आरयूएचएस में नए मेडिकल छात्रों ने पहना व्हाइट कोट, ली सेवा की शपथ
जयपुर। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने नवप्रवेशित मेडिकल विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि चिकित्सा का पेशा अन्य व्यवसायों से अलग है। इसमें ज्ञान और विशेषज्ञता के साथ सेवा, संवेदनशीलता तथा समर्पण की भी जरूरत होती है। अस्पताल पहुंचने वाले मरीज सफेद कोट पहने डॉक्टर में बेहतर उपचार और स्वस्थ होने की उम्मीद देखते हैं। इसलिए चिकित्सकों को हर परिस्थिति में मरीज के हित को प्राथमिकता देनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सफेद कोट पारदर्शिता, शुद्ध विचारों और पेशेवर जिम्मेदारी का प्रतीक है। इसे धारण करने के बाद चिकित्सक का दायित्व बनता है कि वह निजी परेशानियों और पूर्वाग्रहों से ऊपर उठकर मरीज की देखभाल करे। मुख्य सचिव ने वरिष्ठ और कनिष्ठ रेजिडेंट डॉक्टरों की मेहनत का उल्लेख करते हुए कहा कि अस्पतालों में लंबे समय तक लगातार सेवाएं देना चिकित्सा पेशे के प्रति उनके समर्पण को दर्शाता है।
तकनीक के साथ मानवीय संवेदना भी जरूरी
डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल के बीच श्रीनिवास ने विद्यार्थियों को मानवीय दृष्टिकोण बनाए रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक का उद्देश्य मरीजों के लिए इलाज की प्रक्रिया को आसान बनाना होना चाहिए। चिकित्सा व्यवस्था कितनी भी आधुनिक क्यों न हो जाए, उसके केंद्र में हमेशा मरीज ही रहना चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षकों के साथ अच्छे संबंध रखने, नियमित रूप से पुस्तकालय में अध्ययन करने और नर्सिंग व पैरामेडिकल स्टाफ के साथ बेहतर तालमेल बनाकर काम करने की सीख दी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित राजस्थान और ‘हेल्थ फॉर ऑल’ का लक्ष्य हासिल करने में युवा डॉक्टरों का योगदान महत्वपूर्ण रहेगा।
विद्यार्थियों से बोले—मेहनत का कोई विकल्प नहीं
कार्यक्रम के दौरान मुख्य सचिव ने विद्यार्थियों के सवालों के जवाब भी दिए। उन्होंने कहा कि सफलता के लिए निरंतर अध्ययन, अनुशासन और उत्कृष्टता हासिल करने की लगन जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों को योग, माइंडफुलनेस, जिम और खेलकूद जैसी गतिविधियों को दिनचर्या में शामिल करने की सलाह दी। लेखन और ललित कला जैसी रचनात्मक गतिविधियों को भी तनाव कम करने और मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक बताया।
ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना और राज्य सरकार के प्रयासों से ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत किया जा रहा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में एएनएम की उपलब्धता, टीकाकरण और प्रसवपूर्व देखभाल जैसी सेवाओं पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों को ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने को समाज के लिए सार्थक योगदान देने का अवसर बताया।
चिकित्सा शिक्षा और शोध में आगे बढ़ने के लिए उन्होंने विद्यार्थियों को प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल ‘द लैंसेट’ तथा नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज के प्रकाशनों का अध्ययन करने की सलाह दी। साथ ही सेमिनार और कार्यशालाओं में सक्रिय भागीदारी करने तथा प्रख्यात चिकित्सक डॉ. बी. राममूर्ति के जीवन से प्रेरणा लेने की बात कही।
अभिभावकों के त्याग को याद रखने की सीख
चिकित्सा शिक्षा विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि नीट-यूजी जैसी कठिन परीक्षा में सफलता पाने के पीछे वर्षों की मेहनत, धैर्य और परिवार का सहयोग होता है। विद्यार्थियों को अपने माता-पिता के त्याग को हमेशा याद रखना चाहिए और आगे चलकर अपनी जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा से निभाना चाहिए।
राठौड़ ने कहा कि चिकित्सा में केवल ऑनलाइन शिक्षा या सैद्धांतिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है। जब किसी मरीज का इलाज किया जाता है, तब सही निर्णय लेने के लिए विषय की गहरी समझ और निरंतर अध्ययन जरूरी होता है। उन्होंने राज्य सरकार की मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य (मा) योजना के तहत 25 लाख रुपये तक के निःशुल्क उपचार, मुफ्त दवाइयों और जांच जैसी सुविधाओं का उल्लेख किया।
उन्होंने विद्यार्थियों से सरकारी मेडिकल कॉलेजों में उपलब्ध सुविधाओं का बेहतर उपयोग कर कुशल चिकित्सक बनने और समाज को अपना योगदान लौटाने की अपील की। उन्होंने कहा कि भविष्य में उनकी प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को भी गुणवत्तापूर्ण इलाज मिल सके।
समारोह में आरयूएचएस के प्राचार्य डॉ. मनीष ग्रोवर, वरिष्ठ चिकित्सक, फैकल्टी सदस्य, सीनियर रेजिडेंट, नवप्रवेशित विद्यार्थी और उनके अभिभावक मौजूद रहे।