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ईरान का बड़ा इनकार : यूरेनियम बाहर भेजने की सहमति नहीं

ईरान का बड़ा इनकार : यूरेनियम बाहर भेजने की सहमति नहीं

तेहरान। ईरान ने साफ किया है कि उसने अपने संवर्धित यूरेनियम को देश से बाहर भेजने पर कोई सहमति नहीं दी है। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम ने उन खबरों को गलत बताया है, जिनमें दावा किया गया था कि ईरान अपने उच्च स्तर के संवर्धित यूरेनियम को दूसरे देश में भेजने के लिए तैयार है। दरअसल, सऊदी अरब के चैनल अल हदाथ ने एक रिपोर्ट में कहा था कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच संभावित समझौते को लेकर बातचीत चल रही है और ईरान यूरेनियम बाहर भेजने के लिए तैयार हो सकता है। लेकिन तस्नीम एजेंसी ने अपनी जांच के बाद कहा कि यह दावा सही नहीं है। एजेंसी के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच जिस समझौता ज्ञापन यानी एमओयू पर चर्चा हो रही है, उसमें कहीं भी यह नहीं लिखा है कि ईरान अपने परमाणु पदार्थों को देश से बाहर भेजेगा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ईरान ने परमाणु गतिविधियों को लेकर कोई नया वादा नहीं किया है। तस्नीम के अनुसार, सऊदी मीडिया की ऐसी खबरें अमेरिका की “मनोवैज्ञानिक रणनीति” का हिस्सा हो सकती हैं, जिनका मकसद बातचीत के माहौल को प्रभावित करना है। इधर, ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहम्मद बाघेर जोलघाद्र ने सोमवार को देश के नाम संदेश में कहा कि ईरान पीछे हटने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायल के दबाव का सामना करने के लिए देश में एकता और मजबूत सहयोग जरूरी है। वहीं, शनिवार को ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सरकारी टीवी चैनल आईआरआईबी से बातचीत में कहा था कि ईरान और अमेरिका युद्ध खत्म करने के लिए एक समझौता ज्ञापन को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि दोनों पक्ष पहले 14 बिंदुओं वाले एमओयू पर सहमत होना चाहते हैं। इसके बाद अगले 30 से 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुंचने की कोशिश की जाएगी। उनके मुताबिक, इस प्रस्तावित समझौते में अमेरिका द्वारा समुद्री हमलों को रोकना, नौसैनिक घेराबंदी खत्म करना और विदेशों में फंसी ईरानी संपत्तियों को जारी करने जैसे मुद्दे शामिल हैं। गौरतलब है कि ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच 40 दिनों तक चले संघर्ष के बाद 8 अप्रैल को युद्धविराम हुआ था। इसके बाद 11 और 12 अप्रैल को पाकिस्तान की मध्यस्थता में इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधियों के बीच शांति वार्ता हुई, लेकिन उसमें कोई ठोस समझौता नहीं हो सका। हाल के हफ्तों में दोनों देशों के बीच संघर्ष खत्म करने के लिए कई प्रस्तावों का आदान-प्रदान भी हुआ है, जिनमें अलग-अलग शर्तों पर चर्चा की गई है।

 

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