राजस्थान में भ्रष्टाचार पर गरमाई सियासत
बाल मुकुन्द ओझा
राजस्थान में भ्रष्टाचार पर रार शुरू हो गई है। पक्ष और विपक्ष के आरोपों से सियासत गरमा गई है। वर्तमान एवं पूर्व मुख्य मंत्रियों के मध्य भ्रष्टाचार पर आरोपों से प्रदेश में सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। ताज़ा प्रकरण अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद से हटाए गए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल और उनकी आईपीएस पत्नी प्रशाखा माथुर के परिवार द्वारा कथित तौर पर बड़े पैमाने पर संपत्ति खरीदने से जुड़े एक विवाद के उजागर होने से जुडी है। मीडिया की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस वरिष्ठ नौकरशाह और उनके परिवार ने भारी-भरकम संपत्तियां बनाई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, शिखर अग्रवाल, उनकी पत्नी, उनके दो बेटों और ससुराल वालों ने महज ढाई साल के भीतर एक ही रियल एस्टेट कंपनी से करीब 40 विला और कॉटेज खरीदे हैं। इस प्रकरण में नए नए खुलासे के बाद राज्य सरकार के मुखिया और पूर्व मुखिया ने एक दूसरे पर भ्रष्टाचरण के गंभीर आरोपों की झड़ी लगा दी है। प्रदेश के मुख्य मंत्री भजन लाल शर्मा ने पूर्व मुख्य मंत्री अशोक गहलोत पर पुराने खाध बीज व्यवसाय में नकली माल बेचकर किसानों को लूटने, पैसे लेकर आरपीएससी सदस्य की नियुक्ति करने और पेपर लीक सरीखे गंभीर आरोप जड़े है। यह भी कहा, अरे गहलोत साब पूरी तरह से सुन लीजिये जो हाथ भ्रष्टाचार करेगा, वह काट लिया जायेगा। इससे पूर्व अशोक गहलोत ने शिखर अग्रवाल के अनंता रिसोर्ट प्रकरण में मुख्यमंत्री की भूमिका की सीबीआई से जांच कराने की मांग की थी। वहीं गहलोत ने भजन लाल के आरोपों को झूठा ठहराते हुए 24 घंटों में माफ़ी मांगने का अल्टीमेटम देकर सियासत को गरमा दिया। इसी बीच मुख्यमंत्री भजन लाल ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि यदि मैं गहलोत सरकार के भ्रष्टाचार की पूरी फेहरिस्त बताऊंगा तो पैरों तले जमीन खिसक जाएगी।
गौरतलब है राजस्थान में भ्रष्टाचार ने एक नया आयाम स्थापित किया है। पिछली गहलोत सरकार के दौरान सरकारी भर्तियों में खुले आम भ्रष्टाचरण हुआ जिसकी जाँच अभी भी जारी है। गहलोत सरकार के एक पूर्व मंत्री महेश जोशी को करोड़ों रुपयों के जलदाय घोटाले में पकड़ा गया है, मगर वर्तमान भाजपा सरकार के लाख प्रयासों के बाद भी प्रदेश में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी पर प्रभावी अंकुश नहीं लगाया जा सका है। एसीबी आये दिन घूसखोरों की धरपकड़ कर रही है। राजस्थान में सरकारी दफ्तर रिश्वतखोरी के बड़े अड्डे बन गए है। राजस्थान में भ्रष्टाचारियों के विरुद्ध ताबड़तोड़ कार्यवाही के बावजूद भ्रष्टाचार थमने का नाम नहीं ले रहा है।
ऐसा लगता है राजस्थान में भ्रष्टाचार ने शिष्टाचार का रूप ले लिया है। भारतीय प्रशासनिक सेवा, पुलिस सेवा, राजस्थान प्रशासनिक सेवा और राज्य सेवा के बहुत से प्रमुख अधिकारी या तो जेलो में बंद है अथवा जमानत पर बाहर आकर बहाल होकर अपनी अफसरी का लुत्फ उठा रहे है जो यह साबित करता है उनकी सरकार में कितनी भारी घुसपैठ है। सरकार चाहे कांग्रेस की हो या भाजपा की उनके रुतबे पर कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है और उनके द्वारा किया गया भ्रष्टाचार सिर्फ शिष्टाचार है। जिनसे करोड़ों रूपयों की धन राशि बरामद हुई है वे भी जनता को सरेआम ठेंगा दिखा रहे है। इससे यह साफ जाहिर होता है भ्रष्टाचार ने इस राज्य में अपनी जडे मजबूती से जमा ली है। जनता के खून पसीने की कमाई को हड़प करने का जरिया भ्रष्टाचारियों ने अपना लिया है।
राजस्थान तो एक बानगी है, सच तो यह है भ्रष्टाचार ने देश और दुनिया को अपनी गिरफ्त में ले रखा है। भ्रष्टाचार आर्थिक विकास में बाधक है, लोकतंत्र के प्रति विश्वास को नुकसान पहुँचाता है और रिश्वत की संस्कृति को बढ़ावा देता है। 140 करोड़ की आबादी का आधा भारत आज भ्रष्टाचार के मकड़जाल में फंसा हुआ है। हमारे देश में भ्रष्टाचार इस हद तक फैल चुका है कि इसने समाज की बुनियाद को हिला कर रख दिया है। भ्रष्टाचार एक संचारी बीमारी की भांति इतनी तेजी से फैल रहा है कि लोगों को अपना भविष्य अंधकार से भरा नजर आने लगा है और कहीं कोई भ्रष्टाचार मुक्त समाज की उम्मीद नजर नहीं आरही है। मंत्री से लेकर संतरी और नेताओं तक पर भ्रष्टाचार के दलदल में फंसे है। भ्रष्टाचार हमारे सामाजिक, आर्थिक और नैतिक जीवन मूल्यों पर सबसे बड़ा प्रहार है। भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कठोर कानून और दंड-व्यवस्था की जानी चाहिए। जब तक समाज एकजुट होकर भ्रष्टाचार पर हमला नहीं करेगा तब तक इस बीमारी को जड़मूल से समाप्त नहीं किया जा सकता।