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आर्थिक प्रगति का पंख : चंडीगढ़ एयरपोर्ट की विस्तृत विकास यात्रा

आर्थिक प्रगति का पंख : चंडीगढ़ एयरपोर्ट की विस्तृत विकास यात्रा

चंडीगढ़। उत्तर भारत में यदि किसी हवाई अड्डे ने पिछले एक दशक में अपनी पहचान तेजी से बदली है, तो वह है Shaheed Bhagat Singh International Airport। आम बोलचाल में इसे चंडीगढ़ इंटरनेशनल एयरपोर्ट कहा जाता है, लेकिन यह केवल चंडीगढ़ का ही नहीं, बल्कि पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के विशाल भूभाग का साझा हवाई द्वार है। मोहाली में स्थित यह एयरपोर्ट भौगोलिक रूप से भले ही पंजाब में आता हो, पर इसकी उपयोगिता त्रि-राज्यीय है। Chandigarh की राजधानी क्षेत्रीय पहचान, Punjab की औद्योगिक ताकत, Haryana के उत्तरी जिलों की व्यावसायिक सक्रियता और Himachal Pradesh के पर्यटन उद्योग – सभी की उड़ानें इसी रनवे से आसमान पकड़ती हैं।

आर्थिक प्रगति का पंख : चंडीगढ़ एयरपोर्ट की विस्तृत विकास यात्रा

एक साधारण एयरस्ट्रिप से अंतरराष्ट्रीय टर्मिनल तक चंडीगढ़ में हवाई सेवाओं का इतिहास पुराना है, लेकिन आधुनिक अंतरराष्ट्रीय टर्मिनल का वास्तविक रूप कुछ समय पहले सामने आया। उसी वर्ष इसे आधिकारिक रूप से अंतरराष्ट्रीय दर्जा मिला और इसका नाम महान क्रांतिकारी Bhagat Singh के सम्मान में रखा गया। लगभग 300 से अधिक एकड़ में फैला यह एयरपोर्ट आधुनिक वास्तुकला और तकनीकी सुविधाओं से लैस है। विशाल ग्लास फसाड, ऊर्जा दक्ष संरचना, वर्षा जल संचयन प्रणाली और सोलर पावर आधारित व्यवस्थाएँ इसे एक ग्रीन एयरपोर्ट की पहचान देती हैं। टर्मिनल की वार्षिक यात्री क्षमता लाखों में है और निरंतर बढ़ती यात्री संख्या को देखते हुए समय-समय पर विस्तार कार्य किए जा रहे हैं। रनवे को इस तरह विकसित किया गया है कि बड़े विमानों की लैंडिंग संभव हो सके।

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किन राज्यों की जीवनरेखा है यह एयरपोर्ट? चंडीगढ़ एयरपोर्ट केवल शहर तक सीमित नहीं है। बल्कि पंजाब के मोहाली, लुधियाना, पटियाला, जालंधर जैसे औद्योगिक क्षेत्र हरियाणा के अंबाला, पंचकूला, यमुनानगर और हिमाचल प्रदेश के शिमला, सोलन, धर्मशाला और मनाली जाने वाले पर्यटक के लिए इन सभी क्षेत्रों के लिए यह सबसे सुविधाजनक हवाई अड्डा है। अनुमान है कि प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से यह एयरपोर्ट 5 से 6 करोड़ की आबादी को सेवा देता है।

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घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का विस्तार चंडीगढ़ से देश के प्रमुख महानगरों दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोलकाता, अहमदाबाद, जयपुर और श्रीनगर के लिए नियमित उड़ानें संचालित होती हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दुबई और शारजाह जैसे गंतव्यों के लिए सेवाएँ संचालित रही हैं, जिससे खाड़ी देशों में कार्यरत उत्तर भारतीय प्रवासियों को बड़ी राहत मिली है। भविष्य में यूरोप और दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए भी सीधी उड़ानों की संभावनाएँ तलाशी जा रही हैं।

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आर्थिक गतिविधियों का केंद्र : चंडीगढ़ एयरपोर्ट अब केवल यात्री परिवहन का माध्यम नहीं, बल्कि एक उभरता आर्थिक हब है। यहां विकसित कार्गो टर्मिनल से कृषि उत्पाद, औद्योगिक सामान और फार्मास्युटिकल उत्पादों का परिवहन संभव हुआ है। पंजाब की कृषि अर्थव्यवस्था और मोहाली-चंडीगढ़ का आईटी सेक्टर इस एयरपोर्ट से विशेष रूप से लाभान्वित हो रहे हैं। हिमाचल प्रदेश के पर्यटन उद्योग को भी इससे गति मिली है। मनाली, धर्मशाला, कसौली और शिमला आने वाले पर्यटक पहले दिल्ली पर निर्भर रहते थे, लेकिन अब चंडीगढ़ के माध्यम से उनकी यात्रा सरल हो गई है।

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नागरिक-सैन्य संयुक्त उपयोग: रणनीतिक महत्व चंडीगढ़ एयरपोर्ट की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसका नागरिक और सैन्य संयुक्त स्वरूप है। यहां Indian Air Force का एयरबेस स्थित है, जिसे Air Force Station Chandigarh के नाम से जाना जाता है। यह बेस उत्तरी सीमाओं की दृष्टि से अत्यंत रणनीतिक है। आपदा राहत, सैन्य आपूर्ति, और आपातकालीन अभियानों में इसकी अहम भूमिका रहती है। चूंकि यह संवेदनशील सैन्य क्षेत्र के निकट है, इसलिए यहां सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी है। बहु-स्तरीय सुरक्षा जांच सीआईएसएफ की तैनाती ड्रोन उड़ाने पर पूर्ण प्रतिबंध संवेदनशील क्षेत्रों में फोटोग्राफी निषिद्ध यात्रियों को अक्सर अन्य एयरपोर्ट की तुलना में अधिक सख्त जांच प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, लेकिन यही इसकी सुरक्षा की मजबूती का संकेत है।

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हालिया विकास और विस्तार पिछले कुछ वर्षों में एयरपोर्ट पर कई महत्वपूर्ण कार्य हुए हैं: रनवे सुदृढ़ीकरण,नए टैक्सीवे का निर्माण,मल्टीलेवल कार पार्किंग,एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम का आधुनिकीकरण,यात्री सुविधाओं में विस्तार, सरकारी क्षेत्रीय संपर्क योजना के तहत छोटे शहरों को जोड़ने की पहल भी की गई है।

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चुनौतियाँ भी खूब है और संभावना भी खूब है तेजी से बढ़ती यात्री संख्या और सीमित रनवे स्लॉट एयरपोर्ट के सामने चुनौती बने हुए हैं। सैन्य और नागरिक संचालन के बीच तालमेल भी एक जटिल प्रक्रिया है। फिर भी, भविष्य की योजनाओं में इसे उत्तर भारत के वैकल्पिक अंतरराष्ट्रीय हब के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। यदि अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी का और विस्तार होता है, तो यह एयरपोर्ट दिल्ली के दबाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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