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ईशा देओल को प्यारा लगता है साउथ एक्सेंट, ट्रोलिंग पर कही दिल छूने वाली बात

ईशा देओल को प्यारा लगता है साउथ एक्सेंट, ट्रोलिंग पर कही दिल छूने वाली बात

मुंबई। किसी की भाषा या बोलने के अंदाज को लेकर मजाक उड़ाने के बजाय उसकी सांस्कृतिक पहचान का सम्मान किया जाना चाहिए। अभिनेत्री ईशा देओल का भी कुछ ऐसा ही मानना है। दक्षिण भारतीय कलाकारों के एक्सेंट को लेकर सोशल मीडिया पर होने वाली ट्रोलिंग पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें यह लहजा बेहद प्यारा लगता है।

आईएएनएस से बातचीत में ईशा ने बताया कि अलग-अलग कलाकारों की अपनी बोलने की शैली होती है और यह उनकी पहचान का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि जब वह हिंदी में अपने डायलॉग बोलती हैं, तो कई बार उनकी आवाज और बोलने के अंदाज में उनकी मां हेमा मालिनी की झलक दिखाई देती है। ईशा के मुताबिक, फिल्म निर्माता और निर्देशक कलाकार को उसकी खासियतों के साथ समझते हैं और उसी के आधार पर किरदार के लिए चुनते हैं।

अभिनेत्री ने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की कुछ जानी-मानी अभिनेत्रियों का उदाहरण देते हुए कहा कि श्रीदेवी, हेमा मालिनी और उर्मिला मातोंडकर की बोली में भी दक्षिण भारतीय लहजे की झलक सुनाई देती है। ईशा ने खास तौर पर उर्मिला मातोंडकर के प्रति अपनी प्रशंसा जाहिर की। उन्होंने कहा कि वह उर्मिला की बहुत बड़ी प्रशंसक हैं और उनके बोलने के अंदाज में आने वाला हल्का-सा एक्सेंट उन्हें पसंद है।

रश्मिका मंदाना भी उठा चुकी हैं मुद्दा

साउथ इंडियन एक्सेंट को लेकर यह बहस उस समय चर्चा में आई, जब अभिनेत्री रश्मिका मंदाना ने करण जौहर के टॉक शो ‘कॉफी विद करण सीजन 9’ में अपने बोलने के लहजे को लेकर होने वाली ट्रोलिंग पर बात की। शो में वह अपने पति और अभिनेता विजय देवरकोंडा के साथ नजर आई थीं।

रश्मिका ने अपनी बात रखते हुए कहा था कि दक्षिण भारत से आने के कारण उनके बोलने के तरीके में वहां की भाषाई छाप होना स्वाभाविक है। इसमें असहज महसूस करने जैसी कोई बात नहीं है। उन्होंने अलग-अलग भाषाओं में अपनी फिल्मों के लिए डबिंग करने को भी गर्व का विषय बताया और स्पष्ट किया कि ऑनलाइन ट्रोलिंग उन्हें अपना काम करने से नहीं रोक सकती।

ईशा देओल इन दिनों एक्शन-क्राइम ड्रामा फिल्म ‘प्रताप’ के जरिए लंबे अंतराल के बाद पर्दे पर वापसी को लेकर चर्चा में हैं। ऐसे में एक्सेंट पर उनकी यह टिप्पणी भाषा, क्षेत्र और संस्कृति से जुड़ी विविधताओं को सहजता से स्वीकार करने का संदेश देती है।

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