UPI पर बड़ी राहत, ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा कोई शुल्क
नई दिल्ली। यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर लगाए जाने को लेकर चल रही चर्चा के बीच पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने ग्राहकों और छोटे कारोबारियों को बड़ी राहत दी है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि आम उपभोक्ताओं के लिए यूपीआई भुगतान मुफ्त बना रहेगा और छोटे व्यापारियों को भी भुगतान स्वीकार करने के लिए कोई एमडीआर नहीं देना होगा।
पीसीआई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा कि 2016 में शुरुआत के बाद से यूपीआई उपभोक्ताओं के लिए नि:शुल्क रहा है। संगठन के मुताबिक, आम लोगों से किसी तरह का ट्रांजैक्शन शुल्क लेने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
एमडीआर को लेकर जारी बहस के बीच पीसीआई ने यह भी साफ किया कि चर्चा का केंद्र ग्राहकों से शुल्क वसूलना नहीं, बल्कि तेजी से बढ़ते डिजिटल पेमेंट नेटवर्क को लंबे समय तक मजबूत और टिकाऊ बनाए रखना है। यूपीआई अब हर महीने अरबों लेनदेन संभाल रहा है, ऐसे में तकनीकी ढांचे को लगातार अपग्रेड करने और सुरक्षित बनाए रखने की जरूरत बढ़ रही है।
छोटे व्यापारियों के लिए भी मौजूदा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं बताया गया है। पीसीआई के अनुसार, छोटे दुकानदारों, ठेला विक्रेताओं, किराना कारोबारियों और सूक्ष्म उद्यमों से यूपीआई भुगतान स्वीकार करने पर एमडीआर नहीं लिया जाता। यही वजह है कि कम लागत में डिजिटल भुगतान की सुविधा छोटे कारोबारियों तक तेजी से पहुंची है।
यूपीआई ने देश के छोटे कारोबारियों के लिए डिजिटल भुगतान स्वीकार करना आसान बनाया है। इसके चलते कई छोटे व्यवसाय नकद लेनदेन पर अपनी निर्भरता कम कर सके हैं। साथ ही डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल से वित्तीय समावेशन को भी बढ़ावा मिला है।
पीसीआई ने कहा कि यूपीआई अब केवल भुगतान का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि यह भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम की रीढ़ बन चुका है। लेनदेन की बढ़ती संख्या के साथ साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी की रोकथाम, तकनीकी क्षमता और नेटवर्क के रखरखाव पर लगातार निवेश की जरूरत है।
संगठन के मुताबिक, पिछले करीब एक दशक में बैंकों, फिनटेक कंपनियों, भुगतान सेवा प्रदाताओं, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने यूपीआई नेटवर्क के निर्माण और संचालन में महत्वपूर्ण निवेश किया है।
पीसीआई का कहना है कि डिजिटल भुगतान के इस बड़े नेटवर्क को भविष्य के लिए मजबूत बनाने पर चर्चा जारी रह सकती है, लेकिन इसका असर आम उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों पर वित्तीय बोझ के रूप में नहीं पड़ना चाहिए।