भारत की केमिकल इंडस्ट्री में आएगा बड़ा उछाल, 2040 तक 1 ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य
नई दिल्ली। भारत का केमिकल और पेट्रोकेमिकल सेक्टर आने वाले वर्षों में देश की अर्थव्यवस्था को नई गति दे सकता है। सरकार की ओर से शनिवार को जारी फैक्टशीट में अनुमान जताया गया है कि करीब 220 अरब डॉलर का यह उद्योग 2030 तक बढ़कर 300 अरब डॉलर और 2040 तक 1 ट्रिलियन डॉलर के स्तर पर पहुंच सकता है। इससे भारत की वैश्विक औद्योगिक बाजार में भूमिका और मजबूत होने की संभावना है।
इस क्षेत्र की अहमियत केवल रसायनों के उत्पादन तक सीमित नहीं है। दवाइयों, कपड़ा उद्योग, निर्माण, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले उत्पादों के निर्माण में केमिकल इंडस्ट्री की महत्वपूर्ण भूमिका है। सरकार के अनुसार, भारत फिलहाल दुनिया का छठा सबसे बड़ा रसायन उत्पादक और एशिया का चौथा सबसे बड़ा उत्पादक देश है।
FDI में दोगुने से ज्यादा बढ़ोतरी
भारतीय केमिकल सेक्टर में विदेशी निवेश भी लगातार बढ़ा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2014 से 2026 के बीच इस उद्योग में 1,04,895 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आया। इसकी तुलना में 2004 से 2014 के दौरान 45,240 करोड़ रुपये का निवेश प्राप्त हुआ था।
सरकार ने अधिकांश रसायन क्षेत्रों में 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति स्वचालित मार्ग से दे रखी है। इसका मतलब है कि निर्धारित नियमों के तहत विदेशी निवेशकों को निवेश के लिए पहले से सरकारी मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होती।
उत्पादन के मोर्चे पर भी उद्योग ने विस्तार दर्ज किया है। प्रमुख रसायनों और पेट्रोकेमिकल उत्पादों का कुल उत्पादन 2015-16 में 45,638 हजार मीट्रिक टन था, जो 2024-25 में बढ़कर 58,617 हजार मीट्रिक टन हो गया। सरकार ने इस बढ़ोतरी के पीछे उत्पादन क्षमता में इजाफे, बेहतर बुनियादी ढांचे और विशेष विनिर्माण केंद्रों के विकास को प्रमुख वजह बताया है।
डाई और कृषि रसायनों के निर्यात में भारत की मजबूत स्थिति
विशेष रसायनों के कारोबार में भी भारत की वैश्विक मौजूदगी बढ़ी है। देश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा डाई निर्माता और निर्यातक है। वहीं, कृषि रसायनों के निर्यात में भारत को तीसरा स्थान हासिल है।
इस उद्योग से बड़े स्तर पर रोजगार और कारोबार भी जुड़ा हुआ है। सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, देश में करीब 13,000 बड़े उद्योग और 4.45 लाख सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं। ऐसे में केमिकल सेक्टर का विस्तार छोटे कारोबारियों और औद्योगिक इकाइयों के लिए भी नए अवसर पैदा कर सकता है।
तीन नए केमिकल पार्क बनाने की तैयारी
उद्योग को आगे बढ़ाने के लिए सरकार ने विशेष केमिकल पार्क विकसित करने की योजना बनाई है। जुलाई 2026 में मंजूर भारत औद्योगिक विकास योजना रसायन (भव्य रसायन) के तहत देश में तीन विशेष केमिकल पार्क स्थापित किए जाएंगे।
योजना के मुताबिक, प्रत्येक पार्क का क्षेत्रफल कम से कम 8 वर्ग किलोमीटर यानी लगभग 2,000 एकड़ होगा। केंद्र सरकार हर पार्क के लिए 1,000 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएगी। वहीं, संबंधित राज्य सरकार को कम से कम 500 करोड़ रुपये का योगदान देना होगा।
इस पूरी योजना के लिए 3,030 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इसमें 3,000 करोड़ रुपये बुनियादी ढांचे और साझा सुविधाओं के विकास पर खर्च होंगे, जबकि 30 करोड़ रुपये प्रशासनिक कार्यों के लिए रखे गए हैं। योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों के लिए लागू रहेगी।
रिसर्च और नई तकनीक पर भी सरकार का जोर
केमिकल उद्योग में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए सरकार अनुसंधान, विकास और नवाचार पर भी निवेश को प्रोत्साहित कर रही है। नवंबर 2025 में शुरू की गई रिसर्च, डेवलपमेंट एंड इनोवेशन (RDI) योजना के लिए 1 लाख करोड़ रुपये का कोष बनाया गया है।
इस योजना का मकसद निजी कंपनियों को शोध और नई तकनीकों में निवेश के लिए प्रोत्साहित करना है। इसके तहत दीर्घकालिक वित्तपोषण और पुनर्वित्त की सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। इससे उन्नत तकनीकों को अपनाने, औद्योगिक उत्पादन की गुणवत्ता सुधारने और महत्वपूर्ण तकनीकी क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, बढ़ता विदेशी निवेश, उत्पादन क्षमता का विस्तार, नए केमिकल पार्क और अनुसंधान पर जोर भारत के रसायन उद्योग के लिए विकास के नए रास्ते खोल सकते हैं। हालांकि, 2030 और 2040 के अनुमानित लक्ष्य हासिल करने के लिए बुनियादी ढांचे, तकनीक और वैश्विक प्रतिस्पर्धा से जुड़ी चुनौतियों पर भी ध्यान देना होगा।