सट्टा बाजार में भी वसुंधरा राजे पहले पायदान पर
बीकानेर। विधानसभा चुनावों के बाद अब सट्टा बाजार में राजस्थान के सीएम पद को लेकर भी करोड़ों के दाव लग रहे है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बीकानेर के सट्टा बाजार में फिलहाल वसुंधरा राजे पहले पायदान पर है,जबकि दूसरे नंबर पर केन्द्रीय मंत्री अश्वनी वैष्णव चल रहे है। उनसे पहले इस पॉजिशन पर ओम बिड़ला थे। बीकानेर के एक सट्टोरिये ने अपना नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि फिलहाल सबसे कम भाव 1.25 रुपए वसुंधरा राजे के हैं। इसलिये सबसे ज्यादा दांव राजे पर ही खेला जा रहा है। इसके अलावा सट्टा बाजार में केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत,दीया कुमारी और राज्यवद्र्धन सिंह के नाम भी चल रहे है। लेकिन इनके भाव ज्यादा होने से दांव कम लग रहे है। जानकारी में रहे कि बीकानेर के सट्टा बाजार में विधानसभा चुनावों सीटों को लेकर भी करोड़ो के दांव लगे थे। सियासी जानकारों की मानें तो सट्टा मार्केट के अनुमान लगभग सटीक रहते हैं। विधानसभा चुनाव के रिजल्ट से पहले बीकानेर के सट्टा मार्केट ने बीजेपी की 115 से 118 सीट और कांग्रेस की 68 से 70 सीट बताई थी। चुनाव का रिजल्ट आया तो बीजेपी ने 115 सीट और कांग्रेस ने 69 सीट जीती। मार्केट ने पहले ही कांग्रेस के मंत्री बीडी कल्ला, भंवर सिंह भाटी की हार की घोषणा कर दी थी।
-सर्वे करके तय करते हैं भाव
सट्टोरिये ने बताया कि सट्टा मार्केट अपना खुद का सर्वे करके ही चुनाव में हर प्रत्याशी का भाव तय करता है। सट्टे से जुड़े लोग उन क्षेत्र में सर्वे करते हैं। वहां सरकारी कर्मचारी, लोगों से बात करने के बाद भाव तय किए जाते हैं। मार्केट के लोग ढाणी, गांव, शहर, हर क्षेत्र में अपने लोगों से लगातार संपर्क में रहकर फीडबैक लेते रहते हैं।
राजस्थान का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा इसका फैसला आज मंगलवार को हो जाएगा, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर पेंच कहां फंसा हुआ है, क्या बीजेपी जातीय समीकरण पार्टी के वोट बैंक और लोकसभा चुनाव को देखते हुए क्या एक बार फिर वसुंधरा राजे पर दावा खेलेगी या किसी नए चेहरे के हाथ में मरुधरा की कमान होगी?दरअसल गुजरते वक्त के साथ अटकलें का बाजार और बड़ा होता जा रहा है, जहां मुख्यमंत्री की फेहरिस्त में हर रोज नए नाम जुड़ते जा रहे हैं. अब पार्टी सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि हाई कमान जातिय समीकरण को सजाते हुए नया मुख्यमंत्री चुनना चाहती है, माना जा रहा है कि भाजपा मूल ओबीसी या जाट समुदाय से आने वाले किसी चेहरे को भी राजस्थान की जिम्मेदारी दे सकती है।