इमरजेंसी पर सोनिया गांधी का बड़ा बयान, संजय गांधी को लेकर कही ये बात
नई दिल्ली। देश में आपातकाल का दौर भारतीय राजनीति के सबसे चर्चित और विवादित अध्यायों में शामिल रहा है। इस दौरान लिए गए फैसलों और नेताओं की भूमिका पर आज भी बहस होती है। अब कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखी है। उन्होंने साफ किया कि इमरजेंसी के लिए केवल संजय गांधी को जिम्मेदार मानना सही नहीं होगा। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर उनके कुछ वरिष्ठ सहयोगियों का भी दबाव था।
'द हिंदू' को दिए इंटरव्यू में सोनिया गांधी ने कहा कि इमरजेंसी के दौरान इंदिरा गांधी के आसपास ऐसे लोगों की संख्या कम थी, जो उनसे अलग नजरिया रखने का साहस रखते थे। उन्होंने राजीव गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय उनका दृष्टिकोण बाकी लोगों से अलग था। सोनिया के मुताबिक, संजय गांधी को अक्सर आपातकाल से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी सिर्फ उन्हीं पर डालना उचित नहीं है।
इंटरव्यू के दौरान सोनिया गांधी ने यह भी स्वीकार किया कि आपातकाल में लोकतांत्रिक अधिकारों पर पाबंदियां लगाई गई थीं। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी समाप्त होने के बाद ही उन्हें इस पूरे घटनाक्रम की गंभीरता का बेहतर अंदाजा हुआ। उनके अनुसार, आपातकाल संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लागू किया गया था, लेकिन उस दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों में कटौती एक वास्तविकता थी।
इंदिरा गांधी को बाद में हुआ था अपने फैसलों पर अफसोस
सोनिया गांधी ने दावा किया कि इंदिरा गांधी को आपातकाल के दौरान उठाए गए सख्त कदमों पर बाद में पछतावा हुआ था। उन्होंने कहा कि मार्च 1977 में चुनाव कराने का फैसला भी इंदिरा गांधी ने ही लिया था। सोनिया के मुताबिक, इंदिरा गांधी ने बाद में सार्वजनिक रूप से आपातकाल के दौरान लिए गए कड़े फैसलों के लिए माफी भी मांगी थी।
इस बीच सोनिया गांधी अपनी नई किताब Belonging: A Journey of Love को लेकर भी चर्चा में हैं। यह किताब 10 नवंबर को रिलीज होने वाली है। इसमें उन्होंने अपने जीवन के कई व्यक्तिगत अनुभवों और यादों को जगह दी है। किताब में राजीव गांधी के साथ उनकी पहली मुलाकात, रिश्ते और प्रेम कहानी से जुड़े कुछ खास किस्से भी शामिल हैं।