शहीदों के स्मारक तीर्थ स्थल के समान होते हैं - राठौड़
रतनगढ़ । देश के लिए लड़ने वालों का सम्मान पूरा देश करता है और देश के लिए लड़ने और मरने वालों को ही देश हमेशा स्मरण करता है वो लोग ही करने योग्य होते हैं। शहीदों के स्मारक तीर्थ स्थल के समान होते हैं, यह हमें प्रेरणा देने वाले प्रेरणास्थल होते हैं। यह उद्गार लेफ्टिनेंट जनरल सगतसिंह के जन्मस्थान कुसुमदेसर में बने उनके भव्य स्मारक के लोकार्पण समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए राजस्थान विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने व्यक्त किए। इस अवसर पर राठौड़ ने कहा कि, लेफ्टिनेंट जनरल सगतसिंह अपने समय के ही नहीं बल्कि सर्वकालिक महान सेनानायकों में से एक रहे हैं। ऐसे सेनानायक जिन्होंने चीन, पुर्तगाल और पाकिस्तान तीन-तीन देशों को पराजित किया था। ऐसे महानायक का भव्य स्मारक उनकी जन्मभूमि कुसुमदेसर में बनाया जाना प्रेरणा देने वाला एक बहुत बड़ा कदम है। इस स्मारक के निर्माण के लिए नेता प्रतिपक्ष ने युवा समाजसेवी पवनसिंह राठौड़ को बधाई देते हुए कहा कि उनके द्वारा किया गया यह कार्य आने वाले समय में न केवल सगतसिंह को अमर करेगा बल्कि सगतसिंह के स्मारक बनाने के उपलक्ष में पवनसिंह का नाम भी स्वर्ण अक्षरों में लिख गया है। लेफ्टिनेंट जनरल सगतसिंह के स्मारक पर स्थित उनकी आवक्ष प्रतिमा का अनावरण एवम् लोकार्पण करते हुए ध्वजारोहण के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। मुख्य समारोह की अध्यक्षता सरपंच ग्राम पंचायत कुसुमदेसर श्रीमती अनीता कंवर ने की वहीं कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री राजकुमार रिणवा ने कहा कि शहीदों, वीरों और योद्धाओं के स्मारकों व मूर्ति स्थलों को हमें एक मंदिर की तरह पूजना चाहिए, यह स्मारक आधुनिक समय के मंदिर हैं हमे इनसे प्रेरणा मिलती है। रिणवा ने इस अवसर पर कवि गजानंद वर्मा का प्रसिद्ध गीत "सुण दिखणादी बादली उतराधे छेड़े जा" सुना कर उपस्थित जनसमुदाय को देश भक्ति के रंग में रंगा। अतिथियों का शाब्दिक स्वागत पवनसिंह कुसुमदेसर द्वारा किया। इस अवसर पर पवनसिंह कुसुमदेसर ने विस्तार से लेफ्टिनेंट जनरल सगतसिंह के जीवनवृत्त पर प्रकाश डालते हुए उन्हें एक महान सैन्य कमांडर बताते हुए उनके बारे में संपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराई। बताया कि कैसे नाथूला में उन्होंने चीन को हराया था, कैसे उन्होंने गोवा मुक्ति संग्राम में पुर्तगाल को हराया था और फिर पाकिस्तान के तिरानवे हजार सैनिकों का आत्मसमर्पण कराने की पटकथा सगतसिंह ने ही लिखी थी। पवनसिंह कुसुमदेसर ने स्मारक के निर्माण के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि कुसुमदेसर की श्रीमती किसनीदेवी धर्मपत्नी छोटूराम मेघवाल द्वारा स्मारक के लिए अपनी बहुमूल्य भूमि को स्मारक के लिए निशुल्क भूमिदान किया गया है। चल पाने में अक्षम श्रीमती किसनीदेवी नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ द्वारा वह जहां बैठी थी वहीं जाकर अभिनंदन किया। वहीं मूर्तिकार राजकुमार पंडित का भी सम्मान किया गया। इस अवसर पर विधायक अभिनेश महर्षी, प्रधान प्रतिनिधि इंद्राज खीचड़, पीसीसी के पूर्व सदस्य कल्याणसिंह शेखावत, एडवोकेट मनीष शर्मा, सेवानिवृत्त अध्यापक रुकमानंद भींचर, सरपंच जगजीतसिंह ने भी अपना उद्बोधन दिया। अतिथियों को प्रतीकचिन्ह, साफा एवम् दुप्पटा औढ़ाकर स्वागत से प्रारंभ हुए कार्यक्रम में भाजपा के जिलाध्यक्ष धर्मवीर पुजारी, जिला प्रमुख प्रतिनिधि रविकुमार आर्य, पूर्व जिला प्रमुख हरलाल सहारण, लेफ्टिनेंट जनरल सगतसिंह के पुत्र सेवानिवृत्त कर्नल रणविजय सिंह, विशिष्ट अतिथि थे। वहीं सरपंच फॉर्म के अध्यक्ष उम्मेदसिंह गोलसर, उप प्रधान रक्षपाल नायक, सरपंच नोसरिया देवेंद्रसिंह, रतनसरा विक्रमपाल, नूंवा राजेंद्रसिंह, भरपालसर दातारसिंह शेखावत, मेलूसर महावीरसिंह, भावनदेसर भंवरलाल, लोहा भंवरलाल पुनिया, लधासर किशनसिंह, लूंछ संपतराम नायक, दाऊसर, ओमप्रकाश पारीक, गोगासर ओमप्रकाश, जिला परिषद सदस्य राजकुमार सिहाग, भागीरथसिंह राठौड़, बजरंग गुर्जर, भाजपा नगर अध्यक्ष अरविंद इंदौरिया, पंचायत समिति सदस्य हिम्मतसिंह मालासी, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष शिवभगवान कम्मा , ओमप्रकाश सीमार, संजय पुरोहित, श्याम पारीक, उमाशंकर दाधीच, मदन दाधीच, गोपाल पारीक सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित हुए। वहीं गौड़-विप्र ब्राह्मण समाज, राजपूत सभा क्षत्रीय महासभा, भारत विकास परिषद, लायंस क्लब, बार काउंसिल, करणी सेना सहित अन्य संस्थाओं के प्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित हुए। कार्यक्रम में गजेंद्रसिंह आबडसर, करणीसिंह बिनादेसर, सज्जनसिंह राठौड़, बजरंगसिंह, तिलोकसिंह, मेजरसिंह, धर्मेंद्रसिंह, समुद्रसिंह, हरिसिंह राठौर, गोपालसिंह राठौड़, किशनसिंह, भादरसिंह, हमुमंतसिंह, किसनाराम नेहरा, कुरडाराम मेघवाल, मदनसिंह भाटी, लक्ष्मणसिंह, करणीसिंह, ईश्वरसिंह, श्यामलाल, नाथूराम, जगनाराम, गणपतसिंह, बजरंग नाई सहित हजारों गणमान्यजन उपस्थित हुए। कार्यक्रम का मंच संचालन युवा कवि मनोज चारण ने किया।