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कर्नाटक में सूखे का संकट, खड़गे ने केंद्र से मांगी मदद

कर्नाटक में सूखे का संकट, खड़गे ने केंद्र से मांगी मदद

नई दिल्ली। कर्नाटक में सूखे की स्थिति को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर राज्य की स्थिति का आकलन कराने और प्रभावित क्षेत्रों के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का आग्रह किया है।

खड़गे ने 1 अक्टूबर को लिखे पत्र को शनिवार को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए कहा कि कर्नाटक हाल के वर्षों की गंभीर सूखा परिस्थितियों में से एक का सामना कर रहा है। उनके अनुसार, सितंबर तक राज्य में बारिश में 58 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इसके कारण बड़े पैमाने पर फसलों को नुकसान पहुंचा है और लाखों किसान परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हुआ है।

3,705 करोड़ रुपए की सहायता मांगी

खड़गे के मुताबिक, कर्नाटक सरकार ने सूखे से हुए अनुमानित 18,748.23 करोड़ रुपए के नुकसान के मुकाबले स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फंड (SDRF) और नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फंड (NDRF) के तहत केंद्र से 3,705.30 करोड़ रुपए की सहायता मांगी है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्र से आग्रह किया कि राज्य की मांग पर बिना अनावश्यक देरी के फैसला लिया जाए और नियमों के तहत पात्र सहायता राशि जारी की जाए। उन्होंने कहा कि राहत में किसी तरह की मनमानी कटौती नहीं होनी चाहिए।

केंद्रीय टीम भेजने की मांग

खड़गे ने सूखे की स्थिति का जमीनी आकलन करने के लिए केंद्रीय टीम को कर्नाटक भेजने की मांग की है। उन्होंने विशेष रूप से कल्याणा कर्नाटक क्षेत्र का दौरा कर वहां फसल नुकसान और सूखे के प्रभाव की वास्तविक स्थिति का जायजा लेने की बात कही।

उन्होंने केंद्र से कर्नाटक में सूखा घोषित करने की प्रक्रिया पर भी तत्काल विचार करने का आग्रह किया। साथ ही किसानों की स्थिति का आकलन कर उन्हें आवश्यक राहत देने की मांग रखी।

छोटे किसानों को लेकर उठाया मुद्दा

खड़गे ने छोटे और सीमांत किसानों तक राहत का लाभ पहुंचाने के लिए मुआवजे की गणना के तरीके में बदलाव की मांग की। उन्होंने कहा कि इनपुट सब्सिडी की गणना के लिए 2015-16 की पुरानी कृषि जनगणना के बजाय कर्नाटक के अपडेटेड ‘भूमि’ जमीन रिकॉर्ड का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

उनके मुताबिक, इससे पात्र किसानों की पहचान ज्यादा सटीक तरीके से हो सकेगी और राहत से किसी योग्य किसान के छूटने की संभावना कम होगी।

खड़गे ने यह भी कहा कि 11 अतिरिक्त तालुक अभी ‘ग्राउंड ट्रूथिंग’ यानी जमीनी स्थिति की जांच की प्रक्रिया से गुजर रहे हैं। उन्होंने मांग की कि इन तालुकों और आगे पात्र पाए जाने वाले अन्य क्षेत्रों को भी इसी सूखा घटना के तहत केंद्रीय सहायता के दायरे में रखा जाए।

पेयजल संकट पर भी जताई चिंता

कांग्रेस अध्यक्ष ने कर्नाटक में पेयजल उपलब्धता को लेकर भी केंद्र से अतिरिक्त मदद की मांग की। उन्होंने विशेष रूप से कावेरी और पनबिजली कैचमेंट क्षेत्रों में जलाशयों के ऐतिहासिक रूप से कम जलस्तर का हवाला दिया।

खड़गे के अनुसार, सूखे का असर केवल खेती तक सीमित नहीं है। जलाशयों में पानी की कमी से पीने के पानी की उपलब्धता और बिजली व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में वैकल्पिक बिजली व्यवस्था की लागत और पेयजल सुरक्षा के लिए केंद्र से पर्याप्त सहायता जरूरी है।

31 लाख से ज्यादा किसान परिवार प्रभावित होने का दावा

खड़गे ने कहा कि राज्य में 31 लाख से अधिक किसान परिवार संकट का सामना कर रहे हैं। उन्होंने केंद्र से राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर कर्नाटक को तत्काल और निष्पक्ष सहायता उपलब्ध कराने की अपील की।

उन्होंने कहा कि सूखे से राहत पहुंचाना मानवीय आवश्यकता है और इसे केंद्र तथा राज्य के बीच राजनीतिक मतभेदों से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। कांग्रेस अध्यक्ष ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार तेजी से कदम उठाएगी, ताकि प्रभावित लोगों को भोजन, चारा, पानी और आजीविका से जुड़ी आवश्यक मदद समय पर मिल सके।

फिलहाल कर्नाटक में बारिश की कमी, फसल नुकसान और जल संसाधनों पर बढ़ते दबाव को लेकर राज्य सरकार की ओर से केंद्र से सहायता की मांग का मुद्दा राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण बना हुआ है।

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