पिड़ावा : भेदज्ञान से कषाय उत्पन्न नहीं होती:-पंडित ज्ञाता सिंघई
पिड़ावा। दसलक्षण महापर्व के अवसर पर सिवनी से पधारे पंडित ज्ञाता सिंघई ने पंचबालयति स्वाध्याय भवन व चैत्यालय में चल रहे व्याख्यान में श्रोताओं को बताया कि जीव को जब भेद ज्ञान उत्पन्न हो जाता है तब राग द्वेष कषाय उत्पन्न नहीं होती क्योकि जीव के दुखी होने का कारण अज्ञान से पर पदार्थों को इष्ट अनिष्ट अर्थात अच्छा बुरा मानना है। इसके कारण से जीव दुखी होता है जब जीव को यथार्थ ज्ञान हो जाता है कि जगत का कोई भी पदार्थ अच्छा बुरा नहीं है तो कषाय उत्पन्न नहीं होती और यहीं से भेद विज्ञान का मार्ग प्रारंभ हो जाता है, क्योंकि वस्तु के छोड़ने पर भी अंदर में जो राग है फल उसका मिलता है ना की वस्तु के छोड़ने का ज्ञान का काम मात्रा जानना है और अज्ञान के कारण से जीव जाने हुए पदार्थ में अच्छे बुरे की कल्पना करता है। जिससे जीव दुखी होता है मनीष शास्त्री ने बताया कि रात्रि कालीन प्रवचन के पश्चात धार्मिक ज्ञान पहेली कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें उपस्थित जन समूह ने उत्साह से भाग लिया तथा छात्र-छात्राओं ने ज्ञान एवं वैराग्य वर्धक भजनों पर अपनी सुंदर प्रस्तुतियां दी। महापर्व के दशमी के अवसर पर " हमारा परिधान एक संदेश " कार्यक्रम का आयोजन होगा।