एफसीएम उपचार से बदली संतोष की जिंदगी, मातृत्व का सफर हुआ आसान
जयपुर। समय पर जांच, सही सलाह और आधुनिक उपचार ने जयपुर की रहने वाली संतोष मीना के मातृत्व के सफर को सुरक्षित और सहज बना दिया। गर्भावस्था के दौरान एनीमिया (खून की कमी) से जूझ रहीं संतोष को सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज (एफसीएम) उपचार मिला, जिससे उनके स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में संतोष का स्वास्थ्य सामान्य था, लेकिन पांचवें महीने के बाद उन्हें लगातार थकान, कमजोरी और रोजमर्रा के काम करने में परेशानी महसूस होने लगी। शुरुआत में उन्होंने इसे गर्भावस्था का सामान्य प्रभाव समझा, लेकिन समस्या बढ़ने पर उन्होंने अपने नजदीकी आंगनबाड़ी केंद्र से संपर्क किया।
आंगनबाड़ी केंद्र पर एएनएम और आशा सहयोगिनी ने उनकी स्वास्थ्य जांच करवाई। जांच में एनीमिया की पुष्टि होने के बाद उन्हें सरकारी अस्पताल भेजा गया, जहां चिकित्सकों ने फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज (एफसीएम) उपचार की सलाह दी। डॉक्टरों की निगरानी में उपचार शुरू होने के बाद कुछ ही समय में उनकी कमजोरी और थकान कम होने लगी तथा उनके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार दर्ज किया गया।
संतोष मीना ने बताया कि उपचार के बाद वे पहले की तुलना में अधिक स्वस्थ, ऊर्जावान और आत्मविश्वास से भरपूर महसूस कर रही हैं। उन्होंने कहा कि समय पर जांच और सही इलाज मिलने से बड़ी परेशानी टल गई। उन्होंने गर्भवती महिलाओं से अपील की कि वे नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं और यदि खून की कमी की पुष्टि हो तो चिकित्सकीय सलाह के अनुसार एफसीएम उपचार लेने में कोई संकोच न करें।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान एनीमिया की समय पर पहचान और उपचार से मां और शिशु, दोनों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। सरकारी अस्पतालों में एफसीएम उपचार निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे गंभीर एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं को प्रभावी इलाज मिल सके।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि नियमित जांच, पोषण संबंधी जागरूकता और समय पर उपचार के जरिए सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा दिया जा रहा है। संतोष मीना की कहानी इस बात का उदाहरण है कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का समय पर लाभ उठाकर गर्भावस्था के दौरान होने वाली जटिलताओं पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।