दीपावली पर जवानों के साथ रहेंगे राजनाथ सिंह, शेरथांग में देंगे श्रद्धांजलि
नई दिल्ली। दीपावली का त्योहार देशभर में उत्साह के साथ मनाया जाएगा, लेकिन सरहदों पर तैनात सैनिकों के लिए यह पर्व हमेशा की तरह खास रहने वाला है। इस बार रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी त्योहार का समय भारतीय सेना के जवानों के बीच बिताएंगे। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी दीपावली यात्रा की जानकारी साझा की है।
रक्षा मंत्री के कार्यक्रम के अनुसार, दीपावली की पूर्व संध्या यानी शनिवार को वह दार्जिलिंग के बागडोगरा एयरफील्ड और सुकना (सिलीगुड़ी) में भारतीय सेना के जवानों से मुलाकात करेंगे। इस दौरान वह सैनिकों से बातचीत करेंगे और उनके साथ समय बिताएंगे।
इसके बाद 8 नवंबर यानी दीपावली के दिन राजनाथ सिंह सिक्किम के शेरथांग युद्ध स्मारक पहुंचेंगे। यहां वह देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इसके साथ ही वह इस दुर्गम इलाके में तैनात सेना के जवानों से भी मुलाकात कर उनका हाल जानेंगे।
1967 के वीर सैनिकों की याद दिलाता है शेरथांग स्मारक
सिक्किम का शेरथांग युद्ध स्मारक भारतीय सैन्य इतिहास में विशेष महत्व रखता है। इसे वाटरशेड शहीद युद्ध स्मारक के नाम से भी जाना जाता है। यह पूर्वी सिक्किम में भारत-चीन सीमा के नजदीक नाथू ला दर्रे के पास स्थित है।
इस स्मारक का निर्माण वर्ष 1967 में नाथू ला और चो ला में चीनी सेना के साथ हुए सैन्य संघर्षों में शहीद भारतीय जवानों और युद्ध नायकों की स्मृति में किया गया है। यह उन सैनिकों के साहस और बलिदान की याद दिलाता है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में देश की सीमाओं की रक्षा की थी।
करीब 13 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित यह स्मारक भारतीय सेना के जवानों के धैर्य और समर्पण का प्रतीक है। यहां मौसम बेहद चुनौतीपूर्ण रहता है, फिर भी सैनिक देश की सुरक्षा के लिए लगातार अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं।
गंगटोक से करीब 52 किलोमीटर दूर है स्मारक
शेरथांग युद्ध स्मारक गंगटोक से लगभग 52 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह चांगू झील यानी त्सोमगो झील और न्यू बाबा मंदिर के पास नाथू ला जाने वाले रास्ते पर पड़ता है। इस वजह से यह स्थान ऐतिहासिक और सामरिक महत्व के साथ-साथ राष्ट्रीय गौरव का भी केंद्र है।
सुरक्षा कारणों से शेरथांग और नाथू ला क्षेत्र में प्रवेश के लिए विशेष अनुमति जरूरी होती है। भारतीय नागरिकों को गंगटोक से एक दिन पहले प्रोटेक्टेड एरिया परमिट (PAP) बनवाना पड़ता है। वहीं, विदेशी पर्यटकों को चांगू झील से आगे जाने की अनुमति नहीं दी जाती।
राजनाथ सिंह का दीपावली पर सैनिकों के बीच पहुंचना उन जवानों के प्रति सम्मान का संदेश है, जो त्योहारों के दौरान भी परिवारों से दूर रहकर देश की सीमाओं की सुरक्षा में तैनात रहते हैं।