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अनुपम खेर की 550वीं फिल्म का आगाज़, बोले– कभी सपने में भी नहीं सोचा था

अनुपम खेर की 550वीं फिल्म का आगाज़, बोले– कभी सपने में भी नहीं सोचा था

मुंबई। 3 जून 1981 को एक ऐसे शख्स ने मुंबई में कदम रखा, जो आज हिंदी सिनेमा की बड़ी पहचान बन चुका है। हम बात कर रहे हैं अनुपम खेर की, जिन्होंने अपने 43 साल के करियर में 550वीं फिल्म के आंकड़े को छू लिया है और अपने इतने लंबे करियर में उन्होंने कई तरह के उतार-चढ़ाव भी देखे। अब उन्होंने 550वीं फिल्म की शूटिंग शुरू कर दी है और इसका श्रेय अपने चाहने वालों को दिया है। बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर ने 1982 में आई फिल्म 'आगमन' में छोटा सा किरदार निभाकर अपने करियर की शुरुआत की थी, लेकिन 1984 में आई फिल्म 'सारांश' से उन्हें बड़ा ब्रेक मिला। किसे पता था कि 'सारांश' से सराहना पाने वाले अनुपम खेर हिंदी सिनेमा पर राज करेंगे? अब साल 2025 में अभिनेता ने अपनी 550वीं फिल्म 'खोसला का घोसला-2' की शूटिंग शुरू कर दी है, जो उनके जीवन और करियर की बड़ी उपलब्धि है। अपनी खुशी जाहिर करते हुए अनुपम खेर ने इंस्टाग्राम पर एक लंबा पोस्ट शेयर किया है। उन्होंने पोस्ट में बताया, "आज जब मैं अपनी 550वीं फिल्म खोसला का घोसला-2 की शूटिंग शुरू कर रहा हूं, मेरा दिल कृतज्ञता और आभार से भरा है। जब मैं 3 जून 1981 को सपनों के शहर मुंबई पहुंचा था, तब मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मैं 550 फिल्मों का यह मुकाम हासिल करूंगा। लेकिन आज मैं दिल्ली में केकेजी-2 के लिए अपना पहला शॉट देने को तैयार हूं। आपको बता दूं कि मुझे सच में लगता है कि मेरे पास देने के लिए बहुत कुछ है, करने के लिए बहुत कुछ है।" उन्होंने आगे लिखा, "सपनों की कोई समय सीमा नहीं होती है। मेरा आशावाद, मेरा कभी हार न मानने वाला रवैया और मेरी कड़ी मेहनत करने की क्षमता ही मेरी सबसे बड़ी ताकत रही है, लेकिन इन सभी वर्षों में मेरा अस्तित्व केवल मेरे सभी निर्माताओं, निर्देशकों, सह-कलाकारों, तकनीशियनों और सबसे बढ़कर आप सभी दर्शकों के समर्थन के कारण ही संभव हो पाया है! आपके समर्थन के बिना इस मुकाम तक पहुंचना कभी संभव नहीं होता।" अभिनेता ने दर्शकों को 43 साल तक मनोरंजन किया है और इस बड़ी उपलब्धि में फैंस का भी योगदान है। फैंस भी मनोरंजन की इस लंबी यात्रा के लिए अभिनेता को बधाई दे रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, "बहुत ही ऐतिहासिक सफर चल रहा है सर, इतने बड़े पैमाने तक टिक पाना और बने रहना, वो भी बिना टाइपकास्ट के। ये सभी के लिए एक प्रेरणा की तरह है।"

 

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