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उपभोक्ता हितों की रक्षा में एआई की उपयोगिता

उपभोक्ता हितों की रक्षा में एआई की उपयोगिता

आज के बाजारवादी दौर में उपभोक्ता का जागरुक होना बहुत जरूरी है। इसे दृष्टिगत रखते हुए हर वर्ष 15
मार्च को विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य आमजन को
उपभोक्ता के अधिकार और जरूरतों के प्रति जागरूक करना है ताकि ग्राहकों और उपभोक्ताओं के प्रति हो रही
धोखाधड़ी और सामाजिक अन्याय के खिलाफ लड़ सके। संयुक्त राष्ट्र द्वारा हर वर्ष एक थीम जारी की जाती है।
इस वर्ष 2024 की थीम उपभोक्ताओं के लिए निष्पक्ष और जिम्मेदार एआई रखी गई है। एआई यानि
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का अर्थ है बनावटी (कृत्रिम) तरीके से विकसित की गई बौद्धिक क्षमता। इसके ज़रिये
कंप्यूटर सिस्टम या रोबोटिक सिस्टम तैयार किया जाता है, जिसे उन्हीं तर्कों के आधार पर चलाने का प्रयास
किया जाता है जिसके आधार पर मानव मस्तिष्क काम करता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भारत में
शैशवावस्था में है और देश में कई ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें इसे लेकर प्रयोग किये जा सकते हैं। देश के विकास में
इसकी संभावनाओं को देखते हुए उद्योग जगत ने सरकार को सुझाव दिया है कि वह उन क्षेत्रों की पहचान करे
जहाँ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल लाभकारी हो सकता है। लाखों उपभोक्ता पहले से ही अपने दैनिक
जीवन में जेनरेटिव एआई का उपयोग कर रहे हैं। जिस तरह से हम काम करते हैं, निर्माण करते हैं, संचार करते
हैं, जानकारी इकट्ठा करते हैं, उस पर प्रौद्योगिकी का व्यापक प्रभाव पड़ने वाला है। तीव्र गति से हो रहे विकास
के साथ, हमें एक निष्पक्ष और जिम्मेदार एआई भविष्य सुनिश्चित करने के लिए तेजी से आगे बढ़ना चाहिए
और यह थीम हमें उसी दिशा में काम करने को प्रेरित करती है। प्रौद्योगिकी जीवन के सभी क्षेत्रों में प्रचलित
है और दैनिक जीवन में लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। इसलिए उपभोक्ताओं के साथ उनके संबंधों के
बारे में इन प्रौद्योगिकियों के प्रभावों के बारे में सावधान रहना और भी अधिक आवश्यक है।
आज का जमाना डिजिटल लेन देन का है। इसमें ऑनलाइन ठगी ज़ोरों पर है। इसलिए ग्राहकों को सतर्क और
जागरूक रखने फेयर डिजिटल फाइनेंस दिवस मनाया जा रहा है। इसमें कालाबाजारी, जमाखोरी, मिलावट,
नाप-तोल में गड़बड़ी, बिल ना देना, वस्तुओं का अधिक मूल्य लेना तथा इसी तरह के दूसरे गुनाह इन कानूनों
के अंतर्गत आते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार 2024 तक, डिजिटल बैंकिंग उपभोक्ताओं की संख्या 3.6 बिलियन से
अधिक होने की उम्मीद है। डिजिटल वित्त नए अवसर के साथ ही नए जोखिम भी लाता है जो कंज्यूमर्स के
लिए अनुचित परिणाम पैदा कर सकता हैं। भारत डिजिटल पथ पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। ड्राइविंग
लाइसेंस, बर्थ सर्टिफिकेट पानी बिजली के बिल, इनकम टैक्स रिटर्न आदि अनेक कामों के लिए अब प्रक्रियाएं
डिजिटल इंडिया की मदद से बहुत आसान, बहुत तेज हुई है। मोबाइल और वैकल्पिक भुगतान भारतीय
युवाओं में लोकप्रिय बने हुए हैं । ऐसा अनुमान है की अगले कुछ सालों में डिजिटल पेमेंट व्यवसाय में आशातीत
वृद्धि होगी। मौजूदा दौर में भारतीय खुदरा बाजार क्रान्तिकारी बदलाव से गुजर रहा है। उपभोक्ता भिन्न
चैनल्स (स्रोतो) से डिजिटल खरीदारी कर रहे हैं। ई-कॉमर्स या इ-व्यवसाय इंटरनेट के माध्यम से व्यापार का
संचालन है। न केवल खरीदना और बेचना, बल्कि ग्राहकों के लिये सेवाएं और व्यापार के भागीदारों के साथ
सहयोग भी इसमें शामिल है। ई-पेमेंट को हम इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट के नाम से भी जानते हैं ई-पेमेंट या
इलेक्ट्रॉनिक ई-पेमेंट किसी भी डिजिटल फाइनेंसियल पेमेंट लेनदेन है जिसमें दो या दो से अधिक पार्टियों के
बीच मनी ट्रान्सफर शामिल है। इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट इंटरनेट आधारित प्रक्रियाएं हैं। जो ग्राहक या उपयोगकर्ता
को उनकी खरीदारी आदि के लिए ऑनलाइन पेमेंट करने में मदद करती है। इंटरनेट पर पैसे ट्रांसफर करने के
लिए। इनमें मुख्य है इलेक्ट्रॉनिक कैश, स्मार्ट कार्ड और डेबिट क्रेडिट, गूगल पे, फोन पे आदि। जब हम
इलेक्ट्रॉनिक मीडियम का यूज करके पेमेंट करते हैं तो वह इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट कहलाता है जैसे-जैसे ई-कॉमर्स
का यूज बढ़ता जा रहा है वैसे वैसे इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट का भी यूज बढ़ता जा रहा है। ऑनलाइन इनवॉइस पेमेंट

से कंपनियों को समय बचाने में मदद मिलती है। वे तेज होते हैं और ग्राहकों के लिए अधिकतम प्रयास बचाते
हैं। यह भौतिक लेन देन में शामिल अत्यधिक लागत को कम करने में भी मदद करता है। इसी के साथ डिजिटल
ठगी भी बढ़ती रही है। उपभोक्ता कानून के बदलाव के तहत, ई-कॉमर्स कंपनियों (ऑनलाइन शॉपिंग
कंपनियों) को उपभोक्ता फोरम के तहत लाया गया है जिससे ग्राहकों को सुरक्षा की गारंटी मिले। भारत में
अपने ग्राहकों से यदि कोई कंपनी धोखाधड़ी करती है तो उसे 10 लाख तक का जुर्माना और 3 वर्ष की सज़ा हो
सकती है। 

 - बाल मुकुन्द ओझा

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