चक्रवात ‘अर्नब’ का कहर, अमित शाह ने 4 राज्यों को मदद का भरोसा दिया
नई दिल्ली। चक्रवात ‘अर्नब’ से हुए नुकसान के बाद केंद्र सरकार ने प्रभावित राज्यों के साथ समन्वय बढ़ाया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आंध्र प्रदेश, पुडुचेरी, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों से बातचीत कर प्रभावित लोगों की परेशानियां कम करने के लिए हरसंभव सहायता का भरोसा दिया है।
अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की टीमें सक्रिय हैं। उनके मुताबिक, राहत और बचाव अभियान तेज गति से चलाए जा रहे हैं। नुकसान का आकलन करने और आगे की सहायता की जरूरत का पता लगाने के लिए अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम (आईएमसीटी) भी जल्द भेजी जाएगी।
गृह मंत्री ने कहा कि भारत सरकार आपदा प्रभावित लोगों के साथ खड़ी है और जरूरत के मुताबिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
आंध्र प्रदेश में फसलों और बुनियादी ढांचे को नुकसान
इससे पहले 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने अमित शाह से फोन पर बातचीत कर राज्य में चक्रवात के प्रभाव की जानकारी दी थी। मुख्यमंत्री ने बताया था कि प्राकृतिक आपदा से कृषि और बागवानी फसलों के साथ बिजली व्यवस्था, सड़कों तथा अन्य सार्वजनिक संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचा है।
नायडू के अनुसार, चक्रवात प्रभावित जिलों में भारी बारिश के कारण हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए थे। राज्य सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य बड़े स्तर पर शुरू किए थे। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री को जमीनी स्थिति और राज्य प्रशासन की ओर से किए जा रहे प्रयासों से अवगत कराया।
नुकसान के आकलन के लिए केंद्रीय टीम भेजने की मांग
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने व्यापक नुकसान का हवाला देते हुए केंद्र से जल्द केंद्रीय टीम भेजने का अनुरोध किया था। इसका उद्देश्य प्रभावित इलाकों में नुकसान का आकलन करना और राहत, पुनर्वास तथा बुनियादी सुविधाओं की बहाली के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता प्राप्त करना है।
नायडू इससे पहले भी अमित शाह को पत्र लिखकर केंद्रीय टीम भेजने की मांग कर चुके थे। अब गृह मंत्री की ओर से जल्द टीम भेजने की बात कही गई है। इससे प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन करने और आगे की सहायता तय करने की प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है।
फिलहाल राहत और बचाव कार्यों के साथ प्रभावित इलाकों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के बीच समन्वय के जरिए प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाने और क्षतिग्रस्त सुविधाओं को बहाल करने पर जोर दिया जा रहा है।