1 फरवरी आगामी बजट – फिर जागी सीनियर सिटीजन की उम्मीदें
2020 कोरोना काल मानव इतिहास में एक अहम पड़ाव के रूप में देखा जाएगा| हममें से कई लोगों ने इस दौरान स्वास्थ्य संबंधी परेशानी, इनकम में अड़चन, आर्थिक अनिश्चितता, लोन के डिफॉल्ट की चिंता आदि का सामना किया है| इसके अलावा इस अवधि में ब्याज दरों में कमी आई है। इसकी वजह यह है कि सरकार कारोबार के लिए कर्ज लेना आसान बनाना चाहती है| लेकिन, इसका नुकसान भी हुआ है| अपने निवेश से ब्याज पर निर्भर रहने वाले लोगों पर इसका असर देखने को मिला है। उन्हें लगता है कि अब वे अपने निवेश से बहुत कम कमा पा रहे हैं। दोबारा निवेश के जोखिम के खतरों की भी उन्हें समझ हो गई है। उस पर महंगाई ने स्थिति और बिगाड़ दी है| यह आरबीआई के सहज स्तर 6 फीसदी से ऊपर निकल गई हैं |
1 फरवरी 2024 को सरकार अपना यूनियन बजट पेश करने वाली है। सारा देश, ख़ासतौर पर सीनियर सिटिज़न्स बड़ी बेसब्री से इस बजट घोषणा का इंतजार कर रहे हैं ताकि उन्हें पता चल सके कि उनके बटुए में और ज्यादा पैसे आएंगे या नहीं। बीते सालों में, जॉइंट इंडियन फैमिली ने न्यूक्लियर फैमिली का रास्ता खोल दिया है। इसका मतलब है कि आज अधिक से अधिक सीनियर सिटिज़न्स आत्मनिर्भर तरीके से अपनी सेविंग्स और इनकम के भरोसे अपनी जिंदगी गुजार रहे हैं।
पिछले साल किए गए इकनॉमिक सर्वे के अनुसार, भारत में बड़े-बुजुर्गों की हिस्सेदारी यानी 60 साल और उससे ज्यादा उम्र के लोगों की संख्या 2011 में 8.6% से लगातार बढ़ते हुए 2041 तक 16% यानी लगभग दोगुनी हो जाएगी। ऐसी परिस्थिति में, उपयोगी बजट सम्बन्धी घोषणाओं के माध्यम से इस वर्ग के लोगों की जरूरतों पर ध्यान देना बहुत जरूरी है।सीनियर सिटिज़न्स के साथ बजट सम्बन्धी उम्मीदों के बारे में चर्चा करते समय, एक मुद्दा बाकी सभी मुद्दों से ज्यादा महत्वपूर्ण था और वह हैं – टैक्स ब्रेक का मुद्दा। वे सब यही चाहते हैं कि उनका टैक्स ब्रेक, नॉन-रिटायर्ड कामकाजी लोगों से अलग हो। टैक्स ब्रेक की इस बढ़ती मांग का कारण, उनके और दूसरों की इनकम में मौजूदा अंतर है। एक सीनियर सिटिज़न जिसे पेंशन नहीं मिलती है वह बैंक सेविंग्स और डेट इन्वेस्टमेंट्स जैसे फिक्स्ड डिपॉजिट्स से होने वाले इंटरेस्ट इनकम पर निर्भर रहता है। इस मामले में उनकी चिंता का विषय, इंटरेस्ट रेट में होने वाला उतार-चढ़ाव है जिससे उनकी इनकम कम हो सकती है। दूसरी तरफ, पेंशन इनकम पर निर्भर रहने वाले सीनियर सिटिज़न्स को सेहत और सामाजिक सुरक्षा जैसी अन्य असुरक्षा की भी चिंता सताती रहती है।
