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भारत का फॉरेक्स रिजर्व फिर चढ़ा, 692.9 अरब डॉलर पहुंचा

भारत का फॉरेक्स रिजर्व फिर चढ़ा, 692.9 अरब डॉलर पहुंचा

 

नई दिल्ली। भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में एक बार फिर जोरदार बढ़ोतरी हुई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, 31 जुलाई को समाप्त सप्ताह में देश का फॉरेक्स रिजर्व 10.512 अरब डॉलर बढ़कर 692.866 अरब डॉलर हो गया। यह जनवरी के अंत के बाद सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़ोतरी है।

इससे पहले 24 जुलाई को समाप्त सप्ताह में भी विदेशी मुद्रा भंडार में 6.118 अरब डॉलर की वृद्धि हुई थी। लगातार पांच सप्ताह से हो रही बढ़ोतरी के चलते देश का रिजर्व अब फरवरी 2026 में दर्ज किए गए 728.494 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर के काफी करीब पहुंच गया है।

ताजा आंकड़ों में विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों ने सबसे बड़ा योगदान दिया। सप्ताह के दौरान इनमें 8.750 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई और यह 564.680 अरब डॉलर हो गईं। विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं के मूल्य में होने वाले बदलाव का असर भी शामिल होता है।

वहीं, भारत के सोने के भंडार का मूल्य 1.685 अरब डॉलर बढ़कर 104.743 अरब डॉलर हो गया। विशेष आहरण अधिकार यानी SDR में भी 48 मिलियन डॉलर की वृद्धि हुई और यह 18.666 अरब डॉलर पर पहुंच गया।

आरबीआई के आंकड़ों से संकेत मिलता है कि साल की शुरुआत में वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच विदेशी मुद्रा भंडार में आई गिरावट के बाद अब इसमें लगातार सुधार हो रहा है। 27 फरवरी को समाप्त सप्ताह में भारत का रिजर्व 728.494 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंचा था।

विदेशी मुद्रा भंडार में मौजूदा मजबूती के पीछे देश में बढ़ा विदेशी मुद्रा प्रवाह भी अहम माना जा रहा है। जून की शुरुआत से अनिवासी भारतीयों की जमा योजनाओं और विदेशी उधारी के जरिए करीब 40.8 अरब डॉलर का अतिरिक्त विदेशी धन भारत में आया है।

फॉरेक्स रिजर्व में बढ़ोतरी का असर रुपये की स्थिति पर भी देखने को मिल रहा है। मई 2026 में रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने के बाद रुपया अब तक करीब 1.8 प्रतिशत मजबूत हुआ है। पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार होने से आरबीआई को जरूरत पड़ने पर मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करने और रुपये को सहारा देने के लिए अधिक क्षमता मिलती है।

मजबूत फॉरेक्स रिजर्व अर्थव्यवस्था के लिए कई स्तरों पर महत्वपूर्ण है। इससे बाहरी आर्थिक झटकों से निपटने की क्षमता बढ़ती है, आयात भुगतान को सहारा मिलता है और विनिमय दर में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। इसके साथ ही निवेशकों के बीच देश की वित्तीय स्थिरता को लेकर भरोसा मजबूत होता है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं और विदेशी पूंजी का प्रवाह जारी रहता है, तो भारत आने वाले समय में अपने विदेशी मुद्रा भंडार का नया रिकॉर्ड भी बना सकता है।

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