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मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण की बैठक

मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण की बैठक

जयपुर। प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य एवं राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण (एसएमएचए) की अध्यक्ष श्रीमती गायत्री राठौड़ की अध्यक्षता में बुधवार को स्वास्थ्य भवन में एसएमएचए की दूसरी समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने, आत्महत्या की रोकथाम तथा मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों की निगरानी और पंजीकरण व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण उठाये जाने वाले कदमों पर चर्चा की गई। श्रीमती राठौड़ ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य भी स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सरकार का प्रयास है कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाएं लोगों को आसानी से उपलब्ध हों और जरूरतमंद व्यक्ति को समय पर परामर्श, उपचार और सहयोग मिल सके। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ संबंधित विभागों, विशेषज्ञों, शैक्षणिक संस्थानों और स्वयंसेवी संगठनों के सहयोग से काम किया जाएगा। बैठक में संभाग स्तर पर डिस्ट्रिक्ट मेंटल हेल्थ रिव्यू बोर्ड्स (डीएमएचआरबी) के गठन के प्रस्ताव पर चर्चा की गई। इन बोर्ड्स में न्यायिक अधिकारी, जिला प्रशासन के प्रतिनिधि, मनोचिकित्सक एवं अन्य चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ मानसिक बीमारी से प्रभावित व्यक्तियों, उनके देखभालकर्ताओं अथवा एनजीओ प्रतिनिधियों को शामिल करने का प्रावधान है। इससे मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और संबंधित मामलों के समाधान की व्यवस्था मजबूत मिल सकेगी। प्रदेश के नशा मुक्ति केंद्रों को एसएमएचए के तहत पंजीकृत करने की प्रक्रिया शुरू करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। केंद्रीय मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण की अधिसूचना के अनुसार नशा मुक्ति केंद्रों को मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों की श्रेणी में शामिल किया गया है। इसके साथ ही मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों के प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन के नवीनीकरण और निर्धारित मानकों के अनुरूप स्थायी पंजीकरण की प्रक्रिया को भी आगे बढ़ाया जाएगा। बैठक में बताया गया कि एसएमएचए की पहली बैठक के बाद प्रदेश में अब तक 29 मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों का प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन पूरा किया जा चुका है। संस्थानों की निगरानी के लिए जिला स्तर पर निरीक्षण समितियों के गठन के संबंध में सभी जिला कलेक्टरों को पत्र जारी किए जा चुके हैं। मानसिक स्वास्थ्य सहायता को लोगों तक आसानी से पहुंचाने में टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। प्रदेश में अब तक 1,11,377 कॉल प्राप्त हुई हैं। इनमें 95,305 कॉल लोगों द्वारा स्वयं की गईं, जबकि 16,072 कॉल टेली-मानस की ओर से शुरू की गईं। राज-ममता और मनदर्पण कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों, किशोरों और युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन और भावनात्मक मजबूती पर काम किया जा रहा है। वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में कम से कम महीने में एक बार मानसिक स्वास्थ्य एवं तनाव से संबंधित काउंसलिंग और जागरूकता सत्र आयोजित करने की योजना है। राज-ममता और मेंटल वेल-बिइंग मॉड्यूल के लिए 9 सितम्बर को राज्य स्तर तथा 10 से 20 सितम्बर के बीच जिला स्तर पर प्रशिक्षण एवं ओरिएंटेशन कार्यक्रम पर चर्चा की गई। प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस 10 सितम्बर से विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 10 अक्टूबर तक विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान रैलियां, कार्यशालाएं, क्विज, पोस्टर एवं निबंध प्रतियोगिताएं तथा सोशल मीडिया अभियान जैसी गतिविधियां आयोजित होंगी। बैठक में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आवश्यक मानव संसाधन की समीक्षा भी की गई। श्रीमती राठौड़ ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए संस्थागत व्यवस्था, प्रशिक्षित मानव संसाधन, तकनीकी सहयोग और जन-जागरूकता पर एक साथ काम करना जरूरी है। सामूहिक प्रयासों से प्रदेश में मानसिक रूप से स्वस्थ और सहयोगी वातावरण तैयार किया जा सकता है। वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. शिव गौतम ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य भी शारिरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुडी समस्याओं को लेकर लोगों में जागरुकता बढाने के साथ साथ बीमारी को लेकर बनी झिझक और सामाजिक भ्रांतियों को दूर करना भी जरुरी है। विशेषकर युवाओं की जागरुक करने पर जोर दिया जाए। बैठक में चिकित्सा शिक्षा आयुक्त श्री बाबूलाल गोयल, निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. रवि प्रकाश शर्मा, ओएसडी एनएचएम श्री संतोष गोयल, स्टेट नोडल अधिकारी एनएमएचपी डॉ. सांवरमल स्वामी, मनोचिकित्सक विशेषज्ञ, अन्य विभागों के अधिकारी, अन्य संबंधित सदस्य एवं संबंधित अधिकारीगण मौजूद थे।

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