चुनाव आयोग पर कांग्रेस का निशाना, संस्थानों की स्वतंत्रता की रक्षा पर दिया जोर
कांग्रेस पार्टी ने शनिवार को चुनावी मामलों से निपटने के लिए चुनाव आयोग की आलोचना की और उस पर संविधान को कमजोर करने और मतदाताओं का अपमान करने का आरोप लगाया। यह आलोचना तब हुई जब देश ने 25 जनवरी 1950 को चुनाव आयोग की स्थापना के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि आयोग की संस्थागत ईमानदारी का लगातार क्षरण गंभीर राष्ट्रीय चिंता का विषय है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया कि हरियाणा और महाराष्ट्र के हाल के विधानसभा चुनावों को लेकर व्यक्त की गई चिंताओं पर आयोग का रुख आश्चर्यजनक रूप से पक्षपात से भरा रहा है।
मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने ट्वीट में लिखा कि भले ही हम राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाते हैं, पिछले दस वर्षों में भारत के चुनाव आयोग की संस्थागत अखंडता का लगातार क्षरण गंभीर राष्ट्रीय चिंता का विषय है। हमारा भारत का चुनाव आयोग और हमारा संसदीय लोकतंत्र, व्यापक संदेह के बावजूद, दशकों से निष्पक्ष, स्वतंत्र और विश्व स्तर पर अनुकरण के लिए आदर्श बन गया है। उन्होंने कहा कि सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार की प्राप्ति, पंचायत और शहरी स्थानीय निकायों के जमीनी स्तर तक फैली हुई, हमारे संस्थापकों के दृष्टिकोण का प्रतीक है। हालाँकि, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कायम रखने में लापरवाही अनजाने में सत्तावाद का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि इसलिए, हमारे लोकतंत्र को बनाए रखने और इसे रेखांकित करने वाले संवैधानिक सिद्धांतों को बनाए रखने के लिए हमारे संस्थानों की स्वतंत्रता की रक्षा करना आवश्यक है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि ऐसे ही कई अन्य प्रतिष्ठित मुख्य चुनाव आयुक्त रहे हैं जिनमें टीएन शेषन का सबसे विशेष स्थान है - उनका योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने दावा किया, ‘‘अफसोस की बात है कि पिछले एक दशक में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की जोड़ी ने निर्वाचन आयोग के पेशेवर रवैये और स्वतंत्रता के साथ गंभीर रूप से छेड़छाड़ किया है। इसके कुछ फैसलों को अब उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी जा रही है।’’