मोदी पिछड़ा वर्ग नहीं, क्या साहूकार, मनी लैण्डर्स पिछड़ा वर्ग है?
काका साहब कालेलकर की अध्यक्षता में गठित प्रथम पिछड़ा वर्ग आयोग ने 1955 में भारत में 2399 पिछड़ी जातियों व समुदायों की सूची तैयार की उनमें 837 को सर्वाधिक पिछड़े के रूप में वर्गीकृत किया। दिसम्बर 1979 में संविधान के अनुच्छेद 340 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए केन्द्रीय सरकार ने मण्डल आयोग का गठन किया। इन्द्रा साहनी बनाम भारत सरकार में सुप्रिम कोर्ट से सभी राज्यों में पिछड़ा वर्ग आयोगों का गठन हुआ। सभी ने रिपोर्टो के साथ पिछड़ा वर्ग की सूचियां, संविधान के प्रावधानों को ध्यान में रखकर पिछड़ा वर्ग सूचियां बनाई। आयोगों ने पिछड़ा वर्ग में पिछड़ापन निर्धारण हेतु आर्थिक आधार को प्रमुख रूप नहीं दिया।
संविधान के अनुच्छेदों 15(4) और 16(4) में सामाजिक, शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गो की उन्नति के लिए विशेष प्रावधान किये गये। अनुच्छेद 46 में कमजोर वर्गो के शैक्षणिक तथा धार्मिक हितों की विशेष रूप से रक्षा करने और उनका विकास करने का अधिकार दिया गया। दुर्बल और अनुसूचित जातियां, आदिम जातियों की शिक्षा व अर्थ सम्बन्धी हितों की सावधानी से उन्नति करेगा तथा सामाजिक अन्याय तथा शोषण से उनका संरक्षण करेगा।
सबल पक्षकारों द्वारा उनके दुरूपयोग या अधिकार को रोकने या अवरूद्ध करने के लिए दुर्बल पक्ष को आवश्यक सहयोग व सहायता देना लक्ष्य रहा। विभिन्न जुडीशियल निर्णयों में उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पिछड़ा वर्ग में आरक्षण के लिए यह जरूरी रखा गया कि निषेदों व निर्योग्यताओं के कारण पिछड़ापन आया, सत्ता में भागेदारी, सरकारी सेवाओं में प्रतिनिघित्व, निषेदों व निर्योग्यताओं के कारण पर्याप्त नहीं मिला। आरक्षण मूल अधिकार नहीं है परन्तु 15(4) व 16(4) द्वारा सामाजिक समानता के लिए विशेष प्रावधान है। स्वतंत्रता मिलने पर दासता समाप्त हुई, परन्तु केवल शब्दों में दासता समाप्त हुई, दासता के विचार समाप्त नही हुए। संविधान के नीति निदेशक तत्व मूल अधिकारों की तुलना में गौण नहीं है।
संक्षिप्त में समाज में जिन वर्गो को पिछड़ा, दलित, वंचित, तिरस्कार के लायक, अशिक्षित, धार्मिक अघिकारों से वंचित, घृणित समझे जाने वाले जाति/वर्ग जो निर्योग्यताओं व निषेदों के कारण समाज में प्रतिष्ठा प्राप्त नहीं कर सके, अशिक्षित, नीची सामाजिक स्थिति के कारण निर्धनता में रहे। सरकारी सेवाओं से वंचित रहे, केवल सेवा कार्य उनका अधिकार व कर्तव्य था, आरक्षण के अधिकारी है।
ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक व्यवस्था उधारी से नकद व सभी प्रकार के सामान, उपभोक्ता सामग्री, गांव में रहने वाले साहूकार करते थे, उन्हें मोदी कहा जाता था। मोदी कोई व्यवसायिक पिछड़ी जाति नहीं है। इनको ‘‘मनी लैण्डर’’ कहा जाता था। अनाप शनाप ब्याज लेते थे, खेती को रहन रखकर छोटे किसानों को बेदखल कर देते थे। कागजों में काई हिसाब किताब नहीं केवल बहियों में अनपढ़ पिछड़ों व आदिवासियों के अंगूठे लेकर गुंडों द्वारा जबरदस्ती वसूली व बेदखली इनका कार्य रहा है। इन्होंने आदिवासियों का जी खोलकर शोषण किया और आज भी करते हैं। सामाजिक दुर्घटना पर कर्ज देकर गरीब पिछड़े आदिवासियों को लूटते है, फिजूलखर्ची करते है। इनके अत्याचारों व शोषण को रोकने के लिए ।इवसपजपवद व िउवदमल संनदकमतपदह ।बज लाया गया। इनसे हो रहे शोषण को रोकने का प्रयत्न किया गया।
मोदी कोई व्यवसायिक पिछड़ी जाति नहीं है। सभी उच्च वर्ग विशेषकर वैश्य वर्ग के विभिन्न क्षेत्रों में व्यवसाय के अनुसार व्यापार करने वाले उद्योगपति पुराने काम को देखते हुए मोदी लिखते है, कहलाता है। उनकी पृथक वैश्य वर्ग में उपजाति है। मोदियों के संबंध में टिप्पणी पिछड़ा वर्ग के विरूद्ध नहीं हैैै। मोदियों में अधिकांश बड़े व्यापारी, उद्योगपति है, देशभर में इनके प्रतिष्ठान है। मोदी सम्बन्धी टिप्पणी किसी सूरत में पिछड़े वर्गो का अपमान नहीं कही जा सकती। मैं ट्राइबल क्षेत्र का निदेशक रहा हूं, इनके कार्य व्यवहार से परिचित हूं। मैंने देश के सभी बड़े राज्यों की पिछड़ा वर्ग सूची व केन्द्रीय सूची देखी है। पिछड़ा वर्ग सूचियों में व केन्द्रीय सूची में मोदी पिछड़ा वर्ग सम्मिलित नहीं किए गये है। इनको पिछड़ा वर्ग नहीं ईडब्लूएस में ही लाभ व आरक्षण मिल सकता है।
निःसहाय पिछड़ो व पिछड़ो से अहंकारयुक्त पैशाची एवं क्रूरता से अत्याचार करने वाले धनाढ्य वर्ग को किस प्रकार पिछड़ा कहा जा सकता है? विवेकानन्द की मूर्तियां लगाने वाले उनके सामाजिक, राजनीतिक विचारों व कथनों को अपने निजी स्वार्थो में भुला बैठे। उच्च न्यायालय के निर्धारित सिद्धान्त, गांधी व अम्बेडकर की चेतावनियों को भुलाकर स्वयं पिछड़ा वर्ग, वंचित वर्ग बनने का प्रयास कर रहे हैं। कोई मोदी किसी निर्वाचित संस्था व स्थान पर पिछड़ा वर्ग का सदस्य, संसद या विधानसभा सदस्य नहीं बना। जो जाति/वर्ग केन्द्र व राज्यों की पिछड़ा वर्ग सूचियों में नहीं है, उसे किस प्रकार पिछड़ा वर्ग बताया जा सकता है।
-डा. सत्यनारायण सिंह