ग्रीन हाइड्रोजन से ई-मोबिलिटी तक, PM मोदी ने गिनाईं भारत की उपलब्धियां
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ‘द फ्यूचर ऑफ एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट डायनेमिक्स’ विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत की पर्यावरणीय पहलों और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े प्रयासों का उल्लेख किया। विज्ञान भवन में आयोजित इस सम्मेलन का आयोजन राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने किया है। इसमें भारत के साथ 17 देशों के न्यायिक प्रतिनिधि और पर्यावरण क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ भी हिस्सा ले रहे हैं।
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने क्लीन मोबिलिटी और ग्रीन हाइड्रोजन को नए दौर की दिशा से जोड़ते हुए भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह क्लीन मोबिलिटी के क्षेत्र में नए युग की शुरुआत का संकेत है। भारतीय रेलवे के अनुसार, देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल-सेल ट्रेन में हाइड्रोजन से ऑनबोर्ड बिजली तैयार होती है और यह परियोजना स्वच्छ रेल परिवहन की दिशा में एक कदम है।
प्रधानमंत्री ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी भारत की प्रगति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में विंड एनर्जी क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है और हाइड्रो एनर्जी पर भी काम आगे बढ़ा है। उन्होंने बताया कि सरकार इन क्षेत्रों में निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए भी अवसर बढ़ा रही है।
ई-मोबिलिटी को लेकर पीएम मोदी ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में पिछले वर्षों में बड़ा बदलाव आया है। उनके अनुसार, 2014 से पहले देश में सालाना करीब 3,000 ई-व्हीकल बिकते थे, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा करीब 25 लाख तक पहुंच गया। उन्होंने इसे पर्यावरण के लिहाज से महत्वपूर्ण बदलाव बताया।
प्रधानमंत्री ने परिवहन व्यवस्था में तकनीक और विद्युतीकरण के असर को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि फास्टैग से टोल प्लाजा पर वाहनों के इंतजार और ईंधन की खपत को कम करने में मदद मिली है। वहीं, मेट्रो नेटवर्क के विस्तार का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि अब देश के 20 से ज्यादा शहरों में मेट्रो सेवाएं संचालित हो रही हैं और भारत का मेट्रो नेटवर्क 1,000 किलोमीटर से अधिक हो चुका है।
रेलवे के विद्युतीकरण को पर्यावरण से जोड़ते हुए पीएम मोदी ने कहा कि 100 प्रतिशत विद्युतीकरण से डीजल की खपत में कमी आई है। उन्होंने कहा कि भारत का विकास तेज होने के साथ टिकाऊ भी होना चाहिए और इसी सोच के साथ विभिन्न क्षेत्रों में काम किया जा रहा है।
जल संरक्षण को लेकर प्रधानमंत्री ने अमृत सरोवर और ‘कैच द रेन’ अभियान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश में 70 हजार से अधिक अमृत सरोवर बनाए गए हैं, जबकि ‘कैच द रेन’ के तहत करीब 1.5 करोड़ जल संचयन संरचनाएं तैयार की गई हैं।
कृषि क्षेत्र में बदलाव की चर्चा करते हुए पीएम मोदी ने नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 12.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती के क्लस्टर बनाए गए हैं और जलवायु के अनुकूल फसलों की किस्मों पर भी काम हुआ है।
प्रधानमंत्री ने एग्रोफॉरेस्ट्री को बढ़ावा देने और कार्बन फुटप्रिंट कम करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी दी। इसके साथ ही उन्होंने प्लास्टिक कचरे की चुनौती का जिक्र करते हुए सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक और ‘रिड्यूस, रीयूज और रीसाइकल’ के जरिए सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने की बात कही।
उन्होंने गोबरधन योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि गांवों में गोबर और दूसरे जैविक कचरे को उपयोगी संसाधनों में बदला जा रहा है। प्रधानमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण को विकास के साथ जोड़ते हुए कहा कि भारत की कोशिश ऐसी व्यवस्था बनाने की है, जिसमें आर्थिक प्रगति के साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारियों को भी प्राथमिकता मिले।