जोधपुर हाईकोर्ट में युवक ने किया आत्महत्या का प्रयास, बालकनी में लटका
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ में सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब एक युवक एडवोकेट चैंबर परिसर की बालकनी में लटक गया। वहां मौजूद एडवोकेट क्लर्क, चैंबर स्टाफ और अन्य लोगों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे पकड़ लिया और सुरक्षित बचा लिया। घटना की सूचना मिलने पर कुड़ी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और युवक से पूछताछ शुरू की।
पुलिस के अनुसार, युवक की पहचान कार्तिक उर्फ अरबाज के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि उसका मामला प्रेम विवाह से संबंधित था और इस संबंध में हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। सामने आई जानकारी के मुताबिक, सुनवाई के दौरान युवती को युवक के नाम और धार्मिक पहचान के बारे में पता चला, जिसके बाद वह अपने परिजनों के साथ चली गई। इसी घटनाक्रम के बाद युवक द्वारा आत्महत्या का प्रयास किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, मौके पर मौजूद लोगों की सतर्कता से उसे समय रहते बचा लिया गया।
कुड़ी थाना अधिकारी लेखराज के मुताबिक, पुलिस ने युवक को शांति भंग की आशंका में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 151 के तहत निरुद्ध किया है। पुलिस घटना से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटा रही है।
हाईकोर्ट ने युवती की कस्टडी बुआ को सौंपने के दिए निर्देश
इस मामले से जुड़े न्यायिक घटनाक्रम में राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 26 अक्टूबर को बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका संख्या 533/2026 पर सुनवाई की। जस्टिस मुन्नूरी लक्ष्मण और जस्टिस चंद्र प्रकाश श्रीमाली की पीठ के सामने युवती को राजकीय नारी निकेतन, जोधपुर से पेश किया गया।
अदालत के आदेश के अनुसार, नारी निकेतन की काउंसलिंग रिपोर्ट में युवती ने अपनी बुआ के साथ जाने की इच्छा जताई थी। युवती की बुआ देवी ने भी उसकी कस्टडी लेने पर सहमति दी। याचिकाकर्ता की ओर से भी इस पर कोई आपत्ति नहीं की गई। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने युवती की कस्टडी उसकी बुआ को सौंपने के निर्देश दिए।
कथित फर्जी विवाह प्रमाण पत्र पर अगली सुनवाई 20 नवंबर को
प्रकरण से संबंधित एक अन्य याचिका में कथित फर्जी विवाह प्रमाण पत्र का मुद्दा भी अदालत के समक्ष विचाराधीन है। हाईकोर्ट ने सिविल रिट याचिका संख्या 21577/2026, आरती बनाम राजस्थान सरकार एवं अन्य, को अगली सुनवाई पर पेश करने के निर्देश दिए हैं।
इस मामले में अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 20 नवंबर 2026 तय की है। विवाह प्रमाण पत्र की कथित जालसाजी को लेकर अभी कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया गया है। मामले में आगे की स्थिति न्यायिक सुनवाई के बाद स्पष्ट होगी।