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विक्टर ऑर्बन 16 साल बाद हंगरी के प्रधानमंत्री चुनाव में हार गए

विक्टर ऑर्बन 16 साल बाद हंगरी के प्रधानमंत्री चुनाव में हार गए

बुडापेस्ट। विक्टर ऑर्बन हंगरी का प्रधानमंत्री चुनाव हार गए हैं। वे 16 साल से सत्ता में थे। विपक्षी तिस्जा पार्टी के पीटर मग्यार अगले प्रधानमंत्री बनेंगे। मग्यार पहले ऑर्बन की पार्टी फिदेस से जुड़े थे, लेकिन पार्टी में भ्रष्टाचार के खिलाफ उनसे अलग हो गए थे। ऑर्बन दुनिया के गिने-चुने नेताओं में हैं, जिनकी करीबी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और इजराइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू से है। इस बार के चुनाव में करीब 80% रिकॉर्ड वोटिंग हुई थी। नतीजों को बड़े राजनीतिक उलटफेर के रूप में देखा जा रहा है। इसका असर यूरोप और ग्लोबल राजनीति पर पड़ेगा।


ऑर्बन के समर्थन में वेंस खुद पहुंचे थे
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने 7 अप्रैल 2026 को हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट का दौरा किया। उनका यह दौरा काफी चर्चा में रहा, क्योंकि यह हंगरी के संसदीय चुनाव से सिर्फ पांच दिन पहले हुआ था और इसे प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन के समर्थन के तौर पर देखा गया। अमेरिकी इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब कोई मौजूदा उपराष्ट्रपति दूसरे देश जाकर किसी खास नेता के पक्ष में चुनाव प्रचार करता नजर आया हो।


तिस्जा पार्टी की 138 सीटों के साथ बड़ी जीत
शुरुआती नतीजों में तिस्जा पार्टी ने 199 में 138 सीटों पर जीत दर्ज की है। वहीं, ऑर्बन की फिदेस पार्टी को सिर्फ 55 सीटें ही मिली हैं। तिस्जा को करीब 53% और फिदेस को करीब 37% वोट मिले। इन चुनाव नतीजों के बाद हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में देर रात तक जश्न चलता रहा। डेन्यूब नदी किनारे हजारों लोग जुटे। कारों के हॉर्न, झंडे और नारेबाजी के बीच जश्न चलता रहा। कई जगह लोगों ने रूसियों घर जाओ जैसे नारे लगाए।

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