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रूस-यूक्रेन युद्ध में चीन की एंट्री, अमेरिका को है किस बात का डर?

रूस-यूक्रेन युद्ध में चीन की एंट्री, अमेरिका को है किस बात का डर?

रूस और यूक्रेन के बीच भीषण युद्ध के एक साल पूरे होने जा रहे हैं। गत वर्ष 24 फरवरी को रूस ने यूक्रेन पर भीषण हमला शुरू किया था। वहीं चीन अब यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच एक नई दरार डालने की कोशिश में लगा है। पश्चिमी नेताओं ने इस सप्ताह यूक्रेन के लिए चीन की शांति योजना पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। लेकिन पहले संकेत के रूप में इस कदम का सावधानी पूर्वक से स्वागत किया है। चीन मानता है कि युद्ध को केवल एक यूरोपीय मामला नहीं माना जा सकता है। चीन के विदेश नीति प्रमुख वांग यी ने म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में यह खबर दी कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग जल्द ही एक "शांति प्रस्ताव" पेश करेंगे। मास्को और कीव के बीच छिड़े जंग को बीजिंग संघर्ष कहता है युद्ध नहीं।
रूस की मदद कर रहा चीन

वांग यी ने म्युनिख में कहा कि बीजिंग यूक्रेन और रूस के लिए एक शांति योजना पेश करेगा और यूरोप के साथ संबंध बनाए रखेगा। वहीं सीएनएन के अनुसार रूस के युद्ध के प्रयायों में चीन चुपचाप से उसकी सहायता कर रहा है। वांग ने सम्मेलन में कहा कि ये युद्ध जारी नहीं रह सकता। हमें ये सोचने की जरूरत है कि इस युद्ध को समाप्त करने के लिए हम क्या प्रयास कर सकते हैं।
अमेरिका ने दे दी चेतावनी

अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने चीन को यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में रूस का ‘घातक समर्थन’ जारी रखने को लेकर चेतावनी देते हुए कहा कि इसके अमेरिका के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर ‘गंभीर प्रभाव’ होंगे। अमेरिका के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, ब्लिंकन और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठतम विदेश नीति अधिकारी वांग यी के साथ म्यूनिख में करीब एक घंटे तक बातचीत हुई थी। ब्लिंकन ने बैठक में वांग के समक्ष रूस-यूक्रेन युद्ध का भी मुद्दा उठाया। ब्लिंकन ने कहा, ‘‘चीन द्वारा यूक्रेन युद्ध में रूस को दिए जा रहे घातक समर्थन को लेकर चिंता है। मैं उनके साथ साझा कर रहा हूं, क्योंकि राष्ट्रपति जो बाइडन ने इसे राष्ट्रपति शी जिनफिंग से साझा किया था कि हमारे रिश्तों पर इसके गंभीर प्रभाव हो सकते हैं।

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