फर्टीलाईजर डिस्ट्रीब्यूशन रेगुलेटरी टॉस्क फोर्स की समीक्षा बैठक आयोजित
श्रीगंगानगर। जिले में उर्वरकों की उपलब्धता, भंडारण एवं वितरण व्यवस्था की समीक्षा हेतु बुधवार को जिला कलक्टर डॉ. अमित यादव की अध्यक्षता में जिला कलक्ट्रेट सभागार में बैठक आयोजित की गई। बैठक में खरीफ सीजन को दृष्टिगत रखते हुए जिले में उर्वरकों की उपलब्धता, वितरण व्यवस्था, स्टॉक स्थिति, किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने, जिले की उर्वरक मांग का आंकलन, आवश्यकता के अनुरूप उर्वरकों का वितरण, उर्वरकों की जमाखोरी एवं कालाबाजारी पर अंकुश लगाने हेतु उर्वरक निरीक्षको के माध्यम से प्रभावी कार्यवाही एफआईआर, यूरिया डाईवर्जन, कालाबाजारी, अवैध भण्डारण व अन्य राज्यों में परिगमन पर कार्यवाही, राज्य स्तर से कम्पनियों को जिलें में आपूर्ति हेतु निर्देशित मात्रा की आपूर्ति, पॉस मशीन कार्यशाली के संबंध में विस्तृत समीक्षा की गई। जिला कलक्टर डॉ. अमित यादव ने उर्वरकों की समय पर डिमांड भेजने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि गुणवत्ता को लेकर प्राप्त होने वाली शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने अवैध भंडारण पर रोक लगाने, चेक पोस्ट के माध्यम से उर्वरकों की जिले से बाहर अवैध निकासी रोकने तथा कृषि एवं पुलिस विभाग द्वारा संयुक्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। साथ ही नियमित रूप से रिटेल विक्रेताओं की जांच सुनिश्चित करने को कहा। जिला कलक्टर ने उर्वरक वितरण व्यवस्था की प्रभावी निगरानी के लिए कंट्रोल रूम स्थापित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर कालाबाजारी, ओवररेटिंग अथवा कृत्रिम कमी की शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाए। किसानों को समय पर उचित दर पर खाद उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) डॉ. सतीश कुमार शर्मा ने बताया कि जिले में वर्तमान में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है तथा पोर्टल के माध्यम से वितरण एवं स्टॉक की नियमित निगरानी की जा रही है। जिले में उर्वरक विक्रेताओं द्वारा पॉस मशीन के माध्यम से वितरण सुनिश्चित किया जा रहा है तथा बिना बिल अथवा अनियमित विक्रय पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि जिले में उर्वरकों की मांग एवं उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए बॉर्डर एरिया में चेक पोस्ट के माध्यम से उर्वरकों की आवाजाही पर निगरानी रखी जाएगी। साथ ही कंपनियों को निर्धारित स्टॉक से अधिक भंडारण नहीं करने एवं कम्पनी टैगिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। नियमों की अवहेलना पर संबंधित कंपनियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। बैठक में वर्ष 2025-26 के दौरान उर्वरक विक्रेताओं की संख्या, निरीक्षण, सैंपल एवं एफआईआर की स्थिति की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि जिले में 70 उर्वरक विक्रेतायों के यहां निरिक्षण के दौरान 7 सीजर तथा 5 एफआईआर की कार्रवाई की गई है। वर्ष 2025-26 में उर्वरक विक्रेताआंे के द्वारा उर्वरकों के वितरण व्यवस्था में अनियमतता के दौरान 171 कारण बताओ नोटिस एवं वर्ष 2026-27 मंे 127 कारण बताओ नोटिस दिये गए। बैठक में बताया गया कि जिले में गत 5 वर्षों का औसत बुवाई क्षेत्रफल 5,96,670 हेक्टेयर तथा गत वर्ष का बुवाई क्षेत्रफल 5,80,552 हेक्टेयर रहा। वर्ष 2026-27 मंे अब तक बुवाई क्षेत्रफल 1,29,652 हेक्टेयर हैं। वहीं वर्ष 2026-27 उर्वरकों की मांग के तहत एक लाख मैट्रिक टन यूरिया, 45 हजार मैट्रिक टन डीएपी, 65000 मैट्रिक टन सिंगल सुपर फास्फेट तथा 8 हजार मीट्रिक टन एनपीके की आवश्यकता आंकी गई है। जगजीत सिंह संधू, कृषि अनुसंधान अधिकारी, श्रीगंगानगर ने बैठक में नेशनल फ्रेमवर्क फॉर सेल्स ऑफ सब्सिडाइज्ड फर्टिलाइजर के अंतर्गत आईएफएमएस पोर्टल एवं एग्री-स्टैक पोर्टल के साथ इंटीग्रेशन के संबंध में उर्वरक विक्रेताओं एवं प्रतिनिधियों को विस्तार से जानकारी दी गई। उन्होने बताया कि राजस्थान में श्रीगंगानगर व नागौर जिले में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में यह पोर्टल इस वर्ष से लागू होगा, जिसमें किसान अपनी फसलवार उर्वरकों की मांग की ऑनलाइन बुकिंग रिटेलर डीलर को भिजवा सकेंगे। बैठक में एडीएम सतर्कता श्रीमती रीना, एएसपी दीपक शर्मा, एसीएओ हरीराम, कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. सतीश कुमार शर्मा , सुरजीत कुमार, सहकारिता विभाग के दीपक कुक्क्ड़ सहित संबंधित विभागीय अधिकारी, कृषि विभाग के प्रतिनिधि एवं उर्वरक निर्माता कम्पनी प्रतिनिधि व उर्वरक विक्रेता उपस्थित रहे