इनकम टैक्स क़ानून के अनुसार, सीनियर सिटिज़न्स को दो समूहों में बांटा गया है – सीनियर सिटिज़न्स और सुपर सीनियर सिटिज़न्स। इनमें से प्रत्येक समूह के लिए टैक्स सम्बन्धी क़ानून भी अलग-अलग हैं। सीनियर सिटिज़न्स यानी 60 से 80 साल की उम्र के लोगों के लिए 3 लाख रुपये की इनकम तक टैक्स माफ़ है। सुपर सीनियर सिटिज़न्स यानी 80 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के लिए 5 लाख रुपये की इनकम तक टैक्स माफ़ है। रिटायर्ड लोग चाहते हैं कि यह अंतर ख़त्म हो जाए क्योंकि कई लोगों के पास, पेंशन और इन्वेस्टमेंट को छोड़कर इनकम का कोई अन्य साधन नहीं है। उनका मानना है कि सबके लिए 5 लाख रुपये की छूट सीमा तय की जानी चाहिए ताकि सभी सीनियर सिटिज़न्स पर टैक्स का बोझ कम हो सके।मौजूदा टैक्स स्लैब के अनुसार, सीनियर सिटिज़न्स को अलग-अलग रेट के हिसाब से टैक्स देना पड़ता है। सरकार को इन टैक्स स्लैब पर फिर से काम करना चाहिए ताकि सीनियर सिटिज़न्स के हाथ में ज्यादा पैसे बच सके। वर्तमान में, टैक्स पर अलग से 4% का हेल्थ और एजुकेशन सेस भी लिया जाता है। सरकार को सीनियर सिटिज़न्स के लिए इस सेस और अन्य सरचार्ज को कम या ख़त्म करने के बारे में सोचना चाहिए ताकि उनके हाथ में अपनी सेहत और अन्य जरूरतों के लिए ज्यादा पैसे बच सके।
सीनियर सिटिज़न्स पर महंगाई का ज्यादा असर पड़ता है। उनके इनकम के साधन सीमित और अक्सर निश्चित होने के कारण, बढ़ती महंगाई के कारण सीधे तौर पर उनकी खरीदने की ताकत कम हो सकती है। उनके पास महंगाई से लड़ने के लिए अपने इनकम को बढ़ाने का कोई तरीका नहीं भी हो सकता है। इसलिए, सरकार उन्हें अधिक से अधिक, महंगाई को मात देने वाले सेविंग्स और इन्वेस्टमेंट ऑप्शंस देने के बारे में सोच सकती है। वर्तमान में, सीनियर सिटिज़न्स सेविंग्स स्कीम में 30 लाख रुपये तक इन्वेस्ट किया जा सकता है जिस पर 8.2 % प्रति वर्ष की दर से सुनिश्चित रिटर्न मिलता है। सरकार इस सीमा को बढ़ाने, ज्यादा रेट ऑफ़ रिटर्न देने और एक कम लॉक-इन फिक्स करने के बारे में सोच सकती है। इससे सीनियर सिटिज़न्स की खरीदने की ताकत बढ़ जाएगी और उन्हें बेहतर लिक्विडिटी मिल पाएगी।
कई सीनियर सिटीजन की मांग है कि उन्हें चालू ब्याज से 2 प्रतिशन अतिरिक्त ब्याज मिलाना चाहिए । वैसे इस समय ऍफ़डी ब्याज दरों की बात करें तो डीसीबी बैंक में सीनियर सिटीजन को एफडी पर 8.6% का ब्याज मिल रहा है। पंजाब एंड सिंध बैंक में सीनियर सिटीजन को एफडी पर 7.9% का ब्याज दे रहा है। ज्यादातर बैंक सीनियर सिटीजन को अधिकतम 7.75 फीसदी का ब्याज दे रहे हैं। इसमें एसबीआई, HDFC, ICICI Bank आदि शामिल हैं। अगर सरकार 2 फीसदी तक ब्याज बढ़ता है तो सीनियर सिटीजन को मिलने वाला ब्याज 10 फीसदी तक जा सकता है।जिससे उनके बुढ़ापे की गाड़ी आसानी से चल सकती है ।
