IDBI बैंक के निजीकरण पर बवाल, 10 हजार से ज्यादा कर्मचारी करेंगे हड़ताल
मुंबई। आईडीबीआई बैंक के निजीकरण को लेकर कर्मचारियों और बैंक प्रबंधन के बीच विरोध की स्थिति तेज होती जा रही है। सरकार की प्रस्तावित बिक्री प्रक्रिया के खिलाफ बैंक कर्मचारी 2 और 3 नवंबर को दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल करने जा रहे हैं। कर्मचारी संगठन का दावा है कि इस आंदोलन को 10 हजार से अधिक कर्मचारियों का समर्थन मिला है।
यह हड़ताल यूनाइटेड फोरम ऑफ आईडीबीआई ऑफिसर्स एंड एम्प्लॉइज के आह्वान पर बुलाई गई है। संगठन ने केंद्र सरकार और बैंक प्रबंधन से निजीकरण की योजना वापस लेने की मांग की है। यूनियन का कहना है कि बैंक को मुश्किल आर्थिक दौर से बाहर निकालने में कर्मचारियों, सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने अहम भूमिका निभाई है। ऐसे में बैंक की उपलब्धियों का श्रेय केवल निजी निवेश को नहीं दिया जा सकता।
कर्मचारी संगठन के मुताबिक, जब बैंक वित्तीय संकट से गुजर रहा था, तब कर्मचारियों ने ग्राहकों का भरोसा बनाए रखने के साथ बैंकिंग सेवाओं को लगातार जारी रखा। वहीं, सरकार और एलआईसी ने पूंजी उपलब्ध कराकर संस्थान को दोबारा मजबूत बनाने में मदद की।
आर्थिक संकट से उबरने में सरकार और एलआईसी की भूमिका
आईडीबीआई बैंक को वर्ष 2016 से 2020 के बीच गंभीर वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। भारतीय रिजर्व बैंक की एसेट क्वालिटी रिव्यू प्रक्रिया के बाद बड़ी संख्या में फंसे हुए कर्ज यानी एनपीए सामने आए थे। इससे बैंक की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ गया था।
यूनियन का दावा है कि बैंक को इस संकट से निकालने के लिए सरकार और एलआईसी ने मिलकर 46 हजार करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी सहायता दी थी। इसके बाद बैंक की वित्तीय स्थिति में लगातार सुधार हुआ और मुनाफे के आंकड़े भी बेहतर होते गए।
बैंक के वित्तीय आंकड़ों में हुआ सुधार
कर्मचारी संगठन ने बैंक की मौजूदा स्थिति का हवाला देते हुए बताया कि पिछले छह वर्षों में आईडीबीआई बैंक ने 30,100 करोड़ रुपये से अधिक का संचयी शुद्ध लाभ दर्ज किया है। वहीं, सकल एनपीए का स्तर 2018 में 31.78 प्रतिशत था, जो अब घटकर 2.30 प्रतिशत रह गया है।
यूनियन की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, बैंक का नेट एनपीए अनुपात 0.16 प्रतिशत पर आ गया है। इसके अलावा पूंजी पर्याप्तता अनुपात 26.38 प्रतिशत और प्रोविजन कवरेज अनुपात 99.31 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। संगठन का कहना है कि ये आंकड़े बैंक की बेहतर होती आर्थिक स्थिति और मजबूत वित्तीय आधार को दिखाते हैं।
फेयरफैक्स ग्रुप को नियंत्रण सौंपने का विरोध
बैंक कर्मचारी संगठन को सबसे ज्यादा आपत्ति इस बात पर है कि वित्तीय स्थिति में सुधार के बावजूद सरकार निजीकरण की दिशा में आगे बढ़ रही है। प्रस्ताव के तहत बैंक का नियंत्रण कनाडा के फेयरफैक्स ग्रुप को सौंपे जाने की प्रक्रिया पर चर्चा है।
यूनियन ने बैंक के प्रस्तावित मूल्यांकन पर भी सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि बिक्री की प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए और बैंक के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
अब 2 और 3 नवंबर की हड़ताल से यह साफ होगा कि निजीकरण के खिलाफ कर्मचारियों का विरोध किस स्तर तक पहुंचता है। इस आंदोलन के जरिए कर्मचारी सरकार तक अपनी मांग पहुंचाने और बैंक के भविष्य को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखने की तैयारी में हैं।