामान है। हम एक दूसरे पर आरोप लगाकर इन प्रकरणों को छोटा बना रहे है। घोटाले
किसी भी शासन में हुए हो मगर इन्हें माफ नहीं किया जासकता। हमारी चौकसी और जागरूकता के आभाव
में घोटालेबाज शेर हो रहे है। देश का माल खाकर देश को ही आँख दिखा रहे है। ऐसे तत्वों से सख्ती से
निपटने का समय आ गया है। घोटालेबाजों को पकड़ना ही होगा तभी देश की अस्मिता बचेगी और भ्रष्टाचार
का समूल खत्म होगा। देशवासियों को इस पर गहन चिंतन और मनन की जरुरत है। बाड़ खेत को खा रही है
इससे बचने के उपाय खोजने होंगे नहीं तो आने वाले समय में देश को खाने से कोई नहीं बचा पायेगा।

-बाल मुकुन्द ओझा

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