भूपाल नोबल्स विश्वविद्यालय का द्वितीय दीक्षांत समारोह आयोजित
"गरीबी को दूर करने का शिक्षा ही सबसे सशक्त माध्यम"-राज्यपाल
जयपुर/उदयपुर। राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने कहा कि बीएन संस्थान की शुरुआत एक साधारण पाठशाला के रूप में हुई थी, जो आज एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय के रूप में देशभर में अपनी पहचान बना चुका है। यह संस्थान शिक्षा के माध्यम से समाज के उत्थान की उस सोच को साकार कर रहा है, जिसकी नींव मेवाड़ के प्रेरणापुरुष महाराणा भूपाल सिंह ने रखी थी। उन्होंने कहा कि महाराणा भूपाल सिंह शिक्षा और जनकल्याण में गहरी आस्था रखते थे तथा उन्होंने विभिन्न आयामों में उत्कृष्ट शासन का उदाहरण प्रस्तुत किया। वर्ष 1945 में उन्होंने अपने महल के भीतर औषधालय की स्थापना कर जरूरतमंदों को उपचार उपलब्ध करवाया, जो उनकी संवेदनशीलता और दूरदृष्टि का प्रमाण है। राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे बुधवार को उदयपुर में आयोजित भूपाल नोबल्स (बीएन) विश्वविद्यालय के द्वितीय दीक्षांत समारोह में संबोधित कर रहे थे । दीक्षांत समारोह में राज्यपाल द्वारा विश्वविद्यालय के 90 शोधार्थियों को पीएचडी उपाधि, 47 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक सहित कुल 2025 विद्यार्थियों को विभिन्न संकायों की डिग्रियां प्रदान की गईं।
राज्यपाल ने मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां के शासक स्वयं को एकलिंगजी भगवान का प्रतिनिधि मानकर शासन करते थे। मेवाड़ के संस्थापक बप्पा रावल ने विदेशी आक्रांताओं का डटकर मुकाबला किया और मोहम्मद बिन कासिम को ईरान की सीमाओं तक खदेड़ दिया था। यह इतिहास आज भी नई पीढ़ी को प्रेरणा देता है। श्री बागडे ने कहा कि मेवाड़ एक आदिवासी बहुल क्षेत्र है और इस क्षेत्र में शिक्षा के प्रसार में बीएन संस्थान की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। शिक्षा के माध्यम से इस संस्थान ने जनजातीय अंचलों में ज्ञान का आलोक फैलाया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जनजातीय समुदाय को उच्च शिक्षा से जोड़ना समय की मांग है, ताकि वे मुख्यधारा में शामिल होकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा सकें। वंचित और पिछड़े वर्ग का उत्थान आज देश की सबसे बड़ी आवश्यकता है। राज्यपाल ने कहा कि गरीबी को यदि स्थायी रूप से दूर किया जा सकता है तो उसका सबसे सशक्त माध्यम शिक्षा ही है। केवल डिग्री प्राप्त करना ही जीवन का लक्ष्य नहीं होना चाहिए, बल्कि निरंतर आगे बढ़ने की जिद और सीखते रहने का संकल्प होना चाहिए। सफलता के लिए सतत प्रयास आवश्यक हैं। विद्यार्थी निरंतर अभ्यास के माध्यम से अपनी बौद्धिक क्षमता बढ़ाएं, अपनी सोच और दृष्टि को व्यापक बनाएं तथा स्वयं को सफल देखने का मानस तैयार करें, सफलता अवश्य मिलेगी। उन्होंने “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य की चर्चा करते हुए कहा कि इसकी जिम्मेदारी तरुण भारत के कंधों पर है। देश का स्वर्णिम गौरव विश्वविद्यालयों से ही निकलेगा और तक्षशिला व नालंदा जैसे प्राचीन ज्ञान केंद्रों का वैभव पुनः लौटे ऐसी भावना विद्यार्थियों में होनी चाहिए। राज्यपाल ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनकी प्रेरणा से विगत 10 वर्षों में देश के 25 करोड़ से अधिक लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं, जो सुशासन और समावेशी विकास का उदाहरण है।