आलोक स्कूल राजसमन्द में विदाई समारोह ( कक्षा 12 ) के मंगलोत्सव कार्यक्रम।
राजसमन्द. आलोक स्कूल राजसमन्द के महाराणा प्रताप सभागार में कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा में बैठने वाले विद्यार्थियों के लिए मंगलकामना का प्रतीक मंगलोत्सव कार्यक्रम हर्षोल्लास के साथ मनाया । मंगलोत्सव कार्यक्रम का शुभारम्भ कक्षा 12 के प्रतिनिधि विद्यार्थियों ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया । इस अवसर पर आलोक संस्थान के निदेशक डॉ प्रदीप कुमावत, प्रशासक मनोज कुमावत, प्राचार्य ललित गोस्वामी, एकेडमिक काउंसलर ध्रुव कुमावत व श्रीमती विद्या कुमावत उपस्थित रहे ।
कार्यक्रम में कक्षा 11 साइंस, कॉमर्स व आर्ट्स के विद्यार्थियों ने अपने मनमोहक नृत्य की प्रस्तुति दी । मंगलोत्सव कार्यक्रम का सबसे आकर्षण अवॉर्ड ज्यूरी द्वारा घोषित श्री आलोक व सुश्री आलोक रहा । श्री आलोक बने प्रिंस कितावत व सुश्री आलोक प्रेरणा राठौड़ को विशेष सम्मान से नवाजा गया । इस बीच कक्षा 12 कॉमर्स, साइंस व आर्ट्स के प्रतिनिधि छात्रों को श्री फल प्रदान कर शुभकामना दी ।
वर्ष भर पढाई के साथ साथ अन्य शैक्षणिक गतिविधियों में अव्वल रहने पर स्टूडेंट्स को अलग अलग नामों से अवॉर्ड प्रदान किये गए । आलोक रत्न अवॉर्ड - कुशल सेठी , चेयरमेन अवॉर्ड - विया जोशी , डायरेक्टर अवॉर्ड-नेहा बॉलीवॉल, हर्षवर्द्धन, हिमांशु सिंह - ,पतंजलि अवॉर्ड - महिमा कँवर, चारवी कुमावत , तानसेन अवॉर्ड - यशवर्द्धन कीर, वीरेंद्र सिंह, , ए पी जे अब्दुल कलाम अवॉर्ड - पीयूष श्रीमाली, , प्रिंसिपल अवॉर्ड - करण कीर, , डॉ राधारकृष्णं अवॉर्ड -,भाविका पंवार कालिदास अवॉर्ड - ,हर्षिता जांगिड़ , राघवेंद्र पारीक, गौरव सिंह, टेगौर अवॉर्ड - स्नेहा वैष्णव, वर्षा पड़िहार, अमर्त्य सेन अवॉर्ड - लोकेंद्र सिंह, जमनेश नकुम, मीरा अवॉर्ड - लवीना सिंदल, सिद्धि सेठी, प्रियल वैरागी, ममता चौहान, रिद्धि पालीवाल, एकलव्य अवॉर्ड - भरत सालवी, रुद्रप्रताप सिंह, उदयसिंह अवॉर्ड - महक रोज, हर्षिता टांक, चंचल कुमावत को प्रदान किया । ये सभी अवॉर्ड बच्चों को निदेशक डॉ प्रदीप कुमावत, प्रशासक मनोज कुमावत, प्राचार्य ललित गोस्वामी व एकेडमिक काउंसलर ध्रुव कुमावत ने प्रदान कर उन्हें बधाई दी ।
निदेशक डॉ प्रदीप कुमावत ने अपने संबोधन में स्टूडेंट्स को आगामी बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ठ सफलता प्राप्त करने की शुभकामना दी व कहा कि विद्यालय जीवन से निकलने के बाद आगे के जीवन हेतु हर प्रकार के संघर्ष के लिए तैयार रहना है । आजकल के इस प्रतियोगी वातावरण में शिक्षा किताबो पर आधारित हो गई है किंतु इससे मूल्यों की प्रमुखता गौण हो गई है ।जीवन मूल्यों के पतन से हमारी आत्मा का पोषण क्षीण होता जा रहा है । अतः आत्मा के स्तर से वह अब भी अशिक्षित ही रह गया है ।हमें इस स्थिति का समय रहते आंकलन कर निराकरण कर लेना चाहिए । शिक्षा, समाज, संस्कार, अनुशासन, सहयोग, सेवा व कर्तव्यबोध जैसे गुणों के बल पर अपना विद्यार्थी जीवन जीकर आगे के जीवन की चुनोतियों का सामना करने के लिए तैयार हो सकेंगे ।
प्राचार्य ललित गोस्वामी ने शुभकामना देते हुए कहा कि जीवन में हमेशा कठिन परिश्रम कर सफलता अर्जित करें ।अपनी सुनहरी यादों को हमेशा अपने जेहन में बसाकर खुशनुमा जीवन जिए । जहाँ भी काम करने का अवसर मिले, अपने संस्कारो को कभी ना भूलें ।हर जगह विद्यार्थी बनकर कुछ नया सीखने का प्रयत्न करना सफलता की निशानी है । पहला सुख निरोगी काया को ध्यान में रखकर पहले स्वयं को स्वस्थ रखना है । शरीर स्वस्थ है तो सब कुछ है । फिर कठिन परिश्रम करके अपने लक्ष्य को आसानी से प्राप्त किया जा सकता है ।