बोरा केव्स : पहाड़ों के भीतर छिपा कुदरत का अद्भुत संसार
- बोरा केव्स में दिखती हैं अनोखी प्राकृतिक चट्टानी संरचनाएं
- अनंतगिरी पहाड़ियों में बनी गुफाओं का इतिहास 1807 से जुड़ा
- अराकू घाटी में भू-विज्ञान, आस्था और लोकविश्वास का संगम
विशाखापट्टनम। आंध्र प्रदेश की अराकू घाटी में स्थित बोरा केव्स पहाड़ों के भीतर छिपी प्रकृति की ऐसी दुनिया है, जहां चट्टानों के बीच बनी आकृतियां और गुफाओं की बनावट पर्यटकों को आकर्षित करती है। अनंतगिरी पहाड़ियों में स्थित इन गुफाओं का राजस्थान के पत्रकारों के मीडिया दल ने भी भ्रमण किया। भारत सरकार की विकास संचार एवं सूचना प्रसार योजना के तहत आंध्र प्रदेश के मीडिया दौरे पर पहुंचे दल ने गुफाओं की प्राकृतिक संरचना और पर्यटन महत्व को समझा।
पत्र सूचना कार्यालय, जयपुर के सहायक निदेशक अमित कनौजिया के नेतृत्व में पहुंचे मीडिया दल ने गुफा के भीतर बनी विभिन्न संरचनाओं का अवलोकन किया। रोशनी की व्यवस्था के कारण चट्टानों पर बनी अलग-अलग आकृतियां साफ नजर आती हैं, जिससे गुफा के अंदर का प्राकृतिक संसार और भी आकर्षक दिखाई देता है।
पानी के रिसाव से बनी गुफाओं की दुनिया
बोरा केव्स का निर्माण प्राकृतिक चूना-पत्थर की चट्टानों में लंबे समय तक पानी के रिसाव और बहाव से हुआ। पानी के कारण चूना-पत्थर धीरे-धीरे घुलता गया और समय के साथ भूमिगत रास्तों तथा बड़े कक्षों का निर्माण होता गया।
गुफा की छत से नीचे की ओर लटकती चट्टानी संरचनाओं को स्टैलेक्टाइट कहा जाता है, जबकि जमीन से ऊपर की ओर उठने वाली संरचनाओं को स्टैलेग्माइट कहा जाता है। कई जगह इन प्राकृतिक संरचनाओं के आकार मानव, पशु-पक्षी या दूसरी आकृतियों जैसे दिखाई देते हैं, जो पर्यटकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र हैं।
1807 से जुड़ा है खोज का इतिहास
बोरा गुफाओं की खोज का श्रेय वर्ष 1807 में जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया से जुड़े विलियम किंग जॉर्ज को दिया जाता है। समय के साथ यह स्थान भू-विज्ञान के अध्ययन के साथ पर्यटन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण बन गया। वर्तमान में बोरा केव्स आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले में स्थित हैं।
गुफा के अंदर प्राकृतिक रूप से बनी शिवलिंग जैसी संरचना भी लोगों का ध्यान खींचती है। इसके ऊपर मौजूद चट्टान से पानी की बूंदें लगातार गिरती रहती हैं। स्थानीय मान्यता में इस क्षेत्र को गोस्थनी नदी के उद्गम स्थल से भी जोड़ा जाता है।
खनिजों और जीव-जंतुओं की मौजूदगी
गुफाओं के भीतर चूना-पत्थर के साथ कैल्साइट, अभ्रक और क्वार्टज जैसे खनिजों की मौजूदगी बताई जाती है। गुफा के वातावरण में चमगादड़ और गोल्डन गेको जैसे जीव भी देखे जाते हैं। इसके अलावा काई और शैवाल की विभिन्न प्रजातियां भी यहां के भूमिगत वातावरण को विशिष्ट बनाती हैं।
पर्यटकों की सुविधा के लिए गुफा के अंदर प्रकाश व्यवस्था की गई है। इससे चट्टानों पर बनी प्राकृतिक संरचनाओं को करीब से देखने में आसानी होती है और गुफा के अलग-अलग हिस्सों का स्वरूप भी स्पष्ट नजर आता है।
गाय से जुड़ी है स्थानीय लोककथा
बोरा केव्स को लेकर स्थानीय आदिवासी समाज में एक पुरानी लोककथा भी प्रचलित है। इसके अनुसार चरते समय एक गाय गुफा की छत में बने छेद से नीचे गिर गई थी। गाय की तलाश में निकले चरवाहे को गुफा का पता चला और अंदर उसे शिवलिंग जैसी आकृति दिखाई दी। हालांकि यह स्थानीय लोकविश्वास है और इस घटना को ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित नहीं माना जाता।
बोरा केव्स की खासियत यही है कि यहां प्राकृतिक भूगर्भीय संरचनाओं के साथ स्थानीय लोकविश्वास और धार्मिक आस्था भी जुड़ी हुई है। अराकू घाटी की यात्रा करने वाले पर्यटकों के लिए यह गुफा क्षेत्र प्रकृति और भू-विज्ञान को करीब से देखने का एक अलग अनुभव देता है।