वसई पूर्व सीनियर सिटीजन एसोसिएशन के पूर्व जॉइंट सेक्रेटरी आनंद बोंगिरवार के अनुसार सरकार आयुष्यमान योजना मे बिना किसीं भेदभाव के सभी वरिष्ठ नागरिक को मेडिकल सुविधा प्रदान करें | सभी वरिष्ठ नागरिको का बँक मे जमा पूँजी की पुरी राशी की सुरक्षा की गॅरंटीकरें इसे 5 लाख की सीमा में लॉक अप न किया जाय |देश में चल रहे सभी विमान सेवा नागरिकों को 50% डिस्काउंट प्रदान किया जाये , विमान सरकारी हो यां गैर सरकारी | इस समय पारिवारिक पेंशन के लिये 65 लाख लोग पेन्शन के लिये लगातार संघर्ष कर रहे है सभी वरिष्ठ नागरिक को पेन्शन प्रदान किया जाय क्योकि उन्होंने अपने जीवन काल मे बहुत ही कम पैसे मे गुजर किया था और महंगाई बढ़ने पर उनकी जमा पुंजी मे कमी हो गई हैं | इसी प्रकार इंदौर से वरिष्ट नागरिक दौलत भाटिया बताते है कि सीनियर सिटीजन को दांतो की बीमारी के लिए इनकम टैक्स में कोई छूट नहीं मिलती। नकली दाँत बनवाने, और दांतों का इलाज करने की इनकम टैक्स में छूट दी जावे। दांतो के इलाज़ में एक बड़ी धनराशि ख़र्च होती है |
कोविड से पहले तक सीनियर सिटीजन को ट्रेन टिकट पर 40 से 50 फीसदी तक की छूट दी जाती थी लेकिन ये छूट कोविड के समय खत्म कर दी गई। कोविड का डर देश और दूनिया में खत्म होने के बाद भी सरकार ने इस छूट को फिर से शुरू नहीं किया है। अब सीनियर सिटीजन बजट में ट्रेन टिकट पर 50 फीसदी तक की छूट दिये जाने की डिमांड कर रहे हैं। वह उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार उन्हें ये छूट फिर से देना शुरू करेंगे।गौरतलब है कि आईआरसीटीसी सीनियर सिटीजन के लिए स्पेशल एक्सप्रेस ट्रेनों की सभी केटेगरी में रियायती किराए ऑफर करता था। आईआरसीटीसी साल 2019 के अंत तक 60 साल से अधिक उम्र के सीनियर सिटीजन और 58 साल या उससे अधिक उम्र की महिला बुजुर्ग यात्रियों को दुरंतो, शताब्दी, जन शताब्दी, राजधानी, मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों के ट्रेन टिकटों पर किराए में छूट देता था। जहां पुरुष वरिष्ठ नागरिक 40 प्रतिशत की रियायत के पात्र थे, वहीं महिला वरिष्ठ नागरिक ट्रेन टिकट पर 50 प्रतिशत की छूट का लाभ उठा सकती थी।साल 2019 के अंत तक सीनियर सिटीजन को ट्रेनों की टिकट की कीमत पर 40 से 50 फीसदी तक की छूट मिली थी। अगर राजधानी का फर्स्ट एसी का टिकट 4,000 रुपये है तो सीनियर सिटीजन को 2,000 या 2,300 रुपये में मिलता था। फिर साल 2019 के अंत और साल 2020 की शुरुआत में कोविड देश और पूरी दुनिया में फैल गया जिसके बाद IRCTC की टिकट बुकिंग विंडो पर ये सर्विस मिलनी बंद हो गई। अब सीनियर सिटीजन उम्मीद कर रहे हैं कि बजट में उन्हें ये खास छूट फिर से मिलेगी।
ज्ञात हो कि पिछले कुछ समय में रेलवे ने जबरदस्त कमाई की है। रेलवे की ओर से पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, रेलवे ने अप्रैल 2022 से दिसंबर 2022 के दौरान यानी 9 महीने के दौरान सिर्फ रेल किराए से 48,913 करोड़ की कमाई की है। वहीं पिछले साल इस अवधि में 71 फीसदी कमाई बढ़ चुकी है। रेलवे की ओर से हुई तगड़ी कमाई को लेकर उम्मीद है कि सीनियर सिटीजन को किराये में छूट मिल सकती है।
वरिष्ठ नागरिक वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के तहत 2024 के बजट में उच्च आयकर छूट सीमा की भी उत्सुकता से उम्मीद कर रहे हैं। मौजूदा सीमा को बुजुर्ग आबादी के जीवन यापन की बढ़ती लागत और स्वास्थ्य देखभाल खर्चों से निपटने के लिए अपर्याप्त माना जाता है। इसके अलावा, कई वरिष्ठ नागरिकों के पास आय का कोई नियमित स्रोत नहीं है, और वे अक्सर अपनी बचत, ब्याज और/या अपने निवेश पर अर्जित रिटर्न पर निर्भर रहते हैं। बुजुर्ग आबादी आम तौर पर बैंक सावधि जमा जैसे पारंपरिक वित्तीय संसाधनों में निवेश करना पसंद करती है । इन उपकरणों पर कम ब्याज दरों के कारण वरिष्ठ नागरिकों का यह वर्ग बुरी तरह प्रभावित हुआ है। यही कारण है कि वरिष्ठ नागरिक छूट सीमा में वृद्धि की वकालत कर रहे हैं, जिससे उन्हें राहत मिले और वित्तीय स्थिरता में सुधार हो।
वर्तमान में, मूल कर छूट सीमा वरिष्ठ नागरिकों (60 वर्ष से अधिक आयु) के लिए 3 लाख रुपये और बहुत वरिष्ठ नागरिकों (80 वर्ष से अधिक आयु) के लिए 5 लाख रुपये है। यह वह सीमा है जिस तक वरिष्ठ नागरिक की आय पर कर नहीं लगता है। अब, मांग यह है कि बजट में नई कर व्यवस्था में वरिष्ठ नागरिकों (60 वर्ष से अधिक) के लिए मूल कर छूट सीमा को 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये किया जाना चाहिए, जो कि बहुत वरिष्ठ नागरिकों (80 वर्ष से अधिक) के समान है।
वरिष्ठ नागरिक आगामी 2024 बजट में संभावित बोनस योजनाओं और कर प्रोत्साहनों को लेकर आशान्वित हैं। यह उम्मीद बुजुर्ग आबादी के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता की आवश्यकता पर आधारित है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए तैयार किए गए बोनस धन का सीधा इंजेक्शन प्रदान कर सकते हैं, जिससे स्वास्थ्य देखभाल, दैनिक जीवन और अन्य आवश्यक खर्चों से जुड़ी बढ़ती लागत को संबोधित करने में मदद मिलेगी। इससे न केवल वरिष्ठ नागरिकों की वित्तीय सुरक्षा बढ़ेगी बल्कि समाज में उनके योगदान को भी मान्यता मिलेगी।
तो, ये वित्त वर्ष 2024-25 के आगामी केंद्रीय बजट के लिए वरिष्ठ नागरिकों की कुछ सामान्य उम्मीदें हैं। वरिष्ठ नागरिकों की आर्थिक चुनौतियों का समाधान करके, सरकार बुजुर्ग समुदाय को सशक्त और उत्थान कर सकती है, जिससे उनकी सेवानिवृत्ति के वर्षों के दौरान अधिक सम्मानजनक और आरामदायक जीवन सुनिश्चित हो सके। हालांकि, चूंकि यह बजट 'वोट ऑन अकाउंट' है, इसलिए ये उम्मीदें पूरी होंगी या नहीं, इसका खुलासा 01 फरवरी 2024 को होगा।
- अशोक भाटिया,