प्रशिक्षण कार्यक्रमों से राज्य में मत्स्य पालन को मिल रहा बढ़ावा - चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री
जयपुर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने गुरुवार को विधानसभा में कहा कि राज्य में मत्स्य कृषकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करवाकर मत्स्य पालन से होने वाले लाभ की जानकारी दी जाती है। श्री खींवसर ने कहा कि राज्य में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का प्रचार-प्रसार कर इस योजना के तहत कृषकों को अनुदान देकर लाभान्वित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि भीलवाड़ा जिले में मत्स्य पालन को बढावा देने के लिये सभी श्रेणी के जलाशयों का मत्स्याखेट ठेका करवाया जाता है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री खींवसर प्रश्नकाल के दौरान मत्स्य मंत्री की ओर से सदस्य श्री गोपीचन्द मीणा द्वारा पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि मत्स्य पालन का टेंडर जलाशयों की कैटेगरी के अनुसार किया जाता है। श्री खींवसर ने कहा कि भीलवाड़ा में चार कैटेगरी के जलाशय हैं, इनमें “क” श्रेणी में 5 लाख रुपये से अधिक राशि के टेंडर मत्स्य विभाग, जयपुर के माध्यम से करवाए जाते हैं। इसी प्रकार “ख” श्रेणी में 50 हजार से 5 लाख रुपये की राशि के टेंडर जिला परिषद के माध्यम से तथा “ग” व “घ” श्रेणी में 10 हजार से 50 हजार रुपये राशि के टेंडर पंचायत समितियों के माध्यम से करवाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि अब “क” तथा “ख” श्रेणी के मत्स्य पालन के टेण्डर मत्स्य विभाग,जयपुर के माध्यम से ही किए जाएंगे। उन्होंने आश्वस्त किया कि भीलवाड़ा जिले में विगत सरकार के कार्यकाल में हुई अनियमितताओं की जांच करवाई जाएगी। इससे पहले विधायक श्री मीणा के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री ने वर्ष 2018 से 2025 तक की वर्षवार निविदा प्राप्तकर्ता फर्म का नाम एवं राशि का विवरण सदन की मेज पर रखा।