पति के लड़कियों से संबंध, पीट-पीटकर चमड़ी उधेड़ देता
घरवालों ने उनका बाल विवाह कर दिया, लेकिन कुछ ही समय बाद पति के दूसरी लड़कियों से संबंध बन गए। वह आए दिन उन्हें पीटता। उसे समझाने की कोशिश करतीं तो 3 तलाक दे देता, लेकिन हर बार परिवार वाले उन्हें रोक लेते। इसके बाद फिर मारपीट का सिलसिला चालू हो जाता।
पति ने तीसरी बार तलाक दिया, तब उन्होंने ससुराल लौटने से मना कर दिया। इसके बाद भी पति धमकाता, बंधक बनाकर पीटता। बच्चों को पढ़ाने के लिए उन्होंने ऑटो चलाना शुरू किया, तो लोग बोलते कि औरत हो, घर में रहो, मर्दों वाले काम न करो। मां-बाप ने उनका नाम तो शबनम रखा था, लेकिन अत्याचार के शोलों में तपकर वह फौलादी इरादों वाली बन गईं।
4 बहनों और एक भाई में मैं सबसे बड़ी हूं। पापा मजदूरी कर घर चलाते। एक दिन अचानक उनकी आंत फट गई। ऑपरेशन के बाद किसी तरह उनकी जान तो बच गई, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें काम करने से मना कर दिया। 7 लोगों का पेट भरने की जिम्मेदारी मम्मी के कंधों पर आ गई। दूसरों के घरों में काम करने से लेकर खेतों में धान लगाने, गेहूं काटने तक उन्हें जो काम मिला, वह करने लगीं।
मम्मी ने बाहर जाना शुरू किया तो घर की जिम्मेदारी मुझ पर आ गई। खाना बनाकर बहनों को तैयार करती, फिर उन्हें स्कूल और आंगनबाड़ी पहुंचाती। सारे काम निपटाते-निपटाते मैं खुद स्कूल के लिए लेट हो जाती। धीरे-धीरे मेरा स्कूल छूट गया। 7वीं तक ही पढ़ सकी। 16 साल की उम्र में मेरा निकाह हो गया।
पति के दूसरी लड़कियों से बने संबंध, कई-कई दिन रहता बाहर
निकाह से पहले लड़के ने कहा कि उसे सौतेली मां ने पाला है और उनका बर्ताव अच्छा नहीं है, इसलिए शादी के बाद किराए पर घर लेकर अलग रहेंगे। निकाह के बाद हम दोनों ने मिलकर अपना घर बसाया। धीरे-धीरे सारा सामान जुटाया।
पति पार्टी वगैरह में खाना बनाने का काम करता था। जिसके लिए वह कई-कई दिन के लिए बाहर भी जाता। धीरे-धीरे वह नशा करने लगा। कुछ लड़कियों से भी उसके संबंध बन गए। वह कभी 15 दिन तो कभी एक महीने बाद घर लौटता, तो हमेशा गुस्से में रहता। प्यार से बोलती तब भी भड़क जाता। घर में तोड़फोड़ करता, कपड़े जला देता, मुझे पीटता।
3 बच्चे होने के बाद भी नहीं बदले हालात
मैंने सोचा कि बच्चे हो जाएंगे तो वह बदल जाएगा। बेटी हुई तो वह बहुत खुश हुआ, लेकिन उसकी हरकतें नहीं बदलीं। उसके बाद एक बेटा, फिर एक और बेटी हुई, लेकिन हालात बद से बदतर होते गए।
घर पर अकेली रोती रहती। मायके वाले पहले से ही परेशान थे, इसलिए उन्हें भी कुछ नहीं बता सकती थी। वह कई-कई दिन घर न आता तो मुझे चिंता होती। उसे फोन करती तो लौटकर मुझे पीटता। कहता कि बार-बार कॉल मत किया करो।