तीन दिवसीय वैशाखी पर्व एवं ओशो ध्यान शिविर महोत्सव सम्पन्न
ओशो ध्यान मंदिर, चतरपुरा में मनाया गया तीन दिवसीय वैशाखी पर्व
जयपुर। ओशो ध्यान मंदिर, चतरपुरा में तीन दिवसीय वैशाखी पर्व एवं ओशो ध्यान शिविर महोत्सव मनाया गया। इस अवसर पर ओशो प्रेमियों ने सद्गुरु ओशो द्वारा निर्देशित ध्यान विधियों में डुबकी लगाई। ओशो आश्रम के संचालक स्वामी अमृतानंद सरस्वती ने बताया कि ध्यान शिविर में ओशो निर्देशित सक्रिय ध्यान विधि करवाई गई। इस तीन दिवसीय ध्यान शिविर का संचालन मां अमृत प्रीतो, स्वामी महाबोध द्वारा किया गया।
उन्होंने बताया कि ओशो द्वारा निर्मित सक्रिय ध्यान युवाओं के लिए आधुनिक युग में तनाव मुक्त जीवन जीने के लिए बहुत ही वैज्ञानिक ध्यान विधी है। सक्रिय ध्यान में पहले चरण में तेज गति से श्वास के साथ ध्यान की शुरुआत होती है। दूसरे चरण में हमारे मन व शरीर में संग्रहित क्रोध, हिंसा, दमित वासना का निष्कासन होता है। तीसरे चरण में हूं मंत्र की चोट से नाभि केंद्र की शक्ति को जगाने का प्रयोग करते है। चौथा चरण में साक्षी भाव के साथ खड़े होकर आती-जाती श्वास को देखते हैं और पांचवें और अंतिम चरण में अहोभाव के साथ नृत्य करते हैं। इस ध्यान विधी से हृदय में एक नई ऊर्जा का संचार होता है। मन शांत होता है और परम आनंद की अनुभूति होती है। यह ध्यान विधी मनुष्य के बेहतर विकास एवं आत्म रुपांतरण में सहायक होती है।
ओशो लाइब्रेरी जयपुर के प्रवक्ता नरेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि ओशो ध्यान मंदिर चतरपुरा में नित्य मेडिटेशन करवाया जाता है। ध्यान की ये ऐसी सुंदर व्यवहारिक एवं वैज्ञानिक विधियां हैं, जिसे कोई भी साधक न केवल सरलता से कर सकता है बल्कि उससे मिलने वाले लाभ को भी प्राप्त कर सकता है। यदि आप अपने जीवन में दुःख व तनाव से भरे हैं तो ध्यान शिविर में भाग लेकर अपने जीवन को रूपांतरित करने का अवसर प्रदान कर सकते हैं।