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दीनदयाल कुमावत की वजह से संभव हो पाया मोखमपुरा महापड़ाव 

दीनदयाल कुमावत की वजह से संभव हो पाया मोखमपुरा महापड़ाव 

नरैना . भले ही सांभर-फुलेरा जिला नहीं बन पायें लेकिन मोखमपुरा महापड़ाव के लिए जो जज्बा व जोश सांभर-फुलेरा सहित आसपास के लोगों में देखने को मिला ! वो वास्तव में काबिलियत तारीफ था ! सांभर-फुलेरा को जिला बनवाने के लिए तीन गुट बने हुये थे ! पहला गुट सांभर-फुलेरा जिला बनाओ संघर्ष समिति का,दूसरा गुट विधायक निर्मल कुमावत का व तीसरा गुट पूर्व जयपुर देहात भाजपाध्यक्ष दीनदयाल कुमावत का था ! दीनदयाल कुमावत का फुलेरा विधानसभा क्षेत्र में बढ़ते हुए वर्चस्व को देखते हुए मौनी बाबा की तरह मौन धारण कर बैठे विधायक निर्मल कुमावत ने जिला बनाओ संघर्ष समिति को अपना समर्थन दिया जो केवल मात्र दिखावे के लिए था ! संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने महापड़ाव से दूरी बनाते हुये महापड़ाव से पूर्व मुख्यमंत्री आवास पर मुख्यमंत्री से मिले! जहां उन्हें केवल आश्वासन दिया गया! यही आश्वासन उन्हें पूर्व में भी दिया गया था ! सांभर-फुलेरा जिला बनाओ मुहिम में अपने आप को अकेला देखकर फुलेरा विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस प्रत्याशी रहे विद्याधर चौधरी ने दीनदयाल कुमावत के साथ कदम से कदम मिलाते हुए भरपूर साथ दिया! नाम नहीं छापने की शर्त पर फुलेरा विधानसभा क्षेत्र के राजनीतिक जानकारों ने बताया कि महापड़ाव के लिए युवाओं में जोश व उमंग दीनदयाल कुमावत की वजह से नजर आया! वहीं जानकारों ने बताया कि महापड़ाव में इतनी भीड़ कांग्रेस नेता विद्याधर चौधरी के आह्वान पर एकत्रित हुई! सांभर-फुलेरा को जिला बनायें जाने को लेकर यदि विद्याधर चौधरी भी विधायक निर्मल कुमावत की तरह मौन धारण कर लेते तो महापड़ाव में इतनी भीड़ नजर नहीं आती! महापड़ाव के दौरान जनमानस में विधायक निर्मल कुमावत के प्रति गुस्सा स्पष्ट रूप से नजर आया! जिसका खामियाजा पांच-छ: महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनावों में उन्हें भुगतना पड़ सकता है! विधायक निर्मल कुमावत एयरकंडीशनर कमरे में बैठे आराम फरमा रहें थे और उनके क्षेत्र की जनता जिला बनाने के लिए भीषण गर्मी में तपती सड़कों पर संघर्ष कर प्रशासन की लाठी चार्ज का सामना कर रही थी !